Jamshedpur Satsang: संत बाबा परमजीत सिंह जी के प्रवचन से गूंजा एग्रिको ट्रांसपोर्ट मैदान! हजारों की भीड़ ने ग्रहण किया लंगर
जमशेदपुर के एग्रिको ट्रांसपोर्ट मैदान में राधा स्वामी सत्संग (तरण तारन) के संत बाबा परमजीत सिंह जी महाराज का प्रवचन हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। जानें, बाबा जी ने क्या संदेश दिया और क्यों भजन-सुमिरण को बताया जीवन का सबसे बड़ा सहारा।

झारखंड के जमशेदपुर में रविवार को आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कुछ ऐसा हुआ कि पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। एग्रिको ट्रांसपोर्ट मैदान में राधा स्वामी सत्संग (तरण तारन) पंजाब के संत बाबा परमजीत सिंह जी महाराज के प्रवचनों को सुनने के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। इस भव्य आयोजन में लगभग 20,000 श्रद्धालुओं ने भाग लिया और संगत में लंगर प्रसाद ग्रहण किया।
संत तुलसी साहिब की वाणी से जीवन का संदेश
संत बाबा परमजीत सिंह जी महाराज ने संत तुलसी साहिब जी महाराज की वाणी "दिल का हुजरा साफ कर जाना के आने के लिए" की व्याख्या की और श्रद्धालुओं को प्रेम, भक्ति और सिमरन का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि मनुष्य जीवन में आने वाले दुख हमारे पूर्व जन्मों के कर्मों का परिणाम हैं और भजन-सुमिरण ही इन कष्टों से उबरने का सबसे प्रभावी साधन है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब तक इंसान के मन में काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसी बुराइयाँ हैं, तब तक वह परमात्मा से मिलने के योग्य नहीं बन सकता। इन विकारों से मुक्त होने के लिए गुरु द्वारा दी गई दीक्षा के अनुसार भजन और सुमिरण करना ही एकमात्र उपाय है।
सत्संग में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, पेड़ों की छांव में बैठकर सुने प्रवचन
इस सत्संग में इतनी भीड़ उमड़ी कि पंडाल के बाहर भी श्रद्धालु पेड़ों की छांव में बैठकर बाबा जी महाराज के वचनों को सुनते रहे। भजन-सिमरन की मधुर ध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। संगत में आए श्रद्धालुओं के लिए विशाल लंगर की भी व्यवस्था की गई, जिसमें 20 हजार से अधिक लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
राजनीतिक हस्तियों ने भी लिया हिस्सा
इस सत्संग में केवल आम श्रद्धालु ही नहीं, बल्कि राजनीतिक जगत की कई नामचीन हस्तियां भी शामिल हुईं। इनमें झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, कांग्रेस के प्रदेश महासचिव विजय खां, आजसू पार्टी के वरिष्ठ नेता चंद्रगुप्त सिंह, टेल्को कंपनी के यूनियन अध्यक्ष गुरमीत सिंह तोते, महामंत्री आर.के. सिंह और राकेश्वर पांडेय जैसी हस्तियाँ प्रमुख रहीं। सभी ने बाबा जी महाराज के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
संत परंपरा और सत्संग का महत्व
राधा स्वामी सत्संग (तरण तारन) की परंपरा 19वीं शताब्दी से चली आ रही है। इसकी शुरुआत संत शिव दयाल सिंह जी महाराज ने की थी, जो कि प्रेम, भक्ति और सत्संग के माध्यम से लोगों को आत्मिक शांति प्रदान करने का संदेश देते थे। उनकी शिक्षाओं को आगे बढ़ाते हुए, संत बाबा परमजीत सिंह जी महाराज आज के समय में लोगों को भजन-सिमरन की ओर प्रेरित कर रहे हैं।
आयोजन की भव्यता और सेवा भाव
इस भव्य आयोजन की सफलता का श्रेय झारखंड प्रदेश कमिटी के संयोजक विक्रम शर्मा और जमशेदपुर सेंटर के गुलशन आनंद, पंकज कुमार, अशोक सिंह, कविता शर्मा, अनिल सिंह समेत अन्य सेवादारों को जाता है, जिन्होंने इसे सफल बनाने के लिए दिन-रात मेहनत की।
भजन-सुमिरण से कैसे मिलती है आत्मिक शांति?
बाबा जी महाराज ने कहा कि अगर इंसान नियमित रूप से सच्चे मन से भजन और सिमरन करता है, तो उसका मन शांत होता है और जीवन में आने वाली कठिनाइयाँ स्वतः ही हल होने लगती हैं। सच्ची भक्ति से आत्मा शुद्ध होती है और परमात्मा से मिलने का मार्ग खुलता है।
श्रद्धालुओं की श्रद्धा और अनुशासन
सत्संग में शामिल हुए हजारों श्रद्धालुओं ने पूर्ण अनुशासन और शांति के साथ प्रवचन सुने। यह आयोजन धार्मिक ही नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश भी था कि कैसे आध्यात्मिकता अपनाकर जीवन में शांति, संतोष और सकारात्मक ऊर्जा लाई जा सकती है।
एग्रिको ट्रांसपोर्ट मैदान में आयोजित यह सत्संग न केवल धार्मिक प्रवचन का मंच था, बल्कि आत्मिक शांति और भक्ति की शक्ति को महसूस करने का भी एक अद्भुत अवसर था। बाबा परमजीत सिंह जी महाराज के प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को यह सिखाया कि भजन-सुमिरण ही हर दुख का हल है और मनुष्य को सच्चे आनंद की ओर ले जाता है।
अगर आप भी आध्यात्मिकता की राह पर चलना चाहते हैं, तो भजन-सुमिरण का अभ्यास करें और जीवन में शांति व संतोष प्राप्त करें!
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