Burmamines Blaze: बर्मामाइंस के लकड़ी गोदाम में तड़के भीषण अग्निकांड, इम्तियाज़ खान के मिल में मची भगदड़, टाटा स्टील की फायर ब्रिगेड ने पाया काबू
जमशेदपुर के बर्मामाइंस स्थित मिल एंड गोदाम एरिया में मंगलवार तड़के भीषण आग लग गई। इम्तियाज़ खान के लकड़ी गोदाम में लगी इस आग से लाखों के नुकसान की आशंका है। टाटा स्टील और झारखंड अग्निशमन विभाग की मुस्तैदी से मची तबाही की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर/बर्मामाइंस, 24 मार्च 2026 – लौहनगरी के औद्योगिक केंद्र बर्मामाइंस स्थित मिल एंड गोदाम एरिया में मंगलवार की सुबह खौफनाक रही। तड़के करीब 4:00 बजे, जब पूरा शहर गहरी नींद में था, इम्तियाज़ खान के एक लकड़ी के गोदाम में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग की लपटों ने विकराल रूप ले लिया और आसमान में धुएं का काला गुबार छा गया। गनीमत रही कि गोदाम में तैनात गार्ड की सूझबूझ और टाटा स्टील की फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई से एक बड़ी औद्योगिक त्रासदी टल गई। हालांकि, गोदाम में रखी कीमती लकड़ियों के बोटे (Wood Logs) जलकर खाक हो गए हैं, लेकिन मशीनों और जनहानि के मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है।
4:00 AM का अलर्ट: गार्ड की सतर्कता ने बचाई मिल
हादसे की शुरुआत उस वक्त हुई जब बर्मामाइंस के इस घनी आबादी वाले गोदाम क्षेत्र में सन्नाटा पसरा था।
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धुएं का गुबार: ड्यूटी पर तैनात गार्ड की नजर सबसे पहले गोदाम के पिछले हिस्से से उठती आग की लपटों पर पड़ी। उसने बिना देर किए मालिक इम्तियाज़ खान और स्थानीय फायर स्टेशन को सूचित किया।
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तेजी से फैली आग: सूखी लकड़ी होने के कारण आग ने मिनटों में गोदाम के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। मौके पर पहुंचे स्थानीय लोग और गोदाम कर्मी बेबस नजर आ रहे थे क्योंकि पानी की बौछारें आग के आगे कम पड़ रही थीं।
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मशीनों का बचाव: गोदाम संचालक अनिकेत ने बताया कि आग मुख्य रूप से लकड़ी के बोटों वाले हिस्से तक ही सीमित रही। यह चमत्कार ही था कि आग गोदाम के भीतर लगी कीमती कटिंग मशीनों तक नहीं पहुँच पाई।
टाटा स्टील और सरकारी दमकल का साझा ऑपरेशन
आग की भयावहता को देखते हुए तत्काल टाटा स्टील फायर ब्रिगेड और झारखंड अग्निशमन विभाग को बुलाया गया।
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ज्वाइंट ऑपरेशन: मौके पर पहुँची दमकल की कई गाड़ियों ने मोर्चा संभाला। टाटा स्टील के अनुभवी दमकलकर्मियों ने आधुनिक उपकरणों की मदद से आग की घेराबंदी (Cordoning) की ताकि लपटें पास के अन्य गोदामों तक न फैलें।
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कड़ी मशक्कत: करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद सुबह 6:30 बजे तक आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। फिलहाल कूलिंग का काम जारी है ताकि मलबे के नीचे दबी चिंगारी फिर से न भड़क उठे।
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नुकसान का आकलन: हालांकि अभी तक कुल वित्तीय नुकसान का सटीक आंकड़ा सामने नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि लाखों रुपये की बेशकीमती लकड़ियां आग की भेंट चढ़ गई हैं।
बर्मामाइंस का औद्योगिक इतिहास और 'फायर सेफ्टी'
जमशेदपुर का बर्मामाइंस इलाका दशकों से लोहे और लकड़ी के व्यापार का सबसे बड़ा केंद्र रहा है।
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लकड़ी उद्योग का हब: यहाँ के 'मिल एंड गोदाम एरिया' में सैकड़ों छोटी-बड़ी इकाइयां संचालित हैं। लकड़ी का काम होने के कारण यहाँ आग लगने का खतरा हमेशा बना रहता है।
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पहली घटना: अनिकेत ने बताया कि उनके गोदाम के इतिहास में यह पहली बार है जब इस तरह का अग्निकांड हुआ है। इससे पहले सुरक्षा मानकों को लेकर वे हमेशा सतर्क रहे हैं, जिससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या यह शॉर्ट सर्किट था या कुछ और?
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सुरक्षा ऑडिट की मांग: इस घटना के बाद बर्मामाइंस के अन्य गोदाम मालिकों में भी चिंता है। स्थानीय व्यापारियों ने प्रशासन से औद्योगिक क्षेत्रों में फायर हाइड्रेंट और बेहतर अग्निशमन व्यवस्था की मांग की है।
अगला कदम: फॉरेंसिक जांच और शॉर्ट सर्किट का शक
अग्निशमन विभाग अब इस आग के पीछे के असली कारणों की पड़ताल कर रहा है।
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इलेक्ट्रिक ऑडिट: शुरुआती जांच में इसे शॉर्ट सर्किट का मामला माना जा रहा है, लेकिन विभाग बिजली के तारों और स्विच बोर्ड की जांच कर रहा है।
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फायर एनओसी (NOC): पुलिस और दमकल विभाग यह भी चेक करेगा कि क्या गोदाम में पर्याप्त अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguishers) मौजूद थे और क्या उनके पास जरूरी एनओसी थी।
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क्षतिपूर्ति की प्रक्रिया: इम्तियाज़ खान और उनकी टीम अब जले हुए माल की लिस्ट बना रही है ताकि बीमा कंपनी और संबंधित विभागों को जानकारी दी जा सके।
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