Jamshedpur Workshop : विश्व पर्यावरण दिवस पर छात्राओं ने बनाए अनोखे 'सीड बॉल', इस मॉनसून बंजर जमीन पर बिखरेगा हरा सोना!
जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय की छात्राओं के लिए आयोजित दो महीने के विशेष इंटर्नशिप कार्यक्रम और पर्यावरण दिवस के मौके पर तैयार किए गए सीक्रेट सीड बॉल प्रोजेक्ट की पूरी लाइव रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर, 3 जून 2026 – लौह नगरी जमशेदपुर में उच्च शिक्षा को किताबी ढर्रे से बाहर निकालकर पर्यावरण और ग्राउंड रिसर्च से जोड़ने की एक बेहद अनूठी मुहिम शुरू हुई है। विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) को ध्यान में रखते हुए नेचर (Nature) संस्था और बागबेड़ा स्थित अनुग्रह नारायण सिंह शिक्षण एवं सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय (Jamshedpur Women's University) की छात्राओं के लिए दो महीने का विशेष इंटर्नशिप प्रोग्राम लॉन्च किया गया है। इस उद्घाटन समारोह की सबसे बड़ी खासियत रही छात्राओं के लिए आयोजित 'सीड बॉल' (बीज गेंद) निर्माण कार्यशाला। इसमें इतिहास और भूगोल विषय की छात्राओं ने जैविक खाद और मिट्टी की मदद से हजारों सीड बॉल्स तैयार किए, जिन्हें आने वाली मानसूनी बारिश में खाली और बंजर जमीनों पर हरियाली फैलाने के लिए फेंका जाएगा।
रिसर्च की इनसाइड स्टोरी: सिंहभूम के इतिहास की खोज और संयुक्त राष्ट्र के SDGs लक्ष्यों पर सर्वे
अनुग्रह नारायण सिंह संस्थान के प्रांगण में प्रोफेसर के कमलेंदु, डॉ. विनीता परमार और जिला पार्षद डॉ. कविता परमार द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर इस शानदार अभियान का आगाज़ किया गया। इस दो महीने के कड़े जमीनी प्रशिक्षण का पूरा खाका बेहद दिलचस्प है:
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चार ग्रुपों में खोजेंगी सिंहभूम का अतीत: इतिहास विभाग की छात्राओं को चार अलग-अलग सीक्रेट टीमों में बांटा गया है। ये छात्राएं कोल्हान और सिंहभूम के स्वतंत्रता आंदोलन, जनजातीय इतिहास, स्थानीय लोक संस्कृति और पुराने पुरातात्विक स्थलों का दौरा कर मौखिक इतिहास (Oral History) का दस्तावेजीकरण करेंगी।
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सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर भूगोल की नजर: भूगोल की छात्राओं के सारे प्रोजेक्ट सीधे संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) पर आधारित हैं। बेटियां गांवों में जाकर जल प्रबंधन, ठोस कचरा प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन के स्थानीय प्रभाव और महिला नेतृत्व जैसे गंभीर विषयों पर लाइव डेटा जुटाएंगी।
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सवालों से निकलेगा ज्ञान का सच: उद्घाटन सत्र में डॉ. विनीता परमार ने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि किसी भी बड़े बदलाव की शुरुआत केवल सही सवालों और जिज्ञासा से होती है। जब दिमाग में प्रश्न उठेंगे, तभी समाज के लिए कोई सार्थक शोध (Research) बाहर आएगा।
व्यक्तित्व विकास और पर्यावरण संरक्षण का सबसे बड़ा मंच
प्रोफेसर के कमलेंदु और नेचर संस्था के प्रतिनिधियों ने सभी शोधार्थी छात्राओं को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि फील्डवर्क के दौरान उन्हें ज्यादा से ज्यादा प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीण समुदायों से सीधे संवाद स्थापित करना चाहिए, ताकि वे समाज की असली नब्ज को पकड़ सकें।
2026 के इस डिजिटल युग में, जहाँ पर्यावरण असंतुलन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम का चक्र पूरी तरह बिगड़ चुका है, वहाँ युवाओं द्वारा हाथ में मिट्टी लेकर इस तरह जमीनी स्तर पर सीड बॉल बनाना बेहद सराहनीय है। यह दो महीने का प्रोग्राम न केवल इन बेटियों के व्यक्तिगत और शोधात्मक नजरिए को पूरी तरह बदल देगा, बल्कि कोल्हान अंचल में जैव विविधता और हरित आवरण (Green Cover) को बढ़ाने की दिशा में एक मिल का पत्थर साबित होगा।
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