ईश्वर सर्वशक्तिमान - सुनील कुमार "खुराना" , उत्तर प्रदेश
सबकी जिंदगी ऐसी जैसे पतंग हर पल भरें सब भरते इसमें रंग पतंग उड़ती नीले ऊंचे आसमान में मानव हवा में बात करता अभिमान से....

ईश्वर सर्वशक्तिमान
सबकी जिंदगी ऐसी जैसे पतंग
हर पल भरें सब भरते इसमें रंग
पतंग उड़ती नीले ऊंचे आसमान में
मानव हवा में बात करता अभिमान से
मानव के हाथों में होती पतंग की डोर
पतंग उड़ाता मानव लगाकर पूरा जोर
जैसे पतंग की डोर होती मानव के हाथ
सांसों की डोर सबकी होती प्रभु के हाथ
बन्दे सुख तेरे दो पल के क्यों बना अंजान
मां-बाप ही तेरे जग में प्यारे देव सम्मान
तू पल-पल जोड़ें माया जग में इंसान
क्यों बेच रहा बन्दे जग में अपना इमान
ये जीवन है तेरा आनी और जानी छाया
एक जैसी ना रहेगी जीवन में तेरी ये काया
मत कर बन्दे अपनी काया पर अभिमान
जग में ईश्वर ही है यहां पर सर्वशक्तिमान
स्वरचित और मौलिक कविता
सुनील कुमार "खुराना"
नकुड़ सहारनपुर
उत्तर प्रदेश भारत
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