Jadugora Abandoned : झाड़ियों के पास मिली रोती हुई नवजात बच्ची, कलयुगी मां खुले आसमान के नीचे छोड़ हुई फरार!
जादूगोड़ा के धोबनी गांव में शुक्रवार तड़के झाड़ियों के पास लावारिस हालत में रोती हुई नवजात बच्ची मिलने से फैली सनसनी। जनप्रतिनिधियों की मदद से बच्ची को सुरक्षित एमजीएम चाइल्ड हेल्पलाइन को सौंपने की पूरी ऑन-फील्ड लाइव ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर/जादूगोड़ा, 29 मई 2026 – पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पोटका प्रमंडल के डोमजूडी पंचायत स्थित धोबनी गांव कॉरिडोर से शुक्रवार की अहले सुबह मानवता को पूरी तरह झकझोर देने वाली, संवेदनशील और भावुक कर देने वाली एक घटना सामने आई है। यहाँ एक कलयुगी मां ने सामाजिक लोक-लाज या किसी अज्ञात विधिक मजबूरी के चलते अपने कलेजे के टुकड़े (एक नवजात बच्ची) को कड़कड़ाती सुबह के सन्नाटे में खुले आसमान के नीचे लावारिस छोड़ दिया और घने अंधेरे का फायदा उठाकर चलती बनी। नवजात बच्ची के रोने की आवाज सुनकर स्थानीय ग्रामीणों ने उसे बरामद किया। जादूगोड़ा थाना पुलिस, स्थानीय मुखिया अनीता मुर्मू और जिला परिषद सदस्य हिरण्यमय दास की त्वरित विधिक और मानवीय पहल पर नवजात को सुरक्षित रेस्क्यू कर जमशेदपुर के एमजीएम (MGM) अस्पताल के चाइल्ड हेल्पलाइन (Child Helpline) विंग को सौंप दिया गया है। फिलहाल नवजात बच्ची पूरी तरह स्वस्थ और डॉक्टरों की विशेष विधिक निगरानी में सुरक्षित है।
रेस्क्यू की लाइव इनसाइड स्टोरी: सुबह 5:30 बजे की चीख, ग्रामप्रधान के घर के पास घेराबंदी और गोद लेने की चाह
पूर्वी सिंहभूम जिला बाल संरक्षण इकाई, जादूगोड़ा थाना गश्ती दल और पोटका अंचल के स्वास्थ्य सहिया नेटवर्क के आंतरिक विधिक सूत्रों से मिली लाइव ऑन-फील्ड इनपुट के अनुसार, यह पूरा रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद भावुक और त्वरित गति से चलाया गया।
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झाड़ू लगाते वक्त सुनी रोने की आवाज: शुक्रवार की सुबह करीब 5:30 बजे धोबनी गांव के ग्रामप्रधान नसीब बेसरा के आवास से महज 50 मीटर की दूरी पर गांव की एक स्थानीय युवती दुला हांसदा अपने घर के बाहर झाड़ू लगा रही थी। इसी दौरान उसे पास की झाड़ियों से किसी नवजात शिशु के बिलखने की आवाज सुनाई दी।
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गांव में फैली सनसनी: युवती ने जब पास जाकर देखा, तो कपड़े में लिपटी एक बेहद खूबसूरत नवजात बच्ची रो रही थी। यह खबर आग की तरह पूरे डोमजूडी पंचायत कॉरिडोर में फैल गई और सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ बच्ची को देखने उमड़ पड़ी।
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वार्ड सदस्य की पत्नी बनी मसीहा: जादूगोड़ा पुलिस और स्वास्थ्य सहिया लक्ष्मी सोरेन ने तुरंत मौके पर पहुंचकर बच्ची का प्राथमिक ऑन-फील्ड मेडिकल चेकअप कराया। इस बीच, डोमजूडी पंचायत के वार्ड सदस्य राहुल सोरेन की पत्नी माधो सोरेन ने इस लावारिस बच्ची को विधिक रूप से गोद लेने (Child Adoption) की इच्छा जाहिर की है। माधो सोरेन का कहना है कि उनकी कोई बेटी नहीं है, इसलिए वे इस बच्ची को अपना नाम देकर उसका भविष्य संवारना चाहती हैं।
ग्रामीण अंचलों में अवेयरनेस विंग और कारा (CARA) गोद लेने की विधिक प्रक्रिया का सरलीकरण समय की मांग
जादूगोड़ा थाना पुलिस, मुखिया अनीता मुर्मू और जिला परिषद सदस्य हिरण्यमय दास ने जिस तत्परता और संवेदनशीलता से सुबह-सुबह मौके पर पहुंचकर बच्ची को सुरक्षित रेस्क्यू किया और एमजीएम अस्पताल पहुंचाया, वह जिला प्रशासन के मानवीय विधिक क्रियान्वयन की दिशा में एक बहुत बड़ा ऑन-फील्ड माइलस्टोन है। पुलिस अब अज्ञात कलयुगी मां के खिलाफ परित्याग और विधिक लापरवाही की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच कर रही है। डोमजूडी पंचायत की मुखिया ने जिला प्रशासन से मांग की है कि नियमों में शिथिलता बरतते हुए बच्ची को स्थानीय वार्ड सदस्य की पत्नी माधो सोरेन को ही सौंपा जाए। लेकिन केवल भावुकता से इस गहरे सामाजिक संकट का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। 2026 के इस आधुनिक और डिजिटल युग में झारखंड बाल विकास विभाग और पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन को तुरंत संयुक्त संज्ञान लेते हुए पूरे पोटका-जादूगोड़ा कॉरिडोर में 'सुरक्षित शिशु सुपुर्दगी केंद्र' खोलने होंगे और ग्रामीण महिलाओं को जागरूक करना होगा। जब तक सुदूर देहातों में अनचाहे गर्भ और सुरक्षित विधिक गोद लेने की प्रक्रियाओं का प्रचार-प्रसार नहीं किया जाता, तब तक जादूगोड़ा के इस ऐतिहासिक, प्राकृतिक और पवित्र जनजातीय अंचल को नवजात परित्याग के इस डार्क और शर्मनाक इतिहास से पूरी तरह मुक्त नहीं कराया जा सकेगा।
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