Jamshedpur Clash: एमजीएम अस्पताल में डिलीवरी बॉय और मेडिकल छात्रों के बीच खूनी भिड़ंत, आधी रात को रणक्षेत्र बना परिसर, भारी पुलिस बल तैनात
जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल परिसर में देर रात ब्लिंकिट-बिग बास्केट के डिलीवरी बॉय और जूनियर डॉक्टरों के बीच हिंसक झड़प से भारी बवाल हो गया। दोनों पक्षों से जुटे सैकड़ों युवकों के कारण मचे इस तांडव की पूरी लाइव ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर, 20 मई 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा केंद्र, एमजीएम अस्पताल (MGM Hospital) परिसर में मंगलवार की देर रात उस समय कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ गईं, जब ऑनलाइन डिलीवरी बॉय और मेडिकल कॉलेज के छात्रों (इंटरन डॉक्टरों) के बीच किसी बात को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद एक खूनी जंग में तब्दील हो गया। दोनों पक्षों के बीच लाठी-डंडे और बेल्ट चले, जिससे अस्पताल परिसर कुछ ही मिनटों के भीतर एक भयानक रणक्षेत्र में बदल गया। आधी रात को हुए इस महासंग्राम के बाद दोनों तरफ से सैकड़ों की संख्या में बाहरी युवक और छात्र एकजुट हो गए, जिससे पूरे साकची और एमजीएम थाना क्षेत्र में सांप्रदायिक व सामाजिक तनाव जैसी स्थिति बन गई। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए एमजीएम थाना पुलिस ने भारी संख्या में सशस्त्र बलों के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति को बमुश्किल नियंत्रित किया।
वारदात की दास्तां: ब्लिंकिट की डिलीवरी, छात्राओं पर कमेंट का आरोप और आधी रात का वो खूनी तांडव
एमजीएम अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड और हॉस्टल परिसर के बीच हुई इस हिंसक झड़प के पीछे दोनों पक्षों की अपनी-अपनी कहानियां और बेहद गंभीर आरोप-प्रत्यारोप हैं।
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डिलीवरी बॉय कुंदन का छिनतई का आरोप: पीड़ित डिलीवरी बॉय कुंदन कुमार, जो ब्लिंकिट और बिग बास्केट जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ा है, उसने आरोप लगाया कि वह रात में अस्पताल परिसर के भीतर एक डॉक्टर या मरीज को सामान की डिलीवरी देने पहुंचा था। कुंदन के मुताबिक, जब वह डिलीवरी देकर लौट रहा था, तभी हॉस्टल के पास कुछ लड़कों और एक लड़की ने उसे जबरन रोका और उस पर 'लड़की को गलत नीयत से घूरने' का झूठा आरोप मढ़ दिया। कुंदन का दावा है कि विरोध करने पर छात्रों ने उसके और उसके साथियों के साथ बर्बरता से मारपीट की और उनके पास रखे डिलीवरी के पैसे भी छीन लिए।
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मेडिकल छात्रों का कमेंटबाजी का पलटवार: दूसरी तरफ, मेडिकल स्टूडेंट्स की ओर से विशाल नामक छात्र ने पूरी घटना को अलग मोड़ देते हुए बताया कि एक ही बाइक पर तीन बाहरी युवक (डिलीवरी बॉयज) अत्यधिक रफ्तार में अस्पताल परिसर के भीतर दाखिल हुए थे। हॉस्टल के सामने खड़ीं मेडिकल की छात्राओं को देखकर इन युवकों ने बेहद आपत्तिजनक कमेंट पास किए। जब छात्रों ने उन्हें शालीनता से रोकना चाहा, तो वे उलझ गए और गाली-गलौज करने लगे। छात्रों ने डिलीवरी बॉयज द्वारा लगाए गए पैसों की छिनतई के आरोप को पूरी तरह मनगढ़ंत और झूठा करार दिया है।
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कैंपस बना रणक्षेत्र, पुलिस का सायरन: देखते ही देखते दोनों पक्षों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। कपाली, मानगो और साकची के स्थानीय डिलीवरी बॉयज का सिंडिकेट एकजुट होकर लाठी-डंडों के साथ अस्पताल पहुंच गया, वहीं दूसरी ओर मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर और छात्र भी हॉस्टल से बाहर निकल आए। आधी रात को करीब दो घंटे तक कैंपस में पत्थरबाजी और गाली-गलौज का नग्न नाच चलता रहा। स्थिति बेकाबू होते देख अस्पताल प्रबंधन ने तुरंत पुलिस मुख्यालय को सूचित किया, जिसके बाद एमजीएम पुलिस ने लाठियां भांजकर भीड़ को तितर-बितर किया।
प्रशासनिक रुख: शिकायत का इंतजार, सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही साकची पुलिस
इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद पुलिस अब फूंक-फूंक कर कदम रख रही है ताकि डॉक्टरों की हड़ताल जैसी नौबत न आए।
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लिखित शिकायत पेंडिंग: एमजीएम थाना प्रभारी ने बताया कि खबर लिखे जाने तक दोनों ही पक्षों (ना तो डिलीवरी एसोसिएशन और ना ही मेडिकल कॉलेज प्रबंधन) की ओर से थाने में कोई आधिकारिक लिखित शिकायत (FIR) दर्ज नहीं कराई गई है। पुलिस दोनों पक्षों को शांत कराने के लिए मध्यस्थता का प्रयास कर रही है।
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डिजिटल सबूतों की जांच: पुलिस ने एमजीएम अस्पताल के मुख्य गेट, इमरजेंसी वार्ड और गर्ल्स हॉस्टल के पास लगे सरकारी सीसीटीवी कैमरों के वीडियो फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया है ताकि यह साफ हो सके कि पहले हाथ किसने उठाया था और कमेंटबाजी का सच क्या है।
अस्पताल परिसर में बाहरी वाहनों की नो-एंट्री और सुरक्षा ऑडिट समय की मांग
एमजीएम थाना पुलिस ने देर रात मौके पर पहुंचकर एक बड़ी अनहोनी और डॉक्टरों की संभावित हड़ताल को तो टाल दिया, लेकिन इस घटना ने एमजीएम अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की खोखली हो चुकी व्यवस्था को एक बार फिर बेनकाब कर दिया है। एक ही बाइक पर तीन डिलीवरी बॉयज का आधी रात को गर्ल्स हॉस्टल के पास तक बेधड़क पहुंच जाना यह साबित करता है कि मुख्य गेट पर तैनात सुरक्षा गार्ड केवल मूकदर्शक बने रहते हैं। जिला प्रशासन को तुरंत एमजीएम परिसर का 'सुरक्षा ऑडिट' करना चाहिए। रात 10 बजे के बाद केवल मरीजों के तीमारदारों को छोड़कर सभी बाहरी कमर्शियल डिलीवरी वाहनों की एंट्री मुख्य गेट पर ही बैन होनी चाहिए, ताकि भविष्य में एमजीएम की पावन धरती दोबारा रणक्षेत्र न बन सके।
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