Jharkhand Toll Tax Hike : आज आधी रात से टोल टैक्स में भारी बढ़ोतरी, रांची-जमशेदपुर समेत पूरे झारखंड में सफर होगा महंगा, देखें नई रेट लिस्ट
झारखंड के प्रमुख नेशनल हाईवे पर सफर करने वालों को आज 31 मार्च की आधी रात से ज्यादा टोल टैक्स देना होगा। पुंदाग, कोकपाड़ा और पाटा समेत अन्य टोल प्लाजा की नई दरों और मासिक पास की पूरी जानकारी यहाँ देखें।
रांची/जमशेदपुर, 31 मार्च 2026 – राष्ट्रीय उच्च पथ (National Highway) पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए आज की रात भारी पड़ने वाली है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने झारखंड के प्रमुख टोल प्लाजा के लिए नई दरों की घोषणा कर दी है, जो 31 मार्च 2026 की रात 12 बजे से प्रभावी हो जाएंगी। इस बढ़ोतरी के बाद निजी कारों से लेकर भारी कमर्शियल वाहनों तक, हर श्रेणी में जेब ज्यादा ढीली करनी होगी। नई दरों का सबसे बड़ा असर रांची, जमशेदपुर, हजारीबाग और सरायकेला जैसे मार्गों पर आवाजाही करने वाले हजारों यात्रियों और मालवाहक वाहनों पर पड़ेगा। अप्रैल की शुरुआत के साथ ही अब हाईवे का सफर आपकी मासिक बजट बिगाड़ने के लिए तैयार है।
पुंदाग और कोकपाड़ा: सबसे ज्यादा आवाजाही वाले रूट महंगे
झारखंड के सबसे व्यस्त मार्गों में शुमार पुंदाग और कोकपाड़ा टोल प्लाजा पर अब सफर करना पहले जैसा नहीं रहेगा।
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पुंदाग टोल प्लाजा: यहाँ कार और जीप जैसे हल्के वाहनों के लिए एकल यात्रा का शुल्क अब 135 रुपये होगा। यदि आप 24 घंटे के भीतर लौटते हैं, तो आपको 200 रुपये चुकाने होंगे। भारी मशीनरी वाहनों के लिए यह दर 710 रुपये तक पहुँच गई है।
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कोकपाड़ा (पूर्वी सिंहभूम): जमशेदपुर-ओडिशा मार्ग पर स्थित इस प्लाजा पर कार चालकों को एकल यात्रा के लिए 110 रुपये और वापसी के लिए 165 रुपये देने होंगे। बड़े कमर्शियल वाहनों के लिए यहाँ 720 रुपये तक का शुल्क निर्धारित किया गया है।
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एदलहातू: यहाँ कार चालकों को अब एक तरफ के 125 रुपये और वापसी के 185 रुपये देने होंगे।
पाटा और पतराचोली: सरायकेला और रांची रूट का नया गणित
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 23 पर स्थित पाटा और पतराचोली टोल प्लाजा की दरें भी संशोधित की गई हैं।
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पाटा टोल प्लाजा (सरायकेला-खरसावां): यहाँ राहत की बात यह है कि दरें अन्य के मुकाबले कम हैं। कार और वैन के लिए एकल यात्रा 25 रुपये और वापसी 40 रुपये तय की गई है। हालांकि, बस और ट्रकों के लिए यह 85 से 130 रुपये के बीच है।
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पतराचोली (रांची-पलमा मार्ग): यहाँ हल्के वाहनों के लिए एकल यात्रा शुल्क 35 रुपये और वापसी 55 रुपये रखा गया है।
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स्थानीय पास की सुविधा: राहत की खबर उन लोगों के लिए है जो टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहते हैं। उनके लिए विशेष रियायती पास की व्यवस्था बरकरार रखी गई है।
टोल टैक्स का इतिहास और एनएचएआई की रणनीति
भारत में टोल टैक्स की शुरुआत सड़कों के रखरखाव और नए हाईवे के निर्माण के लिए फंड जुटाने के उद्देश्य से की गई थी।
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सालाना संशोधन: एनएचएआई हर साल थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार पर टोल दरों की समीक्षा करता है। 2026 की यह बढ़ोतरी पिछले साल के मुकाबले सड़क निर्माण लागत में हुई वृद्धि को दर्शाती है।
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फास्टैग (FASTag) का असर: शत-प्रतिशत फास्टैग अनिवार्य होने के बाद टोल संग्रह में पारदर्शिता तो आई है, लेकिन दरों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से आम जनता और ट्रांसपोर्टर्स में नाराजगी भी देखी जा रही है।
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इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाम बोझ: सरकार का तर्क है कि बेहतर सड़कें समय और ईंधन बचाती हैं, जिसके बदले टोल लिया जाना तर्कसंगत है। हालांकि, झारखंड जैसे राज्य में जहाँ कोयला और लौह अयस्क का परिवहन ज्यादा होता है, वहां टोल बढ़ने से लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ना तय है।
किसे कितनी राहत और कहाँ बढ़ी आफत?
नई अधिसूचना में विभिन्न श्रेणी के वाहनों के लिए अलग-अलग स्लैब बनाए गए हैं।
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पंजीकृत वाहन (Local): पतराचोली में जिले में पंजीकृत वाहनों के लिए एकल यात्रा शुल्क मात्र 15 रुपये रखा गया है, जो स्थानीय लोगों के लिए बड़ी राहत है।
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मासिक पास: नियमित यात्रियों के लिए मासिक पास की सुविधा दी गई है। उदाहरण के तौर पर पतराचोली में यह पास 1100 रुपये का होगा।
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भारी वाहनों पर चोट: सात या उससे अधिक धुरी वाले विशाल वाहनों के लिए पतराचोली में वापसी यात्रा 320 रुपये और पुंदाग में दरें 865 रुपये तक पहुँच गई हैं। इसका सीधा असर रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर पड़ सकता है क्योंकि माल ढुलाई महंगी होगी।
झारखंड के राजमार्गों पर आज रात 12 बजे के बाद से सफर की तस्वीर बदलने वाली है। पुंदाग से लेकर पाटा तक, हर कांटा अब आपकी जेब पर ज्यादा वार करेगा। टोल दरों में यह बढ़ोतरी केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि परिवहन महंगा होने से फल, सब्जी और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी उछाल आने की संभावना है। यदि आप कल सफर की योजना बना रहे हैं, तो अपने फास्टैग को पर्याप्त बैलेंस के साथ रिचार्ज कर लें। क्या बेहतर सड़कों के नाम पर हर साल बढ़ता यह बोझ आम आदमी के लिए जायज है? फिलहाल, नई दरें लागू होने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
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