Palamu Accident: आधी रात को आंगन में सोए टेंपो चालक पर चढ़ी सरकारी डॉक्टर की अनियंत्रित कार, मौके पर ही दर्दनाक मौत!
पलामू के सिक्की गांव में पाटन सीएचसी के डॉक्टर मिथिलेश कुमार की कार अनियंत्रित होकर घर में घुसने और आंगन में सोए विनोद सिंह को रौंदने की खौफनाक ऑन-फील्ड लाइव ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ देखें।
पलामू, 29 मई 2026 – झारखंड के पलामू जिले के पाटन-मेदनीनगर मुख्य मार्ग कॉरिडोर पर स्थित सिक्की गांव से गुरुवार की आधी रात को एक बेहद दिल दहला देने वाली, रोंगटे खड़े कर देने वाली और भीषण सड़क दुर्घटना (Road Accident) सामने आई है। यहाँ पाटन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार की तेज रफ्तार कार (निबंधन संख्या: JH 03 AC 8251) अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने एक गरीब ग्रामीण के घर की विधिक सीमा को तोड़ते हुए सीधे उसके आंगन में जा घुसी। कार ने आंगन में गहरी नींद में सोए 34 वर्षीय टेंपो चालक विनोद सिंह को इतनी बुरी तरह रौंद दिया कि मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई। इस महा-विस्फोटक टक्कर में डॉक्टर की कार के परखच्चे उड़ गए और डॉ. मिथिलेश कुमार भी वाहन के भीतर गंभीर रूप से घायल हो गए। इस खौफनाक हादसे के बाद पूरे सिक्की गांव और पाटन अंचल के नागरिकों में भारी आक्रोश, चीख-पुकार और मातम का माहौल व्याप्त है। पाटन थाना प्रभारी अनिल कुमार विद्यार्थी ने शुक्रवार की सुबह मौके पर पहुंचकर विधिक शव जब्ती सूची तैयार की और शव को पोस्टमार्टम के लिए मेदनीनगर भेज दिया है।
हादसे की लाइव इनसाइड स्टोरी: पाटन से मेदनीनगर का डार्क सफर, सिक्की मोड़ का खौफनाक टर्निंग और रात का कोहराम
पलामू जिला पुलिस नियंत्रण कक्ष, सदर अस्पताल मेदनीनगर फॉरेंसिक विंग और पाटन थाना गश्ती दल के आंतरिक विधिक सूत्रों से मिली लाइव ऑन-फील्ड इनपुट के अनुसार, यह हादसा विधिक रूप से ओवरस्पीडिंग या टर्निंग जजमेंट फेल होने के कारण हुआ।
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ड्यूटी के बाद मेदनीनगर वापसी: गुरुवार की रात करीब 11:30 बजे पाटन सीएचसी के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार अपनी निजी कार से पाटन अस्पताल से मेदनीनगर स्थित अपने आवास की ओर लौट रहे थे।
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सिक्की गांव का अंधा मोड़: जैसे ही उनकी तेज रफ्तार कार सिक्की गांव के पास बने एक बेहद खतरनाक और डार्क टर्निंग (Blind Curve) पर पहुंची, अचानक डॉक्टर का स्टीयरिंग से विधिक नियंत्रण खो गया। गाड़ी सीधे सड़क से उतरकर पास के मकान की मिट्टी की दीवार तोड़ते हुए आंगन में घुस गई।
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आशियाने में ही मिल गया काल: परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य विनोद सिंह दिनभर टेंपो चलाकर थकने के बाद अपने आंगन में खुले आसमान के नीचे सोया था। कार का पहिया उसके सीने को रौंदते हुए निकल गया। ग्रामीणों ने भारी मशक्कत के बाद मलबे और कार की बॉडी को काटकर गंभीर रूप से घायल डॉक्टर को बाहर निकाला और पुलिस वैन से अस्पताल भेजा।
ग्रामीण सड़कों पर क्रैश बैरियर्स और डॉक्टरों-अधिकारियों के लिए नाइट ड्राइविंग सेफ्टी विधिक गाइडलाइन समय की मांग
पाटन थाना पुलिस और अंचल अधिकारियों की संयुक्त विधिक टीमों ने जिस मुस्तैदी से रात के अंधेरे में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया, डॉक्टर की जान बचाई और कानून व्यवस्था को बिगड़ने से रोका, वह पलामू पुलिस की मुस्तैद ऑन-फील्ड कार्यशैली का एक बड़ा माइलस्टोन है। पुलिस ने डॉ. मिथिलेश कुमार की कार को विधिक रूप से सीज कर दिया है और मृतक विनोद सिंह के आश्रितों को सरकारी मुआवजा दिलाने की कागजी विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेकिन केवल शव का पोस्टमार्टम कराना या मुआवजा देना इस गहरे डार्क रूट डेंजर का स्थायी समाधान नहीं है। 2026 के इस आधुनिक और हाई-वे कनेक्टिविटी के युग में झारखंड सड़क निर्माण विभाग (RCD), केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय और पलामू जिला प्रशासन को तुरंत संयुक्त संज्ञान लेते हुए सिक्की गांव के इस खतरनाक मोड़ सहित पूरे पाटन-मेदनीनगर कॉरिडोर पर 'ब्लिंकर्स', 'कैट्स आई' और मजबूत 'विधिक स्टील क्रैश बैरियर्स' (W-Beam Crash Barriers) लगाने होंगे। जब तक इन ग्रामीण आवासीय मोड़ों की विधिक और तकनीकी किलेबंदी नहीं की जाती, तब तक पलामू के इस ऐतिहासिक और व्यस्त ग्रामीण अंचल को अनियंत्रित वाहनों के इस डार्क और जानलेवा इतिहास से पूरी तरह मुक्त नहीं कराया जा सकेगा।
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