Giridih Bloodshed : आधी रात को सो रहे दंपती पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला, पति की मौत, पत्नी गंभीर!
गिरिडीह के मधुबन दलान चलकरी में आधी रात को मजदूर पतिया हांसदा की नृशंस हत्या और उनकी पत्नी परनी मरांडी पर हुए कातिलाना हमले की पूरी लाइव ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ देखें।
गिरिडीह/मधुबन, 3 जून 2026 – झारखंड के गिरिडीह जिले के पारसनाथ की तराई में बसे मधुबन थाना क्षेत्र से इस वक्त की एक बेहद ही खौफनाक और दिल दहला देने वाली वारदात सामने आ रही है। यहाँ के दलान चलकरी गांव में मंगलवार देर रात अज्ञात अपराधियों ने एक सीधे-साधे आदिवासी दंपती पर जानलेवा हमला (Deadly Attack On Couple) कर दिया। इस खूनी तांडव में 45 वर्षीय गृहस्वामी पतिया हांसदा की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई, जबकि उनकी 35 वर्षीय पत्नी परनी मरांडी गंभीर रूप से घायल हो गईं। घायल महिला को बेहतर इलाज के लिए धनबाद के एक बड़े अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए डुमरी एसडीपीओ (SDPO) आबिद खान और मधुबन थाना पुलिस भारी बल के साथ मौके पर कैंप कर रही है।
वारदात की लाइव इनसाइड स्टोरी: रात 12:30 बजे गूंजी चीख-पुकार, लहूलुहान मिले पति-पत्नी
मधुबन थाना पुलिस और दलान चलकरी गांव के स्थानीय चश्मदीदों से मिली लाइव ऑन-फील्ड जानकारी के मुताबिक, यह खूनी खेल बेहद शातिराना तरीके से खेला गया:
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सन्नाटे में हुआ हमला: मृतक पतिया हांसदा रोज की तरह मजदूरी कर घर लौटा था और रात में अपने परिवार के साथ सो रहा था। मंगलवार देर रात करीब 12:30 बजे अचानक कुछ अज्ञात हमलावर हथियारों के साथ उसके घर में घुस गए।
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बच्चों की चीख से खुला राज: अपराधियों ने सोते समय ही दंपती पर ताबड़तोड़ वार शुरू कर दिए। कमरे में खून की नदियां बह गईं और पास सो रहे मासूम बच्चे डर के मारे जोर-जोर से रोने और चिल्लाने लगे।
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गांव में हड़कंप: आधी रात को बच्चों की रोने की आवाज सुनकर जब आस-पास के ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर दौड़े, तो हमलावर अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो चुके थे। अंदर पतिया और उसकी पत्नी लहूलुहान पड़े थे।
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वैज्ञानिक अनुसंधान शुरू: एसडीपीओ आबिद खान ने बताया कि फॉरेंसिक और वैज्ञानिक तरीके से सुराग ढूंढने के लिए मुखबिरों का जाल बिछा दिया गया है। घटनास्थल से कई अहम सबूत जब्त किए गए हैं।
धनबाद में जिंदगी की जंग लड़ रही पत्नी, जल्द खुलासे का दावा
मधुबन थाना पुलिस ने शव का पंचनामा तैयार कर उसे पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल गिरिडीह भेज दिया है। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि आखिर एक गरीब मजदूर की इस तरह बेरहमी से जान लेने के पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है। अस्पताल में भर्ती परनी मरांडी के होश में आने का इंतजार किया जा रहा है, क्योंकि उनका बयान ही इस खूनी मिस्ट्री का पर्दाफाश कर सकता है।
2026 के इस दौर में, जब डिजिटल सर्विलांस के जरिए अपराधियों को दबोचा जा रहा है, तब गिरिडीह की सुदूर बस्तियों में इस तरह की दुस्साहसिक वारदातें ग्रामीण सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती हैं। इस खूनी ढर्रे को स्थायी रूप से रोकने के लिए पुलिस को मधुबन के अंदरूनी ग्रामीण रूटों पर 'नाइट पेट्रोलिंग' (Night Patrol) को अनिवार्य करना होगा। जब तक सुदूर टोला अंचलों में सुरक्षा ग्रिड मजबूत नहीं होगा, तब तक अपराधी रात के अंधेरे में इसी तरह बेकसूरों का खून बहाते रहेंगे।
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