Koderma Death : प्लेटफार्म पर दौड़ते ही थमीं सांसें, पत्नी से मिलने की चाहत बनी आखिरी सफर
कोडरमा स्टेशन पर ट्रेन पकड़ने की एक छोटी सी गलती और हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया; क्लर्क पंकज कुमार के साथ हुए इस खौफनाक हादसे की पूरी सच्चाई यहाँ देखें।
कोडरमा (Koderma): झारखंड के कोडरमा रेलवे जंक्शन से एक ऐसी खबर आई है जिसने सबको झकझोर कर रख दिया है। एक सरकारी कर्मचारी की ट्रेन पकड़ने की मामूली सी जल्दबाजी ने उसकी जान ले ली। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या चंद मिनटों की देरी हमारी जिंदगी से ज्यादा कीमती है?
आखिरी सफर: पत्नी से मिलने की थी बेताबी
नवादा (बिहार) के रहने वाले 49 वर्षीय पंकज कुमार मरकच्चो प्रखंड कार्यालय में लिपिक (Clerk) के पद पर तैनात थे। सोमवार की शाम वह अपनी पत्नी से मिलने गयाजी जाने के लिए घर से निकले थे। उनकी पत्नी गया में शिक्षिका हैं। पंकज को जम्मूतवी एक्सप्रेस पकड़नी थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
प्लेटफॉर्म पर मची अफरा-तफरी: दौड़ और मौत का मुकाबला
पंकज कुमार जब स्टेशन पहुंचे, तो ट्रेन खुलने ही वाली थी। हाथ से ट्रेन न निकल जाए, इसी हड़बड़ी में वह प्लेटफॉर्म पर तेजी से दौड़ने लगे। चश्मदीदों के मुताबिक, अचानक उनका संतुलन बिगड़ा और वह जमीन पर गिर पड़े। गिरने के साथ ही वह बेहोश हो गए। वहां मौजूद आरपीएफ जवानों ने तुरंत उन्हें संभाला और अपने वाहन से अस्पताल ले गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
कार्डियक अरेस्ट: भागदौड़ और बढ़ता तनाव
डॉक्टरों का मानना है कि अचानक तेज दौड़ने के कारण उनके दिल पर दबाव बढ़ा और वह कार्डियक अरेस्ट (हृदय गति रुकना) का शिकार हो गए। आज के दौर में भागदौड़ भरी जिंदगी और काम का तनाव शरीर को भीतर से कमजोर कर रहा है।
इतिहास और करियर: निर्वाचन विभाग से मरकच्चो तक का सफर
पंकज कुमार का प्रोफेशनल करियर काफी सराहनीय रहा था।
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पिछला अनुभव: मरकच्चो आने से पहले वह निर्वाचन विभाग (Election Department) में अपनी सेवाएं दे रहे थे।
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वर्तमान तैनाती: पिछले दो सालों से वह मरकच्चो प्रखंड कार्यालय में लिपिक के रूप में कार्यरत थे।
उनके सहकर्मियों का कहना है कि वह एक मिलनसार और कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति थे। उनकी अचानक मौत की खबर सुनकर बीडीओ और अन्य जिला अधिकारी भी अस्पताल पहुंचे।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
पंकज अपने पीछे दो छोटे बच्चे और पत्नी को छोड़ गए हैं। मंगलवार को पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। जिस घर में खुशियों की उम्मीद थी, वहां अब मातम पसरा है। यह घटना हर उस यात्री के लिए एक सबक है जो चलती ट्रेन पकड़ने या प्लेटफॉर्म पर जान जोखिम में डालकर दौड़ने की कोशिश करते हैं।
सुरक्षा सर्वोपरि
रेलवे प्रशासन हमेशा चेतावनी देता है कि "ट्रेन छूट जाए तो दूसरी मिल जाएगी, लेकिन जिंदगी नहीं।" कोडरमा की यह घटना इस बात का जीता-जागता प्रमाण है। स्टेशन पर सुरक्षित चलें और समय का प्रबंधन पहले से करें।
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