Galudih Fire: बाघबिंदा के जंगलों में भड़की भीषण आग, धू-धू कर जले सैकड़ों पेड़-पौधे, काजू के बागानों पर मंडराया भारी खतरा

गालूडीह के बाघबिंदा जंगल में लगी भीषण आग ने सैकड़ों पेड़ों को अपनी चपेट में ले लिया है। वन विभाग की मशक्कत और काजू के कीमती बागानों पर मंडराते खतरे की पूरी रोंगटे खड़े कर देने वाली रिपोर्ट यहाँ मौजूद है वरना आप प्रकृति की इस बड़ी तबाही का अपडेट मिस कर देंगे।

Feb 23, 2026 - 16:36
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Galudih Fire: बाघबिंदा के जंगलों में भड़की भीषण आग, धू-धू कर जले सैकड़ों पेड़-पौधे, काजू के बागानों पर मंडराया भारी खतरा
Galudih Fire: बाघबिंदा के जंगलों में भड़की भीषण आग, धू-धू कर जले सैकड़ों पेड़-पौधे, काजू के बागानों पर मंडराया भारी खतरा

गालूडीह/घाटशिला, 23 फरवरी 2026 – पूर्वी सिंहभूम जिले के गालूडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत बड़ाकुर्शी पंचायत का बाघबिंदा जंगल सोमवार को आग की लपटों से दहल उठा। दोपहर के वक्त लगी यह आग इतनी भीषण थी कि देखते ही देखते इसने जंगल के एक बड़े हिस्से को अपनी आगोश में ले लिया। आसमान में उठते धुएं के गुबार और चटकते पेड़ों की आवाज ने आसपास के ग्रामीणों में दहशत पैदा कर दी। इस अग्निकांड में न केवल बेशकीमती वन संपदा को नुकसान पहुँचा है, बल्कि क्षेत्र के प्रसिद्ध काजू बागानों पर भी अस्तित्व का संकट मंडराने लगा है।

दोपहर का तांडव: समाजसेवी की सूचना पर दौड़ा प्रशासन

सोमवार दोपहर जब चिलचिलाती धूप अपने शबाब पर थी, तभी बाघबिंदा के घने जंगल से आग की लपटें उठनी शुरू हुईं।

  • तेजी से फैला दायरा: सूखे पत्तों और तेज हवा के कारण आग ने मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया। सैकड़ों छोटे-बड़े पेड़-पौधे इसकी चपेट में आकर झुलस गए।

  • ग्रामीणों का साहस: स्थानीय ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए घंटों तक अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश की ताकि उसे आबादी वाले क्षेत्र तक पहुँचने से रोका जा सके।

  • रेस्क्यू ऑपरेशन: समाजसेवी मंगल कर्मकार ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत वन विभाग और फायर ब्रिगेड को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां और वन कर्मी मौके पर पहुँचे और करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।

काजू के बागानों पर 'रेड अलर्ट'

इस आग ने प्रशासन की चिंता इसलिए भी बढ़ा दी है क्योंकि यह मार्ग कई महत्वपूर्ण काजू जंगलों से सटा हुआ है।

  1. समीपवर्ती इलाके: गिधिबिल, छोटाकुर्शी और आमचुड़िया के जंगलों में काजू की बड़े पैमाने पर खेती होती है।

  2. बार-बार की घटनाएं: स्थानीय लोगों का कहना है कि इन इलाकों में समय-समय पर आग लगने की घटनाएं हो रही हैं, जिससे काजू के पौधों को अपूरणीय क्षति पहुँच रही है।

  3. आर्थिक नुकसान: काजू यहाँ के ग्रामीणों की आजीविका का एक बड़ा साधन है, और बार-बार लगने वाली यह आग उनकी कमर तोड़ रही है।

बाघबिंदा जंगल आग: मुख्य विवरण (Forest Fire Snapshot)

विवरण प्रमुख जानकारी (Key Facts)
घटना का स्थान बाघबिंदा जंगल, बड़ाकुर्शी (गालूडीह)
नुकसान सैकड़ों पेड़-पौधे और वन्य जीव आवास
सूचना प्रदाता मंगल कर्मकार (समाजसेवी)
बचाव कार्य वन विभाग और दमकल टीम (1 घंटे का ऑपरेशन)
संवेदनशील क्षेत्र गिधिबिल, छोटाकुर्शी, आमचुड़िया (काजू वन)

वन विभाग की जांच: क्या यह मानवीय भूल है?

आग पर काबू पाने के बाद अब वन विभाग इसके कारणों की तलाश में जुट गया है।

  • शरारती तत्वों पर शक: विभाग को संदेह है कि किसी ने जानबूझकर सूखी घास में आग लगाई होगी, जो फैल गई।

  • निगरानी में कमी: ग्रामीणों ने मांग की है कि काजू के कीमती जंगलों की सुरक्षा के लिए 'फायर वाचरों' की संख्या बढ़ाई जाए और फायर लाइन की नियमित सफाई हो।

  • पर्यावरण को चोट: आग के कारण जंगल में रहने वाले छोटे जीव-जंतु और पक्षियों के घोंसले पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जिससे स्थानीय इकोसिस्टम असंतुलित हो गया है।

सतर्कता ही बचाव है

बाघबिंदा की आग ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि अगर समय रहते वन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो गालूडीह की पहचान कहे जाने वाले ये हरे-भरे जंगल और काजू के बागान सिर्फ इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएंगे।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।