Palamu Raid: बड़ा खुलासा, पलामू में करोड़ों के अफीम का काला धंधा ध्वस्त, पुलिस ने घेराबंदी कर दबोचे 2 बड़े तस्कर
पलामू पुलिस ने मनातू के चक गांव में छापेमारी कर सवा किलो के करीब अफीम की बड़ी खेप के साथ दो तस्करों को रंगे हाथों पकड़ा है। तस्करों के घर से बरामद मादक पदार्थों और पुलिस की इस गुप्त रणनीतिक कार्रवाई की पूरी रोमांचक रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी पलामू के जंगलों में पनप रहे इस 'नशीले जहर' की सच्चाई कभी नहीं जान पाएंगे।
पलामू, 6 जनवरी 2026 – झारखंड के पलामू जिले में नशे के सौदागरों के खिलाफ पुलिस ने साल की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। मनातू थाना क्षेत्र के ग्राम चक में पुलिस ने सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए अफीम तस्करी के एक हाई-प्रोफाइल सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। लेस्लीगंज एसडीपीओ के नेतृत्व में हुई इस छापेमारी में पुलिस ने 1.114 किलोग्राम अफीम के साथ दो शातिर तस्करों को गिरफ्तार किया है। पलामू के सुदूरवर्ती इलाकों को 'नशे का गढ़' बनाने की कोशिश कर रहे इन अपराधियों की गिरफ्तारी से माफियाओं के बीच हड़कंप मच गया है।
गुप्त सूचना और घेराबंदी: चक गांव में पुलिस की 'दबिश'
पुलिस को 5 जनवरी की शाम पुख्ता सूचना मिली थी कि मनातू के चक गांव में अफीम की एक बड़ी खेप को बाजार में खपाने की तैयारी चल रही है।
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विशेष टीम का गठन: सूचना की संवेदनशीलता को देखते हुए पलामू एसपी के निर्देश पर लेस्लीगंज अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में एक स्ट्राइक टीम बनाई गई।
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छापेमारी का मंजर: टीम ने जैसे ही ग्राम चक स्थित उमाशंकर कुमार के घर पर धावा बोला, वहां मौजूद लोग भागने की कोशिश करने लगे। लेकिन पुलिस ने पहले ही इलाके की घेराबंदी कर ली थी।
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बरामदगी: घर की गहन तलाशी लेने पर एक प्लास्टिक की थैली में भरा हुआ भूरा पदार्थ मिला, जो जांच के बाद शुद्ध अफीम पाया गया। इसका वजन 1 किलो 114 ग्राम मापा गया है।
कौन हैं ये तस्कर? रिश्तेदारी में चल रहा था 'काला कारोबार'
पुलिस ने मौके से दो मुख्य आरोपियों को दबोचा है, जो आपस में रिश्तेदार बताए जा रहे हैं।
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उमाशंकर कुमार: यह चक गांव का ही निवासी है और तस्करी का मुख्य सरगना माना जा रहा है।
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राहुल कुमार: उमाशंकर का रिश्तेदार, जो डिलीवरी और ग्राहक खोजने का काम संभाल रहा था।
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नेटवर्क का खुलासा: इनके पास से दो मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं, जिनमें कई सफेदपोश तस्करों और बाहर के राज्यों के ग्राहकों के नंबर मिले हैं। पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि वे इसे ऊंचे दामों पर पंजाब और दिल्ली जैसे राज्यों में भेजने की फिराक में थे।
पलामू पुलिस एक्शन: बरामदगी का ब्योरा (Action Snapshot)
| विवरण | जानकारी (Data) |
| जब्त मादक पदार्थ | 1.114 किलोग्राम अफीम |
| गिरफ्तार तस्कर | उमाशंकर कुमार और राहुल कुमार |
| कार्रवाई स्थल | ग्राम चक, मनातू थाना, पलामू |
| कानूनी धारा | NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज |
| बरामद अन्य सामान | 02 स्मार्ट मोबाइल फोन |
इतिहास और रंजिश: पलामू के जंगलों का 'सफेद जहर'
पलामू का मनातू, पांकी और लेस्लीगंज इलाका ऐतिहासिक रूप से अफीम की खेती और तस्करी के लिए बदनाम रहा है। 90 के दशक में यहाँ अफीम की खेती केवल दुर्गम जंगलों तक सीमित थी, लेकिन अब तस्करों ने इसे घरों के भीतर से संचालित करना शुरू कर दिया है। पलामू के इन इलाकों की मिट्टी और जलवायु अफीम की खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है, जिसका फायदा स्थानीय माफिया उठाते हैं। 2015-16 के दौरान पलामू पुलिस ने हजारों एकड़ अफीम की खेती को नष्ट किया था, लेकिन अब तस्करों ने 'स्टॉक और सप्लाई' का नया मॉडल अपनाया है। उमाशंकर और राहुल की गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि अब छोटे गांव भी इस नशे के कारोबार के केंद्र बन रहे हैं।
एनडीपीएस एक्ट और जेल: पुलिस की अगली रणनीति
मनातू पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट की कड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया है।
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आगे की तलाश: पुलिस अब यह पता लगा रही है कि उमाशंकर ने यह अफीम खुद उगाई थी या किसी नक्सली प्रभावित इलाके से इसे खरीदा था।
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कॉल डिटेल्स की जांच: जब्त किए गए मोबाइल फोनों की कॉल डिटेल्स खंगाली जा रही है, जिससे इस नेटवर्क के 'बिग बॉस' तक पहुँचा जा सके।
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पुलिस की चेतावनी: पलामू पुलिस ने स्पष्ट किया है कि नशे के खिलाफ यह जंग 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर चलेगी। गांव-गांव में मुखबिरों का जाल फैला दिया गया है ताकि ऐसी किसी भी गतिविधि को पनपने से पहले ही कुचल दिया जाए।
नशे की चेन तोड़ना जरूरी
पलामू पुलिस की यह कामयाबी केवल एक किलो अफीम की जब्ती नहीं है, बल्कि उस चेन को तोड़ने की कोशिश है जो युवाओं को नशे की गर्त में धकेल रही है। उमाशंकर और राहुल अब जेल की सलाखों के पीछे हैं, लेकिन उनके पीछे छिपा पूरा नेटवर्क अब पुलिस के राडार पर है।
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