Jharkhand Weather : कांपता झारखंड, गुमला बना 'छोटा कश्मीर', पारे में भारी गिरावट, अगले 4 दिनों तक प्रलयकारी ठंड
झारखंड में पछुआ हवाओं ने तबाही मचा दी है और गुमला में पारा 2.2 डिग्री तक गिर गया है। मौसम विभाग द्वारा जारी 'येलो अलर्ट' और अगले 4 दिनों तक जमने वाली इस भीषण शीतलहर की पूरी रोंगटे खड़े कर देने वाली रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी इस बर्फीली आफत के लिए खुद को तैयार नहीं कर पाएंगे।
रांची, 7 जनवरी 2026 – झारखंड इस समय कुदरत के एक ऐसे 'फ्रीजिंग' टॉर्चर से गुजर रहा है, जिसने शिमला और शिमला जैसे हिल स्टेशनों को भी पीछे छोड़ दिया है। बर्फीली पछुआ हवाओं ने पूरे राज्य को एक विशाल 'कोल्ड चेंबर' में तब्दील कर दिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पूरे झारखंड के लिए 'येलो अलर्ट' जारी कर दिया है। हालत यह है कि सूरज की तपिश भी बेअसर साबित हो रही है और गुमला जैसे जिलों में पारा उस स्तर पर पहुँच गया है जो आमतौर पर हिमालय की ऊंची चोटियों पर देखा जाता है।
गुमला बना 'झारखंड का सियाचिन': 2.2 डिग्री पर जम गई जिंदगी
मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों ने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है। पिछले 24 घंटों में झारखंड के जिलों की स्थिति किसी डरावने सपने जैसी रही है।
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गुमला का रिकॉर्ड: गुमला जिला इस समय राज्य का सबसे ठंडा इलाका बन गया है, जहाँ न्यूनतम तापमान 2.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। यह इस सीजन का सबसे कम तापमान है।
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खूंटी और लोहरदगा: इन दोनों जिलों में पारा 3.7 डिग्री तक लुढ़क गया है, जिससे रातों में ओस की बूंदें जमने जैसी स्थिति बन रही है।
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पलामू की ठंड: डाल्टनगंज में न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री दर्ज किया गया है, जो सामान्य से काफी नीचे है।
सड़कों पर 'कर्फ्यू' जैसे हालात: जनजीवन पूरी तरह ठप
सरायकेला-खरसावां, पाकुड़ और लातेहार जैसे जिलों में तापमान 6 डिग्री के आसपास मंडरा रहा है। ठंड का असर केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि जमीन पर भी दिख रहा है।
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शाम का सन्नाटा: शाम के 5 बजते ही बाजारों और सड़कों पर सन्नाटा पसर जा रहा है। लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं।
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दोपहर में भी राहत नहीं: मौसम वैज्ञानिक डॉ. अभिषेक आनंद के अनुसार, ठंडी हवाएं इतनी तेज हैं कि दोपहर की धूप में बैठने पर भी शरीर का तापमान तेजी से गिर रहा है।
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बाजारों पर मार: ठंड के कारण व्यापारिक गतिविधियों पर भी बुरा असर पड़ा है। लोग केवल बेहद जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं।
झारखंड शीतलहर: जिलों का तापमान रिपोर्ट (Cold Wave Tracker)
| जिला | न्यूनतम तापमान (°C) | स्थिति (Status) |
| गुमला | 2.2°C | भीषण शीतलहर (Severe) |
| खूंटी/लोहरदगा | 3.7°C | जमने वाली ठंड |
| डाल्टनगंज | 4.6°C | अत्यधिक ठंडा |
| रांची/सरायकेला | 6.1°C | येलो अलर्ट |
इतिहास और भूगोल: क्यों कांप रहा है झारखंड?
झारखंड के इस बर्फीले मिजाज के पीछे एक गहरा भौगोलिक और ऐतिहासिक कारण है। छोटानागपुर का पठार होने के कारण यहाँ की ऊंचाई समुद्र तल से काफी अधिक है। 1960 और 70 के दशक के पुराने रिकॉर्ड बताते हैं कि तब झारखंड में 'ग्राउंड फ्रॉस्ट' (जमीन पर पाला जमना) एक सामान्य बात थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ग्लोबल वार्मिंग के कारण यह ठंड कम हुई थी। 2026 की यह शीतलहर एक बार फिर उस पुराने इतिहास की याद दिला रही है। पछुआ हवाएं, जो अफगानिस्तान और उत्तर भारत के पहाड़ों से होकर आती हैं, बिना किसी रुकावट के झारखंड के खुले मैदानों में प्रवेश कर रही हैं, जिससे 'चिल फैक्टर' बढ़ गया है।
अगले 4 दिन भारी: प्रशासन ने जारी की एडवायजरी
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, अभी राहत की कोई उम्मीद नहीं है। अगले 3 से 4 दिनों तक कनकनी और बढ़ने के आसार हैं।
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सेहत पर खतरा: स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि बुजुर्गों और बच्चों को 'हाइपोथर्मिया' और सांस की बीमारियों से बचाने के लिए उन्हें गर्म कमरों में ही रखें।
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दोपहर की धूप का झांसा: वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि दोपहर की धूप में ज्यादा देर न बैठें, क्योंकि चलने वाली ठंडी हवाएं 'साइलेंट किलर' की तरह काम कर रही हैं।
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अलाव की व्यवस्था: नगर निगमों को विभिन्न चौराहों पर अलाव की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
कुदरत की बेरुखी
झारखंड के लिए यह जनवरी किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। गुमला से लेकर पाकुड़ तक, पूरा राज्य ठंड की चादर में लिपटा हुआ है। जब तक पछुआ हवाओं की गति कम नहीं होती, तब तक झारखंडवासियों को इस 'बर्फीले लॉकडाउन' का सामना करना ही होगा।
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