Palamu Ultimatum: 15 लाख के इनामी माओवादी कमांडर को पुलिस की अंतिम चेतावनी, सरेंडर नहीं किया तो होगा बड़ा अभियान

पलामू, चतरा और औरंगाबाद में सक्रिय माओवादी कमांडर नितेश यादव और संजय गोदराम को पुलिस की अंतिम चेतावनी, सरेंडर नहीं किया तो बड़ा अभियान। जानिए पूरा मामला।

Apr 20, 2026 - 18:26
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Palamu Ultimatum: 15 लाख के इनामी माओवादी कमांडर को पुलिस की अंतिम चेतावनी, सरेंडर नहीं किया तो होगा बड़ा अभियान
Palamu Ultimatum: 15 लाख के इनामी माओवादी कमांडर को पुलिस की अंतिम चेतावनी, सरेंडर नहीं किया तो होगा बड़ा अभियान

पलामू: झारखंड के पलामू, चतरा और बिहार के औरंगाबाद सहित सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय माओवादी कमांडर नितेश यादव और संजय गोदराम के खिलाफ पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। पुलिस ने दोनों को सरेंडर करने की अंतिम चेतावनी दी है। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि यदि उन्होंने आत्मसमर्पण नहीं किया, तो उनके खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। नितेश यादव पर झारखंड सरकार ने 15 लाख और बिहार सरकार ने 3 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है, जबकि संजय गोदराम पर 10 लाख रुपये का इनाम है।

कौन हैं नितेश यादव?

नितेश यादव दोनों राज्यों की पुलिस के लिए मोस्ट वांटेड माओवादी है। वह एनआईए के एक मामले में भी फरार चल रहा है। माओवादियों के मध्य जोन का सबसे बड़ा कमांडर माना जाने वाला नितेश मूल रूप से बिहार के गया जिले का रहने वाला है। इस जोन में पलामू, चतरा और बिहार के गया व औरंगाबाद इलाके शामिल हैं। उसके दस्ते में संजय गोदराम और ठेगन मियां जैसे सक्रिय सदस्य शामिल हैं।

70 से अधिक नक्सली हमलों में शामिल

नितेश यादव और संजय गोदराम पर 70 से अधिक नक्सली हमलों में शामिल होने का आरोप है। कई घटनाओं में सुरक्षा बलों के दो दर्जन से ज्यादा जवान शहीद हुए हैं। वर्ष 2016 में पलामू के काला पहाड़ इलाके में हुए लैंड माइंस विस्फोट में सात जवानों की शहादत और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में कोबरा के 10 जवानों की मौत की घटनाओं में भी इनकी संलिप्तता सामने आ रही है।

2025 में हुई थी मुठभेड़

27 मई 2025 को पलामू के हुसैनाबाद इलाके में पुलिस और नितेश यादव के दस्ते के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस मुठभेड़ में एरिया कमांडर तुलसी भुइयां मारा गया था, जबकि नितेश यादव और संजय गोदराम मौके से फरार हो गए थे। उस दौरान नितेश के घायल होने की भी बात सामने आई थी, लेकिन वह बच निकला।

मध्य जोन का सबसे बड़ा कमांडर

माओवादियों के मध्य जोन में नितेश यादव आज सबसे बड़ा कमांडर माना जाता है। बताया जाता है कि कभी इस क्षेत्र से करोड़ों रुपये की लेवी वसूलने वाले माओवादी की स्थिति वर्तमान में काफी कमजोर हो चुकी है। बावजूद इसके नितेश यादव के नेतृत्व में एक दस्ता सक्रिय बचा हुआ है। यही वजह है कि पुलिस उसके खिलाफ सख्ती बरत रही है।

पुलिस ने दी अंतिम चेतावनी

पलामू के डीआईजी किशोर कौशल ने स्पष्ट कर दिया है कि माओवादियों से लगातार सरेंडर की अपील की जा रही है। यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि वे आत्मसमर्पण नहीं करते हैं तो पुलिस कार्रवाई तेज करेगी। यह चेतावनी नितेश यादव और संजय गोदराम के लिए आखिरी मौका मानी जा रही है।

क्या होगा अगर नहीं किया सरेंडर?

पुलिस ने साफ कर दिया है कि अगर इन दोनों माओवादियों ने आत्मसमर्पण नहीं किया, तो उनके खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। सुरक्षा बलों को अलर्ट कर दिया गया है। पुलिस का कहना है कि इन्हें जिंदा या मुर्दा पकड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।

सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय बचा एकमात्र दस्ता

सीमावर्ती क्षेत्रों में फिलहाल यही एक प्रमुख माओवादी दस्ता बचा हुआ माना जा रहा है। यह दस्ता पलामू के अलावा बिहार के गया और औरंगाबाद जिलों में सक्रिय है। पुलिस का लक्ष्य इस दस्ते का पूरी तरह से सफाया करना है।

पलामू, चतरा और औरंगाबाद में सक्रिय 15 लाख के इनामी माओवादी कमांडर नितेश यादव को पुलिस ने सरेंडर करने की अंतिम चेतावनी दी है। क्या यह माओवादियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की शुरुआत है? यह खबर पढ़कर सावधान हो जाइए और इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि लोग जागरूक हों।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।