Garhwa Murder: खूनी अंधविश्वास, गढ़वा में कलियुगी बेटे ने सोते हुए बाप को कुल्हाड़ी से काटा, डायन-भूत के शक में दी खौफनाक सजा
गढ़वा जिले के बड़गड़ में एक बेटे ने जादू-टोने के शक में अपने ही पिता की कुल्हाड़ी से काटकर निर्मम हत्या कर दी है। खुद की और बच्चों की बीमारी का जिम्मेदार पिता को मानकर अंजाम दी गई इस खौफनाक वारदात और पुलिस के बड़े खुलासे की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी समाज में छिपे इस 'अंधविश्वास के कसाई' की हकीकत नहीं जान पाएंगे।
गढ़वा, 5 जनवरी 2026 – झारखंड के गढ़वा जिले से एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने रिश्तों की पवित्रता और आधुनिक समाज के दावों पर कालिख पोत दी है। बड़गड़ थाना क्षेत्र के गड़िया गांव में एक 36 वर्षीय बेटे ने केवल इस शक में अपने पिता को कुल्हाड़ी से काट डाला कि वह उन पर 'जादू-टोना' करते थे। अंधविश्वास की आग में जल रहे नागेंद्र राम ने अपने ही पिता चंद्रिका राम को उस वक्त निशाना बनाया जब वे बेखबर सो रहे थे। पुलिस ने इस दिल दहला देने वाले मामले का खुलासा करते हुए आरोपी बेटे को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत पैदा कर दी है।
आधी रात को 'खूनी' इंसाफ: सोते हुए पिता पर वार
पुलिस की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी भी संवेदनशील इंसान को झकझोर कर रख देंगे।
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अंधविश्वास की जड़: आरोपी नागेंद्र राम (36 वर्ष) पिछले काफी समय से खुद की और अपने बच्चों की बीमारी को लेकर परेशान था। उसे यकीन हो गया था कि उसके पिता चंद्रिका राम 'डायन-भूत' का सहारा लेकर परिवार पर जादू-टोना कर रहे हैं।
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वारदात की रात: 2 जनवरी की रात जब चंद्रिका राम अपने घर में अकेले सो रहे थे, तभी नागेंद्र कुल्हाड़ी लेकर पहुँचा। उसने पिता के गर्दन और सिर पर कुल्हाड़ी से कई वार किए, जिससे मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई।
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पुलिस की दस्तक: 3 जनवरी की दोपहर जब पुलिस को सूचना मिली, तो टीम ने मौके पर पहुँचकर जांच शुरू की। शुरुआती शक घर के सदस्यों पर ही गया और पूछताछ में नागेंद्र का झूठ टिक नहीं सका।
साक्ष्यों ने खोली पोल: खून से सने कपड़े और कुल्हाड़ी बरामद
गिरफ्तारी के बाद नागेंद्र ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किए गए सबूतों का जखीरा बरामद किया है:
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हत्या का हथियार: लकड़ी के बेंट वाली वह कुल्हाड़ी, जिस पर अब भी चंद्रिका राम के खून के निशान मौजूद थे।
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सबूत: वारदात के वक्त नागेंद्र द्वारा पहना गया काले रंग का जैकेट और लाल रंग का लोवर पैंट, जो खून के छींटों से सने हुए थे।
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फोरेंसिक साक्ष्य: पुलिस ने घटना स्थल से खून से सनी मिट्टी भी जब्त की है, जिसे कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश किया जाएगा।
गढ़वा मर्डर केस: मुख्य विवरण (Crime Snapshot)
| विवरण | जानकारी |
| मृतक का नाम | चंद्रिका राम (निवासी गड़िया गांव) |
| आरोपी बेटा | नागेंद्र मोची उर्फ नागेंद्र राम (36 वर्ष) |
| हत्या की वजह | अंधविश्वास (जादू-टोना और बीमारी का शक) |
| हत्या का हथियार | कुल्हाड़ी |
| पुलिस कार्रवाई | धारा 103(1) BNS के तहत जेल भेजा गया |
इतिहास और अंधविश्वास: पलामू प्रमंडल में 'डायन-प्रथा' का दाग
गढ़वा, पलामू और लातेहार का यह इलाका ऐतिहासिक रूप से अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ 'डायन-बिसाही' जैसी सामाजिक कुरीतियों के लिए भी खबरों में रहा है। 1990 के दशक से लेकर अब तक, इस क्षेत्र में अंधविश्वास के कारण सैकड़ों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। झारखंड में 'डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम 2001' लागू होने के बावजूद, ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण अक्सर बेटे अपने पिता की या ग्रामीण अपनी ही महिलाओं की हत्या 'भूत-प्रेत' के शक में कर देते हैं। नागेंद्र का यह कृत्य साबित करता है कि 2026 में भी शिक्षा का उजाला इन अंधेरी सोच वाली गलियों तक नहीं पहुँचा है।
पुलिस की चेतावनी: "जादू-टोना नहीं, डॉक्टरी इलाज कराएं"
गढ़वा पुलिस ने इस घटना के बाद ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी बीमारी के लिए तांत्रिकों या अंधविश्वास का सहारा न लें।
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सख्त कार्रवाई: बड़गड़ थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपी नागेंद्र को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस इस मामले में स्पीडी ट्रायल (Speedy Trial) की मांग करेगी ताकि आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।
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पारिवारिक तनाव: जांच में यह भी पता चला कि नागेंद्र और उसके पिता के बीच संपत्ति या अन्य पारिवारिक मुद्दों को लेकर भी तनाव था, जिसे उसने अंधविश्वास का रंग देकर हत्या को अंजाम दिया।
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जागरूकता अभियान: पुलिस अब स्थानीय एनजीओ के साथ मिलकर गड़िया गांव और आसपास के क्षेत्रों में अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने की योजना बना रही है।
रिश्तों का कत्ल और अंधविश्वास का जहर
चंद्रिका राम की हत्या केवल एक इंसान की मौत नहीं, बल्कि उस भरोसे की हत्या है जो एक पिता अपने बेटे पर करता है। नागेंद्र ने अपने बच्चों की बीमारी का इलाज कराने के बजाय अपने पिता का खून बहाना बेहतर समझा, जो समाज की मानसिक रुग्णता को दर्शाता है। फिलहाल, हत्यारा बेटा जेल की सलाखों के पीछे है और गड़िया गांव इस खौफनाक मंजर को भूलने की कोशिश कर रहा है।
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