Potka Crash: जवान जख्मी, खरसावां शहीद दिवस की ड्यूटी से लौट रहे ट्रेनियों को ट्रक ने रौंदा, पोटका में मचा कोहराम
खरसावां शहीद दिवस की ड्यूटी कर लौट रहे सीटीसी मुसाबनी के बुनियादी प्रशिक्षु जवानों की गाड़ी को पोटका में एक तेज रफ्तार ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी है। जवानों के घायल होने और सीटीसी प्रबंधन की भारी लापरवाही के इस चौंकाने वाले खुलासे की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी पुलिस महकमे के इस कड़वे सच से बेखबर रह जाएंगे।
जमशेदपुर/पोटका, 3 जनवरी 2026 – झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में खरसावां शहीद दिवस के संवेदनशील अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था संभाल कर लौट रहे जवानों के साथ एक दर्दनाक हादसा हो गया। शुक्रवार की देर रात पोटका थाना क्षेत्र के रोलीडीह गांव के पास जवानों से भरी गाड़ी को एक अनियंत्रित और तेज रफ्तार ट्रक ने पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। इस टक्कर की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जवानों की गाड़ी के परखच्चे उड़ गए और उसके आगे चल रही एक कार भी इसकी चपेट में आ गई। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि जवानों के गुस्से और व्यवस्था की पोल खोलने वाली घटना बनकर उभरी है।
रोलीडीह में आधी रात का मंजर: ट्रक का कहर और मची चीख-पुकार
हादसा उस वक्त हुआ जब जवानों की टुकड़ी अपनी ड्यूटी पूरी कर सीटीसी मुसाबनी वापस लौट रही थी।
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पीछे से मारी टक्कर: रोलीडीह गांव के समीप पीछे से आ रहे एक भारी ट्रक ने जवानों के वाहन में सीधी टक्कर मारी।
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चेन रिएक्शन: टक्कर इतनी तेज थी कि जवानों की गाड़ी अनियंत्रित होकर अपने आगे चल रही एक कार से जा भिड़ी।
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घायलों की स्थिति: इस तिहरे हादसे में गाड़ी में सवार कई बुनियादी प्रशिक्षु जवान और कार में बैठे लोग घायल हो गए। स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और घायलों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया। गनीमत यह रही कि सभी को हल्की चोटें आई हैं और कोई जानलेवा नुकसान नहीं हुआ।
जवानों का फूटा गुस्सा: सीटीसी प्रबंधन पर गंभीर आरोप
अस्पताल में प्राथमिक उपचार के दौरान घायल जवानों ने जो खुलासा किया, उसने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। जवानों ने इस हादसे के लिए सीधे तौर पर सीटीसी प्रबंधन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है।
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वाहन का अभाव: जवानों का आरोप है कि उन्हें सुबह से ही खरसावां शहीद दिवस की ड्यूटी पर तैनात किया गया था, लेकिन पूरे दिन उन्हें कोई उचित सरकारी वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया।
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थकान और मजबूरी: दिन भर की थकाऊ ड्यूटी के बाद देर रात जिस तरह से उन्हें वापस भेजा जा रहा था, उसमें सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी की गई।
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प्रबंधन की चुप्पी: जवानों ने सवाल उठाया है कि क्या प्रशिक्षु जवानों की सुरक्षा महकमे की प्राथमिकता में नहीं है?
पोटका सड़क दुर्घटना: मुख्य विवरण (Action Snapshot)
| विवरण | जानकारी |
| घटना स्थल | रोलीडीह गांव, पोटका थाना क्षेत्र |
| पीड़ित | सीटीसी मुसाबनी के बुनियादी प्रशिक्षु (Trainees) |
| टक्कर मारने वाला वाहन | तेज रफ्तार ट्रक (फरार) |
| ड्यूटी का संदर्भ | खरसावां शहीद दिवस (1 जनवरी/ड्यूटी वापसी) |
| वर्तमान स्थिति | घायल जवान खतरे से बाहर, जांच जारी |
इतिहास और महत्व: खरसावां शहीद दिवस की वो संवेदनशील ड्यूटी
खरसावां शहीद दिवस का झारखंड के इतिहास में एक गहरा और भावनात्मक स्थान है। 1 जनवरी 1948 को हुए खरसावां गोलीकांड की याद में हर साल यहाँ हजारों की भीड़ जुटती है, जिसमें मुख्यमंत्री से लेकर कई दिग्गज नेता शामिल होते हैं। इस दिन सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए सबसे कठिन चुनौतियों में से एक होता है। ऐतिहासिक रूप से, इस ड्यूटी के लिए राज्य के विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों (जैसे मुसाबनी) से प्रशिक्षु जवानों को बुलाया जाता है। लेकिन विडंबना देखिए, जो जवान शहीद दिवस पर दूसरों की सुरक्षा का जिम्मा संभालते हैं, वे खुद लचर परिवहन व्यवस्था और सड़क हादसों का शिकार हो रहे हैं। पोटका का यह इलाका (हाता-मुसाबनी मार्ग) भारी ट्रकों की आवाजाही के लिए जाना जाता है, जहाँ रात के समय गश्त की कमी अक्सर हादसों को दावत देती है।
पोटका पुलिस का एक्शन और जांच
घटना की सूचना मिलते ही पोटका थाना पुलिस मौके पर पहुँची और दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को सड़क से हटवाया।
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ट्रक की तलाश: पुलिस सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के आधार पर टक्कर मारने वाले ट्रक की पहचान करने में जुटी है।
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लापरवाही की जांच: वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने जवानों द्वारा लगाए गए आरोपों पर संज्ञान लिया है। सीटीसी मुसाबनी से रिपोर्ट मांगी गई है कि जवानों के परिवहन के लिए क्या इंतजाम किए गए थे।
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स्थानीय सहयोग: रोलीडीह के ग्रामीणों ने जिस तत्परता से जवानों की मदद की, उसकी हर तरफ सराहना हो रही है।
सुरक्षाकर्मियों की सुरक्षा कौन करेगा?
पोटका का यह हादसा एक अलार्म है। खरसावां शहीद दिवस जैसी महत्वपूर्ण ड्यूटी से लौट रहे जवानों को अगर समय पर और सुरक्षित वाहन नहीं मिलता, तो यह विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा धब्बा है। आज जवान सुरक्षित हैं, लेकिन यह लापरवाही किसी बड़े मातम में बदल सकती थी।
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