Chaibasa College Survey: जर्जर दीवारें, टूटे बेंच-डेस्क, युवा नेता ने ग्राउंड सर्वे में खोली कॉलेज की पोल

Chaibasa Ground Survey: भाजपा युवा नेता दुवारिका शर्मा ने ज्ञान चंद्र जैन कॉमर्स कॉलेज में पाया टूटी दीवार, जर्जर बेंच, पानी तक नहीं। छात्रों की दुर्दशा देख मांगी सरकार से मदद।

Apr 23, 2026 - 13:50
 0
Chaibasa College Survey: जर्जर दीवारें, टूटे बेंच-डेस्क, युवा नेता ने ग्राउंड सर्वे में खोली कॉलेज की पोल
Chaibasa College Survey: जर्जर दीवारें, टूटे बेंच-डेस्क, युवा नेता ने ग्राउंड सर्वे में खोली कॉलेज की पोल

Chaibasa Shocking Report: पश्चिम सिंहभूम के चाईबासा स्थित ज्ञान चंद्र जैन कॉमर्स कॉलेज की हालत देखकर भारतीय जनता पार्टी के युवा नेता दुवारिका शर्मा हैरान रह गए। 22 अप्रैल को उन्होंने कॉलेज का ग्राउंड सर्वे किया तो सामने आईं ऐसी तस्वीरें जिन्हें देखकर किसी का भी माथा ठनक जाए। लाइब्रेरी की स्थिति से लेकर बाथरूम तक – हर तरफ उपेक्षा ही उपेक्षा थी।

बाथरूम से ग्राउंड तक, हर जगह बदहाली

दुवारिका शर्मा ने बताया कि इस कॉलेज में सिर्फ शैक्षणिक सुविधाएं ही नहीं, बल्कि बुनियादी जरूरतों का भी अभाव है। बाथरूम की स्थिति देखने लायक नहीं थी। ग्राउंड का विकास तो नाममात्र का ही है। पीने के पानी की व्यवस्था इतनी खराब है कि छात्रों को रोजाना प्यासे रहना पड़ता है। सुरक्षा गार्ड और गार्ड रूम की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे छात्रों की सुरक्षा खतरे में है।

टूटी-फूटी दीवारें, कभी भी हो सकता है हादसा

सर्वे के दौरान पाया गया कि कॉलेज भवन की दीवारें टूटी-फूटी हैं। कई जगहों से प्लास्टर झड़ चुका है। ऐसे में कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। क्लासरूम छोटे और असुविधाजनक हैं। बेंच-डेस्क इतने पुराने और जर्जर हैं कि छात्रों को बैठने तक में परेशानी होती है। लाइब्रेरी की हालत भी कमजोर है। बाउंड्री और मुख्य गेट की स्थिति बेहद खराब है।

जानिए क्यों खास है चाईबासा का यह कॉलेज?

ज्ञान चंद्र जैन कॉमर्स कॉलेज पश्चिम सिंहभूम के सबसे पुराने कॉमर्स कॉलेजों में से एक है। चाईबासा शहर का नाम झाड़ियों (बासा) से भरा होने के कारण पड़ा था। यह क्षेत्र कभी आदिवासी बहुल और शांतिप्रिय था। धीरे-धीरे यहाँ शिक्षा के केंद्र विकसित हुए। यह कॉलेज उन्हीं में से एक है। लेकिन आज यही कॉलेज उपेक्षा का शिकार हो रहा है। दूर-दराज के गांवों से छात्र यहाँ पढ़ने आते हैं, लेकिन न तो उनके लिए हॉस्टल है, न ही शिक्षकों के लिए क्वार्टर।

न हॉस्टल, न क्वार्टर – छात्रों और शिक्षकों की मुश्किलें

दुवारिका शर्मा ने कहा कि इस कॉलेज में दूर-दराज के इलाकों से काफी संख्या में छात्र पढ़ने आते हैं। लेकिन उनके लिए हॉस्टल की कोई व्यवस्था नहीं है। उन्हें बाहर रहकर अतिरिक्त किराया और परेशानी झेलनी पड़ती है। वहीं शिक्षकों के लिए भी आवास की कोई सुविधा नहीं है, जिससे उन्हें भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

जमीन है, अब चाहिए आधुनिक कॉलेज

दुवारिका शर्मा ने कहा कि कॉलेज के पास पर्याप्त जमीन उपलब्ध है। ऐसे में यहाँ एक आधुनिक, सुव्यवस्थित और पूर्ण सुविधाओं से युक्त कॉलेज विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जब अन्य कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा सकते हैं, तो शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में निवेश क्यों नहीं किया जा रहा?

आज का छात्र, कल का भारत

दुवारिका शर्मा का स्पष्ट कहना था – "आज का छात्र यदि बेहतर शिक्षा पाएगा, तभी कल का भारत विकसित होगा।" उन्होंने सरकार से इस कॉलेज की दशा सुधारने की तत्काल मांग की है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।

आपकी राय क्या है – क्या सरकार को इस कॉलेज के विकास के लिए तुरंत धनराशि जारी करनी चाहिए? कमेंट में बताएं।
इस खबर को शेयर करें, ताकि इस कॉलेज की बदहाली को हर कोई जाने।
अपडेट के लिए बने रहें।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।