Giridih Grieved: दीपावली के ठीक बाद गिरिडीह के द्वारपहरी में भीषण आग, गरीब मजदूर परिवार के 5 लाख की संपत्ति राख, सोना-चांदी और 40 हजार की नगदी जली
झारखंड के गिरिडीह जिले के द्वारपहरी गांव में मंगलवार रात गैस सिलिंडर लीक होने से सुनील मंडल के घर में भीषण आग लग गई। इस हादसे में मजदूरों की मजदूरी के लिए रखे 40 हजार नगदी समेत करीब 5 लाख रुपये की संपत्ति जलकर खाक हो गई। ग्रामीणों ने तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। सीओ ने नियमानुसार मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया है।
दीपावली की खुशियां अभी पूरी तरह से थमी भी नहीं थीं कि झारखंड के गिरिडीह जिले के बिरनी थाना क्षेत्र के द्वारपहरी गांव में मंगलवार रात एक दिल दहला देने वाली घटना घट गई। सुनील मंडल के घर में खाना बनाते समय गैस सिलिंडर लीक होने के कारण अचानक भीषण आग लग गई। इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में परिवार का सब कुछ जलकर राख हो गया, जिसमें करीब पाँच लाख रुपये की संपत्ति और मजदूरों को देने के लिए रखी नगदी भी शामिल है। यह हादसा गरीब परिवार पर एक बड़ी विपत्ति बनकर टूटा है।
घटना उस समय हुई जब सुनील मंडल की पत्नी कौशल्या देवी घर में रोजमर्रा की तरह गैस पर खाना बना रही थीं। अचानक गैस रिसाव के कारण आग ने भयानक रूप ले लिया और देखते ही देखते पूरे घर में फैल गई। कौशल्या देवी और उनके बच्चों की चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण तुरंत उनके घर पहुँचे।
3 घंटे तक जंग: सब कुछ जलकर खाक
गांववालों ने कुआँ में डीजल पंप लगाकर आग बुझाने की जंग शुरू की। स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। लेकिन तब तक गरीब परिवार की पूरी जमापूंजी और सामान राख में बदल चुका था।
-
सबसे बड़ा नुकसान: पीड़ित कौशल्या देवी और उनके पुत्र नीलेश मंडल ने आँसू भरी आँखों से बताया कि आग में सबसे बड़ा नुकसान उस 40 हजार रुपये की नगदी का हुआ, जिसे उन्होंने मजदूरों को मजदूरी देने के लिए रखा था। इसके अलावा, सोना-चांदी के जेवरात, काँसा-पीतल के बर्तन, कीमती कपड़े, महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे बैंक पासबुक और आधार कार्ड, अलमारी और पूरे परिवार का खाद्य सामग्री समेत सब कुछ जलकर राख हो गया। यह परिवार अब पूरी तरह से बेसहारा हो गया है।
सीओ का आश्वासन: क्या मिलेगी राहत?
घटना की सूचना मिलने पर मुखिया सुनीता देवी और जेएलकेएम नेता अशोक मंडल पीड़ित परिवार से मिले और उन्हें ढांढस बंधाया। इसके बाद सीओ **(सर्कल ऑफिसर) संदीप मधेशिया ने मामले का संज्ञान लिया। उन्होंने पीड़ित गृहस्वामी को आवेदन देने को कहा है। सीओ ने आश्वासन दिया कि आवेदन मिलने के बाद जाँच करवाई जाएगी और नियमानुसार मुआवजे के लिए वरीय पदाधिकारी को पत्र भेजा जाएगा।
इस हादसे ने झारखंड के ग्रामीण इलाकों में गैस सुरक्षा के मानकों और उपयोग पर एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है। गरीब मजदूर परिवार की मेहनत की पूंजी का इस तरह जलकर खाक हो जाना अत्यंत पीड़ादायक है। पूरे गांव को अब सीओ के मुआवजे के आश्वासन पर भरोसा है, ताकि यह परिवार इस विपत्ति से उबर सके।
आपकी राय में, झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में गैस सिलिंडर लीक से होने वाली आग की घटनाओं को रोकने और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सुरक्षित करने के लिए स्थानीय प्रशासन और गैस वितरक कंपनियों को कौन से दो सबसे प्रभावी और अनिवार्य कदम उठाने चाहिए?
What's Your Reaction?


