Gujarat Crackdown: अहमदाबाद-सूरत में अवैध प्रवासियों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई, 500 से ज्यादा हिरासत में

गुजरात के अहमदाबाद और सूरत में अवैध प्रवासियों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया गया, जिसमें 500 से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। जानिए इस ऑपरेशन के पीछे की बड़ी वजह और क्या हो रहे हैं अगला कदम।

Apr 26, 2025 - 16:50
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Gujarat Crackdown: अहमदाबाद-सूरत में अवैध प्रवासियों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई, 500 से ज्यादा हिरासत में
Gujarat Crackdown: अहमदाबाद-सूरत में अवैध प्रवासियों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई, 500 से ज्यादा हिरासत में

गुजरात में एक बड़े अभियान के तहत अवैध प्रवासियों पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। अहमदाबाद और सूरत में पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीमें सक्रिय हुईं और 500 से अधिक संदिग्ध अवैध प्रवासियों को हिरासत में लिया गया। इस ऑपरेशन ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है।

कैसे शुरू हुई यह बड़ी कार्रवाई?

इस ऑपरेशन की जड़ें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस निर्देश में छिपी हैं, जिसमें उन्होंने 24 अप्रैल को देश के सभी मुख्यमंत्रियों से बात कर तत्काल प्रभाव से पाकिस्तानी नागरिकों के 14 श्रेणियों में जारी वीजा रद्द करने और अवैध प्रवासियों की पहचान कर भारत से बाहर निकालने के आदेश दिए थे। शाह के निर्देश के बाद भाजपा शासित राज्यों में बड़े स्तर पर अभियान शुरू हो गए, जिनमें गुजरात सबसे आगे निकला।

अहमदाबाद में बड़ी पकड़

अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के डीसीपी अजीत राजियन ने बताया कि एसओजी, ईओडब्ल्यू, जोन 6 और हेडक्वार्टर की टीमों के साथ मिलकर एक व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया। इस अभियान के दौरान 400 से ज्यादा संदिग्ध प्रवासियों को हिरासत में लिया गया है। इनमें से अधिकतर बांग्लादेशी नागरिक बताए जा रहे हैं। जेसीपी शरद सिंघल के अनुसार, चंडोला के आसपास रहने वाले प्रवासियों को टारगेट कर कार्रवाई की गई है।

सूरत में भी चला ऑपरेशन

इधर सूरत पुलिस की एसओजी और क्राइम ब्रांच ने भी कमर कस ली थी। सूरत के अलग-अलग इलाकों से 100 से अधिक अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा गया है। सभी संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है और उनके दस्तावेजों की गहन जांच जारी है।

इतिहास से सबक

भारत में अवैध प्रवासियों का मुद्दा नया नहीं है। 1971 के बांग्लादेश युद्ध के बाद बड़ी संख्या में शरणार्थी भारत आए थे। लेकिन धीरे-धीरे अवैध प्रवास बढ़ने लगा। इससे न केवल सुरक्षा संबंधी खतरे बढ़े बल्कि सामाजिक और आर्थिक दबाव भी बना। गुजरात, जो व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है, अवैध प्रवासियों के लिए एक आकर्षक ठिकाना बनता चला गया।

जांच में चौंकाने वाले खुलासे

हिरासत में लिए गए प्रवासियों के पास से बड़ी संख्या में फर्जी भारतीय दस्तावेज बरामद हुए हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ये लोग स्थानीय एजेंटों की मदद से आधार कार्ड, राशन कार्ड और अन्य सरकारी कागजात तैयार कराते हैं। फिलहाल एजेंटों की पहचान कर उन्हें भी पकड़ने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

क्या होगा अगला कदम?

गुजरात पुलिस ने साफ कर दिया है कि सभी हिरासत में लिए गए अवैध प्रवासियों को पूरी कानूनी प्रक्रिया के बाद डिपोर्ट किया जाएगा। अहमदाबाद में पहले भी दो एफआईआर दर्ज कर 127 बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़ा गया था, जिनमें से 70 को पहले ही डिपोर्ट किया जा चुका है। अब शेष पर भी कार्यवाही की जा रही है।

सरकार का सख्त संदेश

इस कार्रवाई के जरिए केंद्र और राज्य सरकारों ने साफ संदेश दिया है कि अब अवैध प्रवास को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अमित शाह ने भी साफ कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। गुजरात का यह ऑपरेशन अब देशभर में एक उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है।

गुजरात में हुआ यह बड़ा क्रैकडाउन एक अहम मोड़ है। सवाल उठता है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए अवैध प्रवासियों का नेटवर्क आखिर इतना मजबूत कैसे बन गया? क्या भविष्य में भी इसी तरह के सख्त कदम उठाकर देश को इस खतरे से बचाया जा सकेगा? फिलहाल गुजरात ने जो आगाज किया है, वह दूसरे राज्यों के लिए भी एक चेतावनी है।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।