Ramgarh Blast: रामगढ़ के झारखंड इस्पात प्लांट में फटा फर्नेस, आग का गोला बने 9 मजदूर, 90% तक झुलसे शरीर, रांची के अस्पताल में जिंदगी की जंग
रामगढ़ के हेसला स्थित झारखंड इस्पात प्लांट में सोमवार तड़के हुए फर्नेस ब्लास्ट में 9 मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए हैं। 90 फीसदी तक जले शरीरों, प्लांट में मची भगदड़ और प्रबंधन की लापरवाही की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
रामगढ़/झारखंड, 6 अप्रैल 2026 – औद्योगिक नगरी रामगढ़ के हेसला में सोमवार का सूरज एक खौफनाक मंजर लेकर आया। यहाँ स्थित झारखंड इस्पात प्लांट प्राइवेट लिमिटेड में तड़के एक भीषण हादसा हो गया, जिसने पूरे जिले को हिलाकर रख दिया है। प्लांट के भीतर अचानक फर्नेस फटने से हुए जोरदार धमाके ने काम कर रहे 9 मजदूरों को अपनी चपेट में ले लिया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि पल भर में ही मजदूरों के शरीर झुलस गए। धमाके की आवाज इतनी जोरदार थी कि आसपास के गांवों में भी लोग दहशत में आ गए। फिलहाल प्लांट को सील कर दिया गया है और घायल मजदूर रांची के अस्पताल में मौत और जिंदगी के बीच झूल रहे हैं।
तड़के 4 बजे का धमाका: जब आग का दरिया बन गया प्लांट
सोमवार की सुबह जब ज्यादातर लोग गहरी नींद में थे, झारखंड इस्पात प्लांट के भीतर फर्नेस नंबर 2 में पिघलता हुआ लोहा खौल रहा था।
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भीषण विस्फोट: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक एक कान फाड़ देने वाला धमाका हुआ। फर्नेस का ढांचा फट गया और उसके भीतर भरा गर्म लावा और गैस बाहर निकल आए।
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भगदड़ का माहौल: धमाके के बाद पूरे परिसर में धुएं और आग का गुबार छा गया। ड्यूटी पर तैनात अन्य मजदूर अपनी जान बचाने के लिए गेट की तरफ भागे, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
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दहशत का साया: हेसला और आसपास की बस्तियों के लोग धमाके की आवाज सुनकर घरों से बाहर निकल आए। उन्हें लगा कि कोई बड़ा बम फटा है, लेकिन धुआं देखकर प्लांट में हादसे का पता चला।
90% तक झुलसे मजदूर: रांची रेफर किए गए 9 'जांबाज'
हादसे का शिकार हुए मजदूरों की हालत देखकर डॉक्टरों की रूह भी कांप गई। पिघले हुए लोहे और गैस ने उन्हें बुरी तरह जला दिया था।
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प्राथमिक उपचार: सभी घायलों को तुरंत रांची रोड स्थित द हॉप अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि 7 मजदूरों की हालत बेहद नाजुक है क्योंकि वे 80 से 90 प्रतिशत तक झुलस चुके हैं।
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देवकमल अस्पताल रेफर: बेहतर इलाज और बर्न यूनिट की सुविधा के लिए सभी 9 मजदूरों को रांची के देवकमल अस्पताल रेफर कर दिया गया है।
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घायलों की सूची: घायलों में अखिला राय, बृजलाल बेदिया, राजबालन यादव, महेश महतो, अशोक बेदिया, राजू झा (पंडित जी), छोटू साव, सुरेश बेदिया और इशया शामिल हैं। इनमें से कई मजदूर लंबे समय से इस प्लांट में काम कर रहे थे।
बार-बार होने वाले 'फर्नेस ब्लास्ट' का सच
रामगढ़ जिला झारखंड के प्रमुख लौह और इस्पात उत्पादन केंद्रों में से एक है, लेकिन यहाँ सुरक्षा मानकों की अनदेखी का इतिहास भी पुराना है।
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पुराना इंफ्रास्ट्रक्चर: हेसला और आसपास के इलाकों में स्थित कई मिनी स्टील प्लांट पुराने फर्नेस का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनमें क्षमता से अधिक लोड डालने पर फटने का खतरा रहता है।
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लापरवाही का आरोप: स्थानीय लोगों और मजदूर संगठनों ने प्लांट प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि फर्नेस की समय पर मेंटेनेंस नहीं की गई और मजदूरों को जरूरी सेफ्टी गियर (Fireproof Suits) उपलब्ध नहीं कराए गए थे।
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प्रशासनिक जांच: पुलिस और जिला प्रशासन की टीम ने प्लांट पहुँचकर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में तकनीकी खराबी की बात सामने आ रही है, लेकिन लापरवाही के एंगल को भी नकारा नहीं जा रहा है।
प्लांट सील: गुस्से में ग्रामीण और प्रबंधन का 'मौन'
हादसे के बाद झारखंड इस्पात प्लांट के प्रबंधन ने मुख्य गेट पर ताला लटका दिया है और किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।
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आक्रोशित भीड़: प्लांट के बाहर स्थानीय लोगों और परिजनों का जमावड़ा लगा है। लोगों की मांग है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और झुलसे हुए मजदूरों के इलाज का पूरा खर्च प्रबंधन उठाए।
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सुरक्षा ऑडिट की मांग: रामगढ़ के अन्य औद्योगिक संगठनों ने भी इस घटना पर दुख जताया है और मांग की है कि जिले के सभी स्टील प्लांट्स का तत्काल 'सेफ्टी ऑडिट' कराया जाए ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।
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पुलिसिया कार्रवाई: रामगढ़ पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। पोस्टमार्टम जैसी स्थितियों से बचने के लिए फिलहाल घायलों के बयान लेने की कोशिश की जा रही है जो बोलने की स्थिति में हैं।
रामगढ़ के झारखंड इस्पात प्लांट में हुआ यह हादसा केवल एक तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि उन 9 परिवारों के लिए एक बड़ा वज्रपात है जिनके कमाऊ सदस्य आज अस्पताल के बिस्तर पर बेसुध पड़े हैं। 90 फीसदी जलने के बाद बचने की उम्मीदें कम होती हैं, लेकिन पूरा जिला उनके लिए दुआएं कर रहा है। प्रशासन को चाहिए कि वह केवल प्लांट सील करने तक सीमित न रहे, बल्कि उन कारणों की जड़ तक जाए जिनसे मासूम मजदूरों की जान जोखिम में डाली गई। फिलहाल, हेसला इलाके में तनाव व्याप्त है और भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है।
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