Koderma Fraud: बड़ी लूट, कोडरमा में मदद के बहाने ATM ठगी, शातिर ने एक झटके में खाते से उड़ाए 1.73 लाख रुपये
कोडरमा के डोमचांच में दवा खरीदने गए एक व्यक्ति को मदद का झांसा देकर शातिर ठग ने उसके बैंक खाते से 1 लाख 73 हजार रुपये साफ कर दिए हैं। सिक्योरिटी गार्ड बनकर आए इस 'डिजिटल डकैत' की चालाकी और पुलिस की भागदौड़ की पूरी रोंगटे खड़े कर देने वाली रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी ATM इस्तेमाल करते समय अपनी मेहनत की कमाई खो सकते हैं।
कोडरमा/डोमचांच, 6 जनवरी 2026 – झारखंड के कोडरमा जिले के डोमचांच बाजार में ठगी की एक ऐसी वारदात सामने आई है, जिसने बैंकिंग सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पश्चिम बंगाल से एक पारिवारिक समारोह में शामिल होने आए दिनेश साव को क्या पता था कि एक अनजान शख्स की 'मदद' उन्हें कंगाली की कगार पर लाकर खड़ा कर देगी। शातिर ठग ने खुद को सिक्योरिटी गार्ड जैसा दिखाकर दिनेश का भरोसा जीता और महज कुछ ही मिनटों में उनके खाते से 1,73,000 रुपये उड़ा लिए। जब तक पीड़ित को खबर हुई, उनकी जीवन भर की जमा पूंजी गायब हो चुकी थी।
मदद का मुखौटा: ऐसे बुना गया ठगी का जाल
यह पूरी घटना 22 दिसंबर की है, लेकिन इसका खुलासा तब हुआ जब पीड़ित वापस अपने घर बंगाल पहुँचा।
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जरूरत बनी मजबूरी: दिनेश साव रजौली (बिहार) में एक श्राद्ध कर्म से लौटकर डोमचांच आए थे। बंगाल निकलने से पहले उन्हें दवाइयों के लिए पैसों की जरूरत थी, जिसके लिए वे एचडीएफसी (HDFC) बैंक के एटीएम पहुँचे।
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फर्जी मददगार की एंट्री: एटीएम मशीन में तकनीकी दिक्कत आने पर पास खड़े एक व्यक्ति ने बड़े सलीके से उनकी मदद की पेशकश की। उस व्यक्ति का पहनावा और व्यवहार बिल्कुल सिक्योरिटी गार्ड जैसा था, जिससे दिनेश को उस पर शक नहीं हुआ।
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पिन और डेटा की चोरी: ठग ने चालाकी से दिनेश से उनका अकाउंट नंबर और पिन एंटर करवाया। पैसे तो नहीं निकले, लेकिन उस शातिर ने सारा डेटा 'क्लोन' कर लिया या कार्ड बदल दिया।
12 दिन बाद लगा झटका: "खाते में पैसे नहीं हैं"
दिनेश साव को लगा कि शायद सर्वर डाउन है, इसलिए वे वापस बंगाल चले गए। लेकिन जब 3 जनवरी को वे अपनी स्थानीय बैंक शाखा पहुँचे, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
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शून्य बैलेंस: बैंक कर्मियों ने बताया कि उनके खाते में पैसे ही नहीं हैं।
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पासबुक का सच: जब पासबुक अपडेट हुई, तो पता चला कि उसी 22 दिसंबर को, जिस दिन वे डोमचांच एटीएम गए थे, उनके खाते से किस्तों में कुल 1.73 लाख रुपये निकाल लिए गए।
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पुलिस में शिकायत: सोमवार को दिनेश साव वापस डोमचांच पहुँचे और थाने में लिखित आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई।
कोडरमा एटीएम ठगी: केस का पूरा ब्योरा (Fraud Snapshot)
| विवरण | जानकारी (Details) |
| पीड़ित का नाम | दिनेश साव (निवासी: चौबंगा, पश्चिम बंगाल) |
| वारदात स्थल | एचडीएफसी बैंक एटीएम, डोमचांच बाजार |
| ठगी गई राशि | 1,73,000 रुपये |
| तरीका (Modus Operandi) | मदद के बहाने पिन और कार्ड की जानकारी चुराना |
| पुलिस कार्रवाई | सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू |
इतिहास और रंजिश: कोडरमा-नवादा बेल्ट और 'साइबर ठगी' का गढ़
ऐतिहासिक रूप से कोडरमा का डोमचांच और बिहार का नवादा जिला 'साइबर अपराधियों' के सॉफ्ट टारगेट रहे हैं। 2010 के बाद जब बैंकिंग डिजिटल हुई, तो जामताड़ा की तर्ज पर इस बेल्ट में भी 'एटीएम स्वैपिंग' और 'पिन स्नैचिंग' के मामले बढ़े हैं। पहले ठग केवल फोन कॉल पर ओटीपी मांगते थे, लेकिन अब वे भौतिक रूप से एटीएम के पास मौजूद रहकर लोगों को अपना शिकार बनाते हैं। 2023 में भी डोमचांच बाजार में ऐसी ही एक घटना हुई थी, जहाँ एक रिटायर्ड शिक्षक के कार्ड को शातिरों ने बदल दिया था। दिनेश साव की घटना यह साबित करती है कि अपराधियों ने अब 'सिक्योरिटी गार्ड' का गेटअप अपना लिया है ताकि लोग आसानी से उन पर भरोसा कर सकें।
पुलिस की रडार पर 'फर्जी गार्ड': सीसीटीवी खंगाल रही टीम
डोमचांच थाना पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए टेक्निकल सेल की मदद ली है।
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सीसीटीवी फुटेज: पुलिस एटीएम के अंदर और बाहर लगी कैमरों की रिकॉर्डिंग देख रही है। 22 दिसंबर को उस खास समय पर एटीएम में कौन-कौन मौजूद था, इसकी लिस्ट तैयार की जा रही है।
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अंतर्राज्यीय गिरोह का शक: पुलिस को संदेह है कि यह गिरोह बिहार के नवादा या गया का हो सकता है, जो अक्सर सीमावर्ती इलाकों में वारदातों को अंजाम देकर भाग जाते हैं।
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अलर्ट जारी: प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि एटीएम के भीतर किसी भी अनजान व्यक्ति से मदद न लें और अपना पिन डालते समय कीपैड को हाथों से ढंकें।
आपकी सावधानी ही आपका बचाव है
दिनेश साव की 1.73 लाख की चपत हमें याद दिलाती है कि डिजिटल युग में 'मदद' भी महंगी पड़ सकती है। कोडरमा पुलिस भले ही जांच का दावा कर रही है, लेकिन खोई हुई रकम वापस मिलना एक लंबी और कठिन प्रक्रिया है। एटीएम के भीतर खड़े हर शख्स को 'गार्ड' समझने की भूल कभी न करें।
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