Khunti Theft : खूंटी के प्राचीन शिव मंदिर से गणेश प्रतिमा और शेषनाग चोरी, कारो नदी तट पर तनाव, ग्रामीणों में भारी उबाल
खूंटी के कारो नदी तट पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर से भगवान गणेश की संगमरमर की प्रतिमा और पीतल के शेषनाग चोरी हो गए हैं। होली की रात हुई इस वारदात से जरियागढ़ और तोरपा इलाके में तनाव है। पुलिस की जांच और ग्रामीणों के आक्रोश की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
खूंटी/जरियागढ़, 5 मार्च 2026 – झारखंड के खूंटी जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने भक्तों की आस्था को झकझोर कर रख दिया है। जरियागढ़ थाना क्षेत्र के गोविंदपुर के समीप, पवित्र कारो नदी के तट पर स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर को चोरों ने अपना निशाना बनाया है। बुधवार की रात अंधेरे का फायदा उठाकर उपद्रवियों ने मंदिर से भगवान गणेश की बेशकीमती संगमरमर की प्रतिमा और पीतल से बने शेषनाग की चोरी कर ली। गुरुवार सुबह जैसे ही यह खबर फैली, पूरे इलाके में तनाव व्याप्त हो गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मंदिर परिसर में जुटने लगे।
होली की शाम तक सुरक्षित थी प्रतिमा
ग्रामीणों के अनुसार, बुधवार को होली के पावन अवसर पर मंदिर में देर शाम तक उत्सव का माहौल था।
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नियमित पूजा: शाम लगभग 7:00 बजे तक श्रद्धालु मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना कर रहे थे। उस समय तक भगवान गणेश की प्रतिमा और शेषनाग अपने स्थान पर सुरक्षित थे।
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सुबह का सन्नाटा: गुरुवार तड़के जब भक्त जलाभिषेक के लिए मंदिर पहुँचे, तो गर्भगृह का दृश्य देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। संगमरमर की गणेश प्रतिमा और पीतल का शेषनाग गायब था।
आक्रोशित ग्रामीण और पुलिस की भागदौड़
धार्मिक स्थल से चोरी की इस घटना ने स्थानीय लोगों की भावनाओं को गहरी चोट पहुँचाई है। देखते ही देखते मंदिर परिसर में सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों ने जरियागढ़-तोरपा मुख्य मार्ग पर विरोध जताते हुए दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।
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पुलिस की दस्तक: सूचना मिलते ही जरियागढ़ थाना प्रभारी बीरेंद्र कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। उन्होंने आक्रोशित भीड़ को समझा-बुझाकर शांत कराया।
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कानूनी कार्रवाई: मामले की गंभीरता को देखते हुए तोरपा थाने में अज्ञात चोरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस की एक विशेष टीम आसपास के जंगलों और संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।
कारो नदी तट और मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
खूंटी जिले में कारो नदी का तट केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि यह आदिवासी और स्थानीय संस्कृति का एक बड़ा धार्मिक केंद्र है।
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प्राचीन धरोहर: गोविंदपुर का यह शिव मंदिर दशकों पुराना है। मान्यता है कि यहाँ मांगी गई मन्नतें कभी खाली नहीं जातीं। खूंटी और सिमडेगा सीमा के लोग बड़ी श्रद्धा के साथ यहाँ पहुँचते हैं।
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मूर्ति तस्करी का इतिहास: झारखंड के खूंटी और लोहरदगा जैसे जिलों में पहले भी प्राचीन मंदिरों से अष्टधातु और संगमरमर की मूर्तियाँ चोरी होने के मामले सामने आए हैं। अक्सर इन मूर्तियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंची कीमतों पर बेचा जाता है। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि कहीं इसके पीछे कोई संगठित गिरोह तो नहीं है।
वारदात का संक्षिप्त विवरण: एक नजर में
| विवरण | प्रमुख जानकारी |
| स्थान | प्राचीन शिव मंदिर, कारो नदी तट, गोविंदपुर |
| चोरी हुई वस्तुएं | संगमरमर की गणेश प्रतिमा, पीतल के शेषनाग |
| समय | बुधवार रात (होली की रात) |
| थाना क्षेत्र | जरियागढ़ और तोरपा (खूंटी) |
पुलिस का सर्च ऑपरेशन: 'शरारती तत्वों' पर शक
थाना प्रभारी बीरेंद्र कुमार के अनुसार, प्रारंभिक जांच में ऐसा प्रतीत होता है कि इस घटना के पीछे क्षेत्र के ही कुछ शरारती तत्वों या नशाखोरों का हाथ हो सकता है जो पीतल और कीमती पत्थरों को बेचकर पैसे कमाने की फिराक में रहते हैं।
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निगरानी बढ़ी: पुलिस ने मंदिर के आसपास के इलाकों में गश्त बढ़ा दी है। संदिग्धों की पहचान के लिए मुखबिरों को सक्रिय कर दिया गया है।
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बरामदगी का भरोसा: प्रशासन ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि जल्द ही प्रतिमा को बरामद कर लिया जाएगा और मंदिर की मर्यादा पुनः स्थापित की जाएगी।
आस्था और सुरक्षा की चुनौती
मंदिर से मूर्तियों का चोरी होना समाज के नैतिक पतन की ओर इशारा करता है। खूंटी पुलिस के लिए यह केवल एक चोरी का मामला नहीं, बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने की चुनौती है। ग्रामीणों ने अल्टीमेटम दिया है कि अगर 48 घंटों के भीतर मूर्तियाँ बरामद नहीं हुईं, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।
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