Sidhgora Suicide: सिदगोड़ा में नशे की लत ने ली 26 साल के अभिजीत की जान, बागुननगर में खिड़की से झांका तो उड़ गए भाई के होश
जमशेदपुर के सिदगोड़ा अंतर्गत बागुननगर में नशे के तनाव में युवक अभिजीत विश्वास ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। दिल्ली से वापसी, कैटरिंग का काम और फंदे पर लटकते भाई को बचाने की नाकाम कोशिश की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर/सिदगोड़ा, 7 अप्रैल 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर के सिदगोड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत बारीडीह बस्ती बागुननगर में सोमवार दोपहर एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। नशे की जानलेवा लत और उससे उपजे मानसिक तनाव ने एक और होनहार युवक की जिंदगी छीन ली। 26 वर्षीय अभिजीत विश्वास ने अपने ही घर के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। दोपहर करीब 1 बजे जब पूरा मोहल्ला अपने कामों में व्यस्त था, तब अभिजीत ने खौफनाक कदम उठाते हुए मौत को गले लगा लिया। इस घटना के बाद बागुननगर इलाके में मातम पसरा है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। सिदगोड़ा पुलिस ने मौके पर पहुँचकर मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है।
बागुननगर में मातम: जब खिड़की से दिखा खौफनाक मंजर
सोमवार की दोपहर अभिजीत के परिवार के लिए किसी काल से कम नहीं थी।
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कमरे में सन्नाटा: अभिजीत ने दोपहर करीब 1 बजे खुद को कमरे के भीतर बंद कर लिया था। काफी देर तक जब कोई हलचल नहीं हुई, तो उसके बड़े भाई अमित विश्वास को अनहोनी का अंदेशा हुआ।
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भाई की चीख: अमित ने जब कमरे की खिड़की से अंदर झांका, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। अभिजीत पंखे के सहारे फंदे से झूल रहा था।
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दरवाजा तोड़कर रेस्क्यू: आनन-फानन में शोर मचाते हुए अमित और पड़ोसियों ने कमरे का दरवाजा तोड़ा और फंदे को काटकर अभिजीत को नीचे उतारा। उसे तत्काल एमजीएम अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
दिल्ली से जमशेदपुर: कैसे 'नशे' ने बदली किस्मत की लकीर
अभिजीत की कहानी मेहनत से बर्बादी की ओर जाने वाले एक दुखद मोड़ की तरह है।
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गैस कटिंग का काम: अभिजीत पहले दिल्ली में रहकर गैस कटिंग का काम करता था और अपने परिवार की आर्थिक मदद करता था।
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घर वापसी का दुख: पिछले साल नवंबर में बड़े पिताजी के निधन के बाद परिवार ने उसे वापस जमशेदपुर बुला लिया था। यहाँ वह अपने भाई के साथ कैटरिंग के काम में हाथ बंटाने लगा।
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गलत संगत और तनाव: जमशेदपुर लौटने के बाद अभिजीत कुछ गलत लोगों की संगत में पड़ गया। उसे नशे की ऐसी लत लगी कि वह अपनी सुध-बुध खो बैठा। घर में नशे को लेकर अक्सर विवाद होता था, जिससे वह गहरे मानसिक तनाव (Depression) में चला गया था। पुलिस को आशंका है कि इसी तनाव और कलह के कारण उसने आत्मघाती कदम उठाया।
युवाओं को लीलता 'नशे का जाल'
सिदगोड़ा और बागुननगर का इलाका पिछले कुछ समय से नशे के सौदागरों के निशाने पर रहा है।
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बदनाम गलियां: बागुननगर और बारीडीह के कुछ पॉकेट ऐसे हैं जहाँ ब्राउन शुगर और अन्य नशीले पदार्थों की पहुंच आसान हो गई है। अभिजीत जैसे कई युवा दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों से लौटकर यहाँ के 'नशे के सिंडिकेट' का शिकार हो रहे हैं।
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कैटरिंग और दिहाड़ी मजदूर: कैटरिंग के काम में लगे युवाओं में अक्सर थकान और तनाव मिटाने के नाम पर नशे का सेवन शुरू होता है, जो बाद में जानलेवा बन जाता है। अभिजीत की आत्महत्या इस कड़वी हकीकत का ताजा उदाहरण है।
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पुलिस की फाइल: सिदगोड़ा थाना पुलिस ने अमित विश्वास के बयान पर अस्वाभाविक मौत (U.D. Case) दर्ज की है। पुलिस अब उन दोस्तों और संगत की भी जांच कर रही है जिन्होंने अभिजीत को नशे की ओर धकेला।
अगली कार्रवाई: पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
सिदगोड़ा थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
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गहन पूछताछ: थाना प्रभारी ने बताया कि आसपास के लोगों और उन दोस्तों से पूछताछ की जा रही है जिनके साथ अभिजीत का उठना-बैठना था।
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परिजनों का बयान: भाई अमित विश्वास ने पुलिस को बताया कि नशे की आदत ही अभिजीत की जान की दुश्मन बन गई। पुलिस अब इस मामले के हर पहलू को खंगाल रही है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह आत्महत्या ही है।
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इलाके में शोक: बागुननगर में अभिजीत एक मिलनसार युवक के रूप में जाना जाता था। उसकी मौत ने पूरे मोहल्ले को झकझोर कर रख दिया है।
बागुननगर में हुई यह घटना एक चेतावनी है उन माता-पिता के लिए जिनके बच्चे गलत संगत में पड़ रहे हैं। दिल्ली से कमाकर लौटा एक युवक अगर जमशेदपुर की गलियों में आकर नशे के कारण जान दे देता है, तो यह हमारे समाज की विफलता है। अभिजीत विश्वास अब हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसका जाना 'नशा मुक्ति' के दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान छोड़ गया है। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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