Ghatsila Gift: घाटशिला के बच्चों ने बाँटा खुशियों का 'खजाना', 90 तरह के उपहार दिए, जानिए कैसे साधना ने फैलाया सद्भावना का संदेश
क्या आप जानते हैं कि संत नंदलाल स्मृति विद्या मंदिर के छात्रों ने खरिया बस्ती के बच्चों को एक साथ 90 तरह के उपहार क्यों बाँटे? दीये, मोमबत्तियाँ, चॉकलेट और खिलौने देकर किस बड़े संदेश को आगे बढ़ाया गया? इस पहल में वरिष्ठ शिक्षिका नीलिमा सरकार और सुदीप कुमार घोष की क्या भूमिका रही? कैसे यह कार्यक्रम समाज में करुणा और सकारात्मकता को बढ़ावा देता है? पूरी जानकारी पढ़ें!
घाटशिला, 30 अक्टूबर 2025 – झारखंड के घाटशिला क्षेत्र से आज एक ऐसी प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जिसने बता दिया कि असली शिक्षा किताबों से नहीं, बल्कि इंसानियत और सद्भावना से आती है। घाटशिला स्थित संत नंदलाल स्मृति विद्या मंदिर के छात्रों ने गुरुवार को UMS खरिया बस्ती उत्क्रमित विद्यालय, हुलुन्घ के बच्चों के साथ एक अद्वितीय खुशी साझा की। यह पहल केवल उपहार बाँटने की नहीं थी, बल्कि करुणा, सकारात्मकता और समानता के एक गहरे संदेश को समाज के हर कोने तक पहुँचाने का प्रयास था।
90 तरह के उपहार: खुशियों का वो खजाना जो बन गया मिसाल
संत नंदलाल स्मृति विद्या मंदिर के कुल 14 छात्रों ने अपनी वरिष्ठ शिक्षिका श्रीमती नीलिमा सरकार एवं श्री सुदीप कुमार घोष के मार्गदर्शन में यह खास कार्यक्रम आयोजित किया।
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विभिन्न सामग्री: छात्रों ने खरिया बस्ती के बच्चों को 90 तरह की विभिन्न उपहार सामग्री बाँटकर अपनी खुशियों को साझा किया।
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दीये और चॉकलेट: उपहारों में दीये और मोमबत्तियाँ (जो शायद आगामी त्योहारों के लिए थीं), चॉकलेट, बिस्कुट, खिलौने एवं विभिन्न उपहार शामिल थे। ये सभी उपहार सम्पूर्ण विद्यालय परिवार की ओर से एकत्रित किए गए थे।
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मानवता का संदेश: छात्रों द्वारा किया गया यह प्रयास समाज में समानता एवं मानवता के संदेश को आगे बढ़ाता है, जिसका इतिहास झारखंड में हमेशा एक दूसरे के प्रति सहयोग का रहा है।
करुणा और स्नेह की शिक्षा: जब बच्चों ने सिखाया बड़ों को
विद्यालय और विद्यार्थियों की यह पहल केवल दान-पुण्य तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका उद्देश्य समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाना था।
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शिक्षा का मूल भाव: यह कदम समाज में करुणा, सद्भावना, स्नेह और सकारात्मकता को बढ़ावा देता है। यह दिखाता है कि कैसे शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी है।
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प्रोत्साहन: विद्यालय प्रबंधिका शोभा गनेरीवाल एवं प्राचार्य डॉ.प्रसेनजीत कर्मकार ने बच्चों के इस उत्कृष्ट कार्य के लिए उनकी तारीफ की और उनके उज्जवल भविष्य की मंगल कामना की। उनका प्रोत्साहन निश्चित रूप से छात्रों को भविष्य में ऐसे और भी अच्छे कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा।
इस तरह की मानवीय पहल बताती है कि स्कूलों को सिर्फ मेरिट लिस्ट पर ही नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिक मूल्यों की शिक्षा पर भी ध्यान देना चाहिए। घाटशिला की यह घटना आज के दौर में सभी शिक्षण संस्थानों और माता-पिता के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है कि खुशियाँ बाँटने से ही बढ़ती हैं।
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