Kadma Controversy: कदमा जगन्नाथ मंदिर की जमीन पर बढ़ा विवाद, कुड़मी समाज जाएगा कोर्ट, सीएनटी एक्ट के उल्लंघन का आरोप

जमशेदपुर के कदमा में नवनिर्मित जगन्नाथ मंदिर की जमीन को लेकर कुड़मी समाज ने मोर्चा खोल दिया है। सीएनटी एक्ट के उल्लंघन और खतियानी जमीन के अवैध हस्तांतरण के गंभीर आरोपों वाली यह विशेष रिपोर्ट यहाँ मौजूद है वरना आप शहर का यह सबसे बड़ा भूमि विवाद अपडेट मिस कर देंगे।

Feb 26, 2026 - 20:30
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Kadma Controversy: कदमा जगन्नाथ मंदिर की जमीन पर बढ़ा विवाद, कुड़मी समाज जाएगा कोर्ट, सीएनटी एक्ट के उल्लंघन का आरोप
Kadma Controversy: कदमा जगन्नाथ मंदिर की जमीन पर बढ़ा विवाद, कुड़मी समाज जाएगा कोर्ट, सीएनटी एक्ट के उल्लंघन का आरोप

जमशेदपुर, 26 फरवरी 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर में जहां एक ओर भगवान जगन्नाथ के भव्य मंदिर की आधारशिला रखी जा रही है, वहीं दूसरी ओर एक बड़ा कानूनी और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया है। झारखंड मूलवासी अधिकार मंच और टाटा विस्थापित आंदोलनकारी मंच ने कदमा मरीन ड्राइव स्थित मंदिर की जमीन के आवंटन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मंच के संयोजक हरमोहन महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर इस आवंटन को रद्द करने की मांग की है। कुड़मी समाज का दावा है कि जिस जमीन पर मंदिर बन रहा है, वह सीएनटी एक्ट (CNT Act) के दायरे में आती है और इसका हस्तांतरण पूरी तरह गैरकानूनी है।

1 रुपये का निबंधन और खतियान का दावा

हरमोहन महतो ने राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा उड़िया समाज को मात्र 1 रुपये के निबंधन शुल्क पर दी गई लीज बंदोबस्ती को चुनौती दी है:

  • असली मालिक का दावा: महतो के अनुसार, उक्त 2.5 एकड़ भूखंड के असली स्वामी कुड़मी समाज के लोग हैं। उनके पास इस जमीन के 1908 और 1937 के खतियान मौजूद हैं।

  • कानूनी पेच: सीएनटी एक्ट के तहत खतियानी रैयत की सहमति के बिना जमीन का हस्तांतरण किसी ट्रस्ट को नहीं किया जा सकता।

  • नियमों की अनदेखी: आरोप है कि यदि ट्रस्ट में मूल खतियानधारी शामिल नहीं हैं, तो जमीन का हस्तांतरण कानूनन वैध नहीं माना जा सकता।

टाटा लीज से बाहर और अधिग्रहण का खेल

विवाद की जड़ें काफी पुरानी बताई जा रही हैं। हरमोहन महतो ने जमीन के इतिहास को लेकर बड़े दावे किए हैं:

  1. 1985-1995 का दौर: यह जमीन पहले टाटा लीज के अंतर्गत आती थी।

  2. 2005 का मोड़: लीज नवीकरण के दौरान इस विशेष प्लॉट को लीज से बाहर कर दिया गया था।

  3. मुआवजे का अभाव: आरोप है कि वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार, लीज से बाहर हुई जमीन मूल रैयतों को लौटानी चाहिए थी, लेकिन न तो जमीन लौटाई गई और न ही कोई मुआवजा दिया गया।

कदमा भूमि विवाद: मुख्य विवरण (Conflict Snapshot)

विवरण प्रमुख जानकारी
विवादित भूखंड 2.5 एकड़ (मरीन ड्राइव, कदमा)
मुख्य पक्ष कुड़मी समाज बनाम मंदिर ट्रस्ट
कानूनी आधार सीएनटी एक्ट (1908/1937 खतियान)
प्रमुख मांग लीज बंदोबस्ती रद्द कर जमीन वापस करना
अगला कदम न्यायालय (Court) में मुकदमा दायर करना

न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा समाज

हरमोहन महतो ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले को लेकर शांत नहीं बैठेंगे।

  • कोर्ट केस की तैयारी: बहुत जल्द कुड़मी समाज के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका या दीवानी मुकदमा दायर किया जाएगा।

  • सरकार को चेतावनी: मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा गया है कि कानून का उल्लंघन कर सीएनटी जमीन का आवंटन राज्य के मूलवासियों के अधिकारों पर हमला है।

  • सामाजिक लामबंदी: शहर के विभिन्न संगठनों के साथ बैठक कर इस आंदोलन को तेज करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

आस्था और अधिकार के बीच टकराव

कदमा का जगन्नाथ मंदिर जहां श्रद्धालुओं के लिए भक्ति का केंद्र है, वहीं यह विवाद अब 'अधिकार' की लड़ाई बन चुका है। अब देखना यह है कि प्रशासन और न्यायालय इस जटिल तकनीकी और ऐतिहासिक मामले पर क्या रुख अपनाते हैं।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।