Chaibasa Elephant: खूनी तांडव, चाईबासा में पागल हाथी ने पिता समेत दो मासूमों को पटककर मारा, 6 दिन में 9 मौतें
पश्चिमी सिंहभूम के गोइलकेरा में एक आदमखोर दंतैल हाथी ने पिता और उसके दो मासूम बच्चों को बेरहमी से कुचलकर मार डाला है। अब तक 9 लोगों की जान ले चुके इस 'यमराज' हाथी के तांडव और वन विभाग की लाचारी की पूरी रोंगटे खड़े कर देने वाली रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी इस खौफनाक जमीनी हकीकत से बेखबर रह जाएंगे।
चाईबासा/गोइलकेरा, 6 जनवरी 2026 – झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में एक पागल दंतैल हाथी 'मौत का सौदागर' बन चुका है। सोमवार की रात इस हाथी ने इंसानियत को झकझोर देने वाली वारदात को अंजाम दिया, जहाँ एक बेबस पिता और उसके दो मासूम बच्चों को सूंड से उठाकर पटक-पटक कर मार डाला। गोइलकेरा के सोवा गांव में हुए इस खूनी खेल ने वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। पिछले महज 6 दिनों के भीतर यह हाथी 9 लोगों को मौत की नींद सुला चुका है, जबकि 7 अन्य लोग जिंदगी और मौत के बीच अस्पतालों में जंग लड़ रहे हैं। पूरे कोल्हान क्षेत्र में इस वक्त दहशत का ऐसा मंजर है कि लोग सूरज ढलते ही घरों में दुबक कर अपनी जान की भीख मांग रहे हैं।
सोवा गांव में कत्लेआम: 8 माह की मासूम को भी नहीं बख्शा
सोमवार की रात गोइलकेरा के आराहासा पंचायत का सोवा गांव चीखों से गूँज उठा। दंतैल हाथी ने कुंदरा बाहदा के घर पर अचानक हमला बोल दिया।
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बर्बरता की हद: हाथी ने कुंदरा बाहदा (पिता), उसके 6 वर्षीय बेटे कोदमा और महज 8 माह की नन्ही बच्ची सामू को अपनी चपेट में ले लिया। हाथी ने तीनों को सूंड से लपेटा और जमीन पर तब तक पटका जब तक उनके प्राण नहीं पखेरू उड़ गए।
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एक बच्ची बची: घर की एक और 3 वर्षीय बच्ची जिंगीं बाहदां भी हमले में गंभीर रूप से घायल हुई है। उसे मनोहरपुर CHC से राउरकेला (RGH) रेफर किया गया है, जहाँ उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।
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बाल-बाल बचा परिवार: परिवार के अन्य सदस्यों ने भागकर झाड़ियों में छिपकर अपनी जान बचाई, वरना मौतों का यह आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता था।
वन विभाग की 'पटाखा' पॉलिटिक्स और ग्रामीणों का आक्रोश
हाथी एक के बाद एक गांव उजाड़ रहा है, लेकिन वन विभाग का एक्शन केवल 'अनाउंसमेंट' और 'पटाखों' तक सीमित है।
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नाममात्र की मदद: विभाग ने मंगलवार सुबह घायल बच्ची के इलाज के लिए उसकी माँ को 20,000 रुपये थमाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्या 9 मौतों की कीमत सिर्फ चंद हजार रुपये हैं?
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लापरवाही का आलम: विभाग दिन में माइक लेकर घूमता है और ग्रामीणों को सतर्क रहने कहता है, लेकिन रात में जब हाथी हमला करता है, तो कोई बचाने वाला नहीं होता।
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बंगाल की टीम का इंतजार: वन क्षेत्र पदाधिकारी ने बताया कि पश्चिम बंगाल से एक्सपर्ट्स की एक टीम बुलाई गई है, जो फिलहाल पाटुंग गांव में हाथी को ट्रैक कर रही है। लेकिन सवाल यह है कि जब तक टीम आएगी, तब तक यह दंतैल और कितनी जानें लेगा?
आदमखोर हाथी का 'डेथ ट्रैक': 6 दिनों का हिसाब (Death Toll)
| इलाका / थाना | मौतें (Deaths) | घायल (Injured) |
| टोन्टो / मुफस्सिल | 06 | 05 |
| गोइलकेरा (ताजा घटना) | 03 (पिता + 2 बच्चे) | 01 |
| कुल योग | 09 | 06 |
इतिहास और रंजिश: सारंडा के जंगलों में बढ़ता 'मानव-हाथी' संघर्ष
पश्चिमी सिंहभूम और सारंडा का जंगल ऐतिहासिक रूप से हाथियों का प्राकृतिक गलियारा (Corridor) रहा है। लेकिन पिछले एक दशक में जंगलों के भीतर बढ़ते अवैध खनन और मानवीय दखल ने हाथियों को हिंसक बना दिया है। जानकार बताते हैं कि जब किसी हाथी को उसके झुंड से निकाल दिया जाता है या वह घायल होता है, तो वह 'लोनर' (Loner) बन जाता है और बस्तियों को निशाना बनाता है। 2010 में भी इसी क्षेत्र में एक दंतैल ने 5 लोगों को मार गिराया था, जिसे बाद में 'आदमखोर' घोषित करना पड़ा था। वर्तमान स्थिति उससे भी भयावह है क्योंकि यह हाथी अब शिकार के लिए घरों को तोड़ रहा है।
सड़कों पर आक्रोश: पुलिस और प्रशासन अलर्ट पर
हाथी के बढ़ते हमलों ने गोइलकेरा और मनोहरपुर के आदिवासियों के सब्र का बांध तोड़ दिया है।
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शवों का पोस्टमार्टम: गोइलकेरा पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल भेज दिया है।
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डर का साया: टोन्टो से लेकर गोइलकेरा तक, दर्जनों गांवों में मशालें जलाकर लोग रात काट रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर बंगाल की टीम ने जल्द हाथी को काबू नहीं किया, तो वे वन कार्यालय का घेराव करेंगे।
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विशेष टीम: डीएफओ ने भरोसा दिलाया है कि पाटुंग गांव में हाथी की लोकेशन मिली है और उसे ट्रेंकुलाइज (बेहोश) करने या घने जंगल में खदेड़ने की योजना बनाई जा रही है।
सिस्टम की सुस्ती और मासूमों की बलि
चाईबासा की यह घटना केवल एक वन विभाग की विफलता नहीं, बल्कि उस सिस्टम की हार है जो 9 मौतों के बाद भी 'प्रक्रिया' (Process) का इंतजार कर रहा है। 8 महीने की बच्ची की मौत का जिम्मेदार आखिर कौन है? जब तक बंगाल की टीम 'ट्रैक' करती रहेगी, तब तक कोल्हान के गरीब आदिवासियों के आशियाने इसी तरह उजड़ते रहेंगे।
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