Giridih Suicide : खौफनाक मौत! मां-बेटी की एक साथ फंदे से लटकती मिली लाश
गिरिडीह में मां-बेटी की एक साथ फंदे से लटकती लाश मिलने से सनसनी फैल गई है। स्वयं सहायता समूह के कर्ज और किस्तों के दबाव की इस खौफनाक हकीकत को जानकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। जानिए इस सुसाइड मिस्ट्री का पूरा सच।
गिरिडीह: सुसाइड मिस्ट्री। झारखंड के गिरिडीह जिले से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में मातम और दहशत का माहौल बना दिया है। मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के इंडस्ट्रियल एरिया स्थित गादी श्रीरामपुर में सोमवार को एक ही घर के अंदर मां और उसकी 15 साल की मासूम बेटी का शव फंदे से झूलता पाया गया। यह सिर्फ एक हादसा है या मजबूरी की इंतहा, इसकी जांच में अब पूरी पुलिस टीम जुट गई है।
एक घर, दो फंदे और पसरा सन्नाटा
सोमवार की सुबह गादी श्रीरामपुर इलाके के लिए काली साबित हुई। जब लोगों को पता चला कि पुतुल देवी (35 वर्ष) और उसकी बेटी स्नेहा कुमारी (15 वर्ष) अब इस दुनिया में नहीं रहीं, तो किसी को यकीन नहीं हुआ। दोनों के शव घर के अंदर एक साथ फंदे से लटके हुए थे। मौके पर पहुंची मुफ्फसिल थाना पुलिस ने शवों को नीचे उतारा और पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया।
कर्ज का वो 'खूनी' जाल और किस्तों का दबाव
घटना के पीछे की जो सबसे बड़ी वजह सामने आ रही है, वह बेहद चौंकाने वाली है। पुतुल देवी के पति सोनू रवाणी के मुताबिक, उसकी पत्नी ने स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) से लोन लिया था। लोन लेना तो आसान था, लेकिन उसकी किस्तों को चुकाना पुतुल के लिए जी का जंजाल बन गया था।
सोनू ने बताया कि पुतुल पिछले कई दिनों से गहरे मानसिक तनाव (Depression) में थी। जब भी घर में लोन या पैसों की बात छिड़ती, वह फूट-फूट कर रोने लगती थी। समूह की तरफ से किस्तों के लिए दबाव बनाया जा रहा था, और शायद इसी सामाजिक शर्मिंदगी और आर्थिक बोझ ने उससे यह भयानक कदम उठवा लिया।
हत्या या आत्महत्या? लोगों के मन में गहरा संशय
भले ही पुलिस इसे प्रथम दृष्टया आत्महत्या का मामला मान रही है, लेकिन मौके पर जमा भीड़ कुछ और ही अंदेशा जता रही है। इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म है। कुछ लोगों का कहना है कि मां और बेटी को मारकर लटकाया भी जा सकता है। "जितने मुंह उतनी बातें" वाली स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों ने पुलिस से मांग की है कि मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच हो ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
गिरिडीह और माइक्रोफाइनेंस का पुराना इतिहास
गिरिडीह के ग्रामीण इलाकों में स्वयं सहायता समूहों और माइक्रोफाइनेंस कंपनियों का जाल काफी पुराना है। यहाँ की गरीब महिलाएं छोटे-छोटे रोजगार के लिए इन समूहों से जुड़ती हैं। लेकिन अक्सर देखा गया है कि ऊंची ब्याज दरों और किस्तों की वसूली के सख्त तरीकों के कारण महिलाएं मानसिक प्रताड़ना का शिकार होती हैं। इतिहास गवाह है कि कर्ज के दलदल में फंसकर झारखंड के ग्रामीण इलाकों में पहले भी कई हंसते-खेलते परिवार उजड़ चुके हैं।
पुलिसिया जांच और पोस्टमार्टम का इंतजार
थाना प्रभारी का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही वक्त और कारणों का पता चल पाएगा। पुलिस पुतुल देवी के मोबाइल रिकॉर्ड्स और स्वयं सहायता समूह के सदस्यों से भी पूछताछ करने की तैयारी में है। क्या किस्तों की वसूली के लिए उसे प्रताड़ित किया जा रहा था? क्या बेटी स्नेहा ने मां को देख यह कदम उठाया या फिर इसके पीछे कोई और राज छिपा है?
सावधान रहें: अगर आप या आपका कोई जानने वाला आर्थिक तंगी या मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो कृपया बातचीत करें। कर्ज जिंदगी से कीमती नहीं होता।
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