IND vs WI : कुलदीप यादव का 'शर्मनाक' शतक! पहली पारी का हीरो दूसरी में बना जीरो, सिर्फ डेढ़ दिन में पलटी किस्मत, वेस्टइंडीज ने करियर पर लगाया दाग, 100 से ज्यादा रन लुटाकर बनाया अनचाहा रिकॉर्ड! भारत जीत के करीब, राहुल-सुदर्शन ने संभाला मोर्चा!
दिल्ली टेस्ट में कुलदीप यादव ने पहली पारी में 5 विकेट लेकर रिकॉर्ड बनाया, लेकिन दूसरी पारी में 104 रन लुटाकर अपने टेस्ट करियर का पहला 'शर्मनाक शतक' पूरा किया। वेस्टइंडीज के पलटवार के बावजूद भारत जीत के करीब है और उसे सिर्फ 121 रन का लक्ष्य मिला है। केएल राहुल और साई सुदर्शन जीत की ओर बढ़ रहे हैं।
क्रिकेट की दुनिया में जीत और हार के बीच सिर्फ एक पल का फासला होता है, लेकिन इससे भी दिलचस्प होती है किसी खिलाड़ी के प्रदर्शन में आने वाली अचानक उतार-चढ़ाव। दिल्ली टेस्ट में कुलदीप यादव के साथ जो हुआ है, वह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। पहली पारी में अपनी फिरकी के दम पर वेस्टइंडीज के पांच बल्लेबाजों को पवेलियन भेजकर हीरो बने कुलदीप को अगले डेढ़ दिन में वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने ऐसे धोया कि उनके करियर पर एक अनचाहा और 'शर्मनाक शतक' का दाग लग गया।
क्रिकेट के इतिहास में गेंदबाजों के लिए 'शतक' का मतलब सौ रन देना होता है, जो उनकी खराब परफॉर्मेंस का प्रतीक है। कुलदीप यादव जैसे स्पिनर के लिए टेस्ट क्रिकेट की एक पारी में 100 रन देना एक बड़ा झटका माना जाता है। पहली पारी में 58 रन देकर 5 विकेट लेने के बाद जिस तरह से वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने दूसरी पारी में उन्हें निशाना बनाया, वह भारतीय गेंदबाजी यूनिट के लिए एक चिंता का विषय है।
वेस्टइंडीज का चौंकाने वाला पलटवार
भारत ने अपनी पहली पारी 5 विकेट के नुकसान पर 518 रन बनाकर घोषित की थी। यशस्वी जायसवाल ने 175 और कप्तान शुभमन गिल ने नाबाद 129 रन बनाकर टीम को विशाल स्कोर तक पहुंचाया था। इसके जवाब में वेस्टइंडीज की टीम पहली पारी में महज 248 रनों पर ढेर हो गई और भारत को 270 रनों की बड़ी बढ़त मिली।
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पारी की जीत का भ्रम: गेंदबाजी और बल्लेबाजी के इस असाधारण अंतर को देखकर लग रहा था कि भारत यह मैच आसानी से पारी के अंतर से जीत लेगा।
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विंडीज ने दिखाया दम: लेकिन वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने दूसरी पारी में अप्रत्याशित पलटवार किया और 390 रन बनाकर भारत को 121 रनों का लक्ष्य दिया।
कुलदीप का टेस्ट करियर का अनचाहा शतक
यह पलटवार सीधे तौर पर कुलदीप यादव की गेंदबाजी पर दाग लगा गया। उम्मीद थी कि वह पहली पारी की तरह दूसरी पारी में भी विंडीज को जल्दी समेटेंगे। लेकिन परिणाम चौंकाने वाला रहा।
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104 रन लुटाए: दूसरी पारी में कुलदीप को अपने विकेटों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा और उन्होंने सिर्फ तीन विकेट लेने के लिए 29 ओवरों में 104 रन दे दिए।
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पहला शतक: यह उनके टेस्ट करियर में पहला मौका है जब उन्होंने एक पारी में 100 से ज्यादा रन दिए हैं। यह अनचाहा रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से उनकी मानसिकता पर भारी पड़ेगा।
भारत जीत के करीब
वेस्टइंडीज के इस पलटवार के बावजूद भी टीम इंडिया मैच जीतने की स्थिति में है। 121 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत ने चौथे दिन का खेल खत्म होने तक एक विकेट के नुकसान पर 63 रन बना लिए हैं।
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मोर्चे पर राहुल-सुदर्शन: केएल राहुल 25 और साई सुदर्शन 30 रन बनाकर क्रीज पर डटे हुए हैं। भारत को जीतने के लिए अब सिर्फ 58 रनों की आवश्यकता है।
मैच का अंतिम दिन भारत के लिए सिर्फ एक औपचारिकता लग रहा है, लेकिन कुलदीप यादव के प्रदर्शन ने टीम मैनेजमेंट को उनकी कंसिस्टेंसी पर विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।
आपकी राय में, किसी भी गेंदबाज के लिए टेस्ट की एक पारी में अचानक 100 से अधिक रन देना उनके प्रदर्शन पर किस तरह का मानसिक दबाव डालता है और टीम मैनेजमेंट को उसे कैसे संभालना चाहिए?
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