Global Deal: भारत-EU के बीच ऐतिहासिक महा-समझौता, पीएम मोदी ने ट्रंप का नाम लिए बिना दी चेतावनी, 'ट्रेड वॉर' के दौर में रची नई ग्लोबल सप्लाई चेन
भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुए अब तक के सबसे बड़े फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की पूरी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट यहाँ मौजूद है। ट्रेड और टेक्नोलॉजी को हथियार बनाने वालों को पीएम मोदी का कड़ा संदेश और 180 बिलियन यूरो के व्यापारिक साम्राज्य की पूरी इनसाइड स्टोरी विस्तार से पढ़िए वरना आप विश्व की दो महाशक्तियों के इस ऐतिहासिक गठजोड़ को जानने से चूक जाएंगे।
नई दिल्ली, 27 जनवरी 2026 – वैश्विक अर्थव्यवस्था के नक्शे पर आज एक नया इतिहास लिखा गया है। भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) ने अपने बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर मुहर लगाकर दुनिया को चौंका दिया है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर EU नेताओं की मौजूदगी के बीच हुए इस समझौते को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'अभूतपूर्व' करार दिया। हालांकि, इस जश्न के बीच पीएम मोदी का संबोधन चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें उन्होंने बिना नाम लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की व्यापारिक नीतियों पर तीखा प्रहार किया। मोदी ने साफ कर दिया कि आज के दौर में जब दुनिया ट्रेड और टेक्नोलॉजी को 'हथियार' बना रही है, तब भारत और यूरोप मिलकर एक नया विकल्प पेश कर रहे हैं।
पीएम मोदी का वार: "हथियार बनाया जा रहा है ट्रेड और टेक्नोलॉजी को"
इंडिया-EU बिजनेस फोरम में पीएम मोदी का रुख काफी कड़ा नजर आया। उन्होंने किसी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा साफ तौर पर संरक्षणवादी नीतियों की ओर था।
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बड़ा बयान: मोदी ने कहा, "आज पूरी दुनिया में ट्रेड, टेक्नोलॉजी और रेयर अर्थ मिनिरल्स को हथियार बनाया जा रहा है। क्या हमारी बिजनेस कम्युनिटी मिलकर EVs, बैटरी और चिप्स जैसे एरिया में बाहरी निर्भरता को कम कर सकती है?"
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भरोसेमंद विकल्प: पीएम ने बिजनेस लीडर्स से आह्वान किया कि वे मिलकर एक ऐसी विश्वसनीय सप्लाई चेन बनाएं, जो किसी एक देश के दबदबे या 'ट्रेड वॉर' से प्रभावित न हो।
10 साल में दोगुना व्यापार: 180 बिलियन यूरो का आंकड़ा
प्रधानमंत्री ने भारत और यूरोप के बीच बढ़ते आर्थिक रिश्तों के शानदार आंकड़े भी पेश किए:
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व्यापारिक उछाल: पिछले 10 वर्षों में भारत और EU के बीच व्यापार दोगुना होकर 180 बिलियन यूरो तक पहुँच गया है।
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कंपनियों का जाल: वर्तमान में भारत में 6000 से अधिक यूरोपीय कंपनियां सक्रिय हैं, जबकि 1500 भारतीय कंपनियां यूरोप में अपनी धाक जमा चुकी हैं।
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सकारात्मक संदेश: पीएम ने कहा कि वैश्विक उथल-पुथल के बीच यह FTA बिजनेस जगत के लिए स्थिरता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
भारत-EU ऐतिहासिक डील: मुख्य आकर्षण (Key Highlights)
| मुख्य बिंदु | विवरण (Details) |
| समझौते का स्वरूप | फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) |
| वर्तमान व्यापार | 180 बिलियन यूरो (10 साल में दोगुना) |
| फोकस सेक्टर | EV, बैटरी, सेमीकंडक्टर चिप्स, ग्रीन एनर्जी |
| रणनीतिक लक्ष्य | विश्वसनीय अल्टरनेट सप्लाई चेन का निर्माण |
| साझा मूल्य | ओपन सोसाइटी और वैश्विक स्थिरता |
EVs और चिप्स: आत्मनिर्भरता का नया रोडमैप
प्रधानमंत्री ने बिजनेस फोरम में केवल व्यापार की बात नहीं की, बल्कि 'फ्यूचर टेक्नोलॉजी' पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में जो देश रेयर अर्थ मिनिरल्स और चिप्स पर नियंत्रण रखेगा, वही दुनिया पर राज करेगा। भारत-EU मिलकर सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) के क्षेत्र में चीन और अमेरिका की निर्भरता को खत्म करने के लिए काम करेंगे।
वैश्विक स्थिरता की नई धुरी
पीएम मोदी के अनुसार, भारत और यूरोप दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियां हैं। यह FTA केवल लाभ कमाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्थिरता के प्रति एक साझा जिम्मेदारी है। अब देखना यह होगा कि डोनल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के सामने यह 'इंडिया-EU गठबंधन' कितना प्रभावी साबित होता है।
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