Army Pride: अजेय शक्ति, आज़ादी के 2 साल बाद कैसे मिली भारतीय सेना को असली कमान, 15 जनवरी के गौरवशाली इतिहास का सच

भारतीय सेना दिवस के इस खास मौके पर जानिए 1895 से लेकर 1949 तक का वह अनसुना सफर जब ब्रिटिश जनरल फ्रांसिस बुचर ने एक भारतीय योद्धा को सौंपी थी कमान। दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी सेना के गठन और फील्ड मार्शल केएम करियप्पा के सेना प्रमुख बनने की पूरी रोमांचक कहानी यहाँ दी गई है वरना आप भी सेना के इस शौर्यपूर्ण बलिदान और इतिहास से अनजान रह जाएंगे।

Jan 15, 2026 - 16:24
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Army Pride: अजेय शक्ति, आज़ादी के 2 साल बाद कैसे मिली भारतीय सेना को असली कमान, 15 जनवरी के गौरवशाली इतिहास का सच
Army Pride: अजेय शक्ति, आज़ादी के 2 साल बाद कैसे मिली भारतीय सेना को असली कमान, 15 जनवरी के गौरवशाली इतिहास का सच

नई दिल्ली, 15 जनवरी 2026 – आज पूरा देश गर्व के साथ भारतीय सेना दिवस (Army Day) मना रहा है। यह दिन केवल परेड और झांकियों का नहीं, बल्कि उस अदम्य साहस, संकल्प और बलिदान का प्रतीक है जो हर भारतीय के सीने में देशभक्ति का जज्बा भर देता है। 15 जनवरी की तारीख भारत के सैन्य इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है, क्योंकि इसी दिन भारतीय सेना को अपना पहला भारतीय 'कमांडर-इन-चीफ' मिला था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस सेना को आज हम दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी और ताकतवर फौज मानते हैं, उसकी नींव आज़ादी से बहुत पहले ही पड़ चुकी थी? आइए, आज सेना दिवस पर जानते हैं ईस्ट इंडिया कंपनी से लेकर 'फील्ड मार्शल' तक का वह सफर, जो हर भारतवासी को गर्व से भर देगा।

1895: प्रेसीडेंसी आर्मी से आधुनिक सेना का उदय

भारतीय सेना का इतिहास 1947 से नहीं, बल्कि उससे 52 साल पहले शुरू हुआ था।

  • ईस्ट इंडिया कंपनी की नींव: 1 अप्रैल 1895 को ब्रिटिश शासन के दौरान आधुनिक भारतीय सेना की शुरुआत हुई थी। उस समय इसे प्रेसीडेंसी आर्मी के नाम से जाना जाता था।

  • ब्रिटिश दबदबा: शुरुआत में सेना की पूरी कमान ब्रिटिश अधिकारियों के हाथ में थी। भारतीय सैनिकों के लिए बैरक अलग थे और उन्हें ब्रिटिश अधिकारियों के साथ घुलने-मिलने की अनुमति नहीं थी।

  • VCOs की भूमिका: हालांकि अधिकतर उच्च पदों पर अंग्रेज थे, लेकिन भारतीय सैनिकों को 'वायसराय कमीशंड ऑफिसर' (VCOs) के रूप में सेवा देने का मौका मिलता था।

1949: वह ऐतिहासिक पल जब भारत को मिला अपना 'सेनापति'

15 अगस्त 1947 को देश आजाद तो हो गया, लेकिन भारतीय सेना की बागडोर अब भी ब्रिटिश जनरल के हाथों में थी।

  1. आखिरी ब्रिटिश कमांडर: जनरल फ्रांसिस बुचर भारतीय सेना के आखिरी ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ थे।

  2. करियप्पा का दौर: 15 जनवरी 1949 को जनरल फ्रांसिस बुचर ने अपना पद छोड़ा और कमान सौंपी फील्ड मार्शल केएम करियप्पा को। करियप्पा आज़ाद भारत के पहले भारतीय सेना प्रमुख बने।

  3. सेना दिवस की घोषणा: इसी ऐतिहासिक बदलाव की याद में हर साल 15 जनवरी को 'भारतीय सेना दिवस' के रूप में मनाने का फैसला लिया गया।

भारतीय सेना: इतिहास का सफरनामा (History at a Glance)

वर्ष/तारीख महत्वपूर्ण घटना (Milestone)
1 अप्रैल 1895 आधुनिक भारतीय सेना (प्रेसीडेंसी आर्मी) का गठन
1930 सेना का 'भारतीयकरण' शुरू हुआ (भारतीयों को ऊंचे पद मिलने लगे)
1947 भारत-पाकिस्तान विभाजन के साथ सेना का दो हिस्सों में बंटवारा
15 जनवरी 1949 केएम करियप्पा बने पहले भारतीय सेना प्रमुख
वर्तमान स्थिति दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी और शक्तिशाली सेना

दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी ताकत: आज की भारतीय सेना

आज भारतीय सेना का मुख्यालय नई दिल्ली में है और यह थल, नभ और जल—तीनों मोर्चों पर अजेय है।

  • तकनीकी शक्ति: अब भारतीय सेना केवल संख्या बल में नहीं, बल्कि राफेल, ब्रह्मोस और अर्जुन टैंक जैसे आधुनिक हथियारों से लैस एक 'हाई-टेक' फ़ोर्स बन चुकी है।

  • समर्पण की मिसाल: सियाचिन की बर्फीली चोटियों से लेकर राजस्थान के तपते रेगिस्तान तक, भारतीय जवान हर पल देश की रक्षा के लिए मुस्तैद हैं।

  • वैश्विक सम्मान: संयुक्त राष्ट्र (UN) के शांति मिशनों में भारतीय सेना का योगदान दुनिया भर में सराहा जाता है।

सेना के सम्मान में एकजुट देश

भारतीय सेना दिवस हमें याद दिलाता है कि हमारी आज़ादी और चैन की नींद के पीछे उन लाखों जवानों का बलिदान है जिन्होंने अपना आज हमारे कल के लिए कुर्बान कर दिया। केएम करियप्पा की वो विरासत आज भी हर सैनिक के अनुशासन और देशभक्ति में झलकती है।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।