Golmuri Salute: शौर्य का जश्न, जमशेदपुर में पूर्व सैनिकों ने मनाया सेना दिवस, शहीद स्मारक पर केक काटकर वीरगाथाओं को किया याद
जमशेदपुर के गोलमुरी शहीद स्मारक पर अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद ने थल सेना दिवस का भव्य आयोजन किया है। 15 जनवरी 1949 के उस ऐतिहासिक दिन की याद में केक काटकर और वीर शहीदों को नमन कर मनाए गए इस उत्सव की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी लौहनगरी के रक्षकों के इस जज्बे और सम्मान समारोह की गौरवशाली यादों से महरूम रह जाएंगे।
जमशेदपुर, 15 जनवरी 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर आज 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' के नारों से गूंज उठी। अवसर था 78वें थल सेना दिवस का, जिसे अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद ने गोलमुरी स्थित शहीद स्मारक पर बेहद धूमधाम और गौरव के साथ मनाया। यह दिन भारतीय सेना के उस पराक्रम का प्रतीक है जिसने विश्व युद्धों से लेकर आज तक दुनिया भर में अपनी धाक जमाई है। पूर्व सैनिकों ने इस मौके पर स्पष्ट संदेश दिया कि भारतीय सेना केवल आधुनिक हथियारों के दम पर नहीं, बल्कि अपने अटूट जोश, जुनून और मिट्टी के प्रति निष्ठा की बदौलत दुनिया की सबसे अभेद्य दीवार बनी हुई है।
गोलमुरी शहीद स्मारक पर दिखा जोश: केक काटकर दीं शुभकामनाएं
अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के सदस्यों ने परंपरा को निभाते हुए गोलमुरी शहीद स्मारक को मुख्य केंद्र बनाया।
-
केक कटिंग सेरेमनी: संगठन के जिला अध्यक्ष और मुख्य अतिथियों ने मिलकर सेना दिवस का केक काटा और एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं।
-
मिठाई का वितरण: इस खुशी के मौके पर पूर्व सैनिकों के बीच मिठाई बांटी गई और सभी ने साथ मिलकर जलपान किया।
-
सम्मान समारोह: जिला महामंत्री जितेंद्र सिंह ने मुख्य अतिथियों को पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। शूरवीर नरसिंह सिंह, जसवीर सिंह, सत्येंद्र कुमार सिंह और राजीव कुमार ने अपने ओजस्वी स्वागत भाषणों से पूर्व सैनिकों में जोश भर दिया।
15 जनवरी का ऐतिहासिक महत्व: जब भारत को मिला अपना 'सेनापति'
अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद ने इस दौरान सेना के गौरवशाली इतिहास को याद किया।
-
आजादी के बाद का बदलाव: भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद तो हो गया था, लेकिन सेना की कमान तब भी ब्रिटिश अधिकारियों के पास थी।
-
ऐतिहासिक हस्तांतरण: 15 जनवरी 1949 को लेफ्टिनेंट जनरल के.एम. करिअप्पा (जो बाद में फील्ड मार्शल बने) ने ब्रिटिश जनरल सर फ्रांसिस रॉय बुचर से भारतीय सेना की कमान अपने हाथों में ली थी।
-
शहीदों को नमन: यह दिन उन जांबाज शहीदों को समर्पित है जिन्होंने सरहदों की रक्षा करते हुए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।
सेना दिवस समारोह: मुख्य विवरण (Event Snapshot)
| विवरण | जानकारी (Details) |
| आयोजक | अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद, जमशेदपुर |
| स्थान | शहीद स्मारक, गोलमुरी |
| मुख्य गतिविधि | केक कटिंग, मिठाई वितरण, शहीदों को श्रद्धांजलि |
| प्रमुख उपस्थिति | तीनों सेनाओं (जल, थल, नभ) से सेवानिवृत्त सैनिक |
| उद्देश्य | सैन्य परिवारों के सुख-दुख का साथी बनना |
एकजुट हुए 'वर्दी' वाले साथी: गौरवशाली उपस्थिति
कार्यक्रम में तीनों सेनाओं से सेवानिवृत्त बड़ी संख्या में सैनिक साथी मौजूद रहे। इसमें जितेंद्र सिंह, सके सिंह, जसबीर सिंह, नवल किशोर पाठक, राजीव कुमार, परमहंस यादव, विकास कुमार, किशोर प्रसाद, रास कुंज शर्मा, डीएन सिंह, हरि राम कामत, सुरेंद्रनाथ पांडे, देव नारायण सिंह, राम बाबू, एलबी सिंह, हरि सिंह, सतीश प्रसाद, किशोर कुमार, मनजीत सिंह, संतोष कुमार सिंह, प्रेम नाथ, राकेश कुमार पांडे और रोशन कुमार सिंह सहित कई अन्य पूर्व सैनिक उपस्थित थे। जिला अध्यक्ष ने संकल्प लिया कि संगठन हर पूर्व सैनिक और उनके परिवारों के सुख-दुख का साथी बनकर खड़ा रहेगा।
जोश अब भी बरकरार है
सेना दिवस पर जमशेदपुर के इन पूर्व सैनिकों का उत्साह यह बताता है कि 'रिटायरमेंट' केवल कागजों पर होता है, एक सैनिक का दिल हमेशा सरहद की सुरक्षा और देश के गौरव के लिए धड़कता रहता है। गोलमुरी की हवाओं में आज फिर वही पुराना सैन्य अनुशासन और गौरव महसूस किया गया।
What's Your Reaction?


