Chakulia Fire: मौरबेड़ा के जंगलों में भड़की भीषण आग, गांव की ओर बढ़ती लपटों ने मचाई तबाही, ग्रामीणों और वन विभाग ने ऐसे टाला बड़ा हादसा
चाकुलिया के मौरबेड़ा जंगल में लगी भीषण आग ने गांव को अपनी चपेट में लेने की कोशिश की है। ग्रामीणों के अदम्य साहस और वन विभाग के एयर ब्लोअर ऑपरेशन की पूरी रोमांचक रिपोर्ट यहाँ मौजूद है वरना आप प्रकृति के इस तांडव और बचाव की सबसे बड़ी खबर से अनजान रह जाएंगे।
चाकुलिया, 9 फरवरी 2026 – फरवरी का महीना अभी आधा भी नहीं बीता है कि गर्मी की दस्तक ने झारखंड के जंगलों को सुलगाना शुरू कर दिया है। चाकुलिया वन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बड़ामारा पंचायत के मौरबेड़ा गांव के पास सोमवार दोपहर उस वक्त दहशत फैल गई, जब सड़क किनारे सूखी झाड़ियों में लगी एक चिंगारी ने देखते ही देखते विकराल दावानल (Forest Fire) का रूप ले लिया। आग की ऊंची उठती लपटों और धुएं के गुबार ने पूरे इलाके को अपनी आगोश में ले लिया, जिससे ग्रामीणों के बीच अफरा-तफरी मच गई।
जब गांव की ओर बढ़ने लगी 'मौत' की लपटें
दोपहर का समय था और हवा की गति तेज थी, जिसने आग को फैलने में 'घी' का काम किया।
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ग्रामीणों का साहस: आग को गांव की रिहायशी बस्तियों की ओर बढ़ते देख मौरबेड़ा के ग्रामीण डरे नहीं, बल्कि एकजुट होकर मोर्चे पर डट गए। उन्होंने पारंपरिक तरीकों से आग को रोकने की जी-तोड़ कोशिश की।
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वन विभाग का एक्शन: जब आग बेकाबू होने लगी, तो तुरंत प्रभारी वनपाल कल्याण महतो को इसकी सूचना दी गई। वन विभाग की टीम ने बिना देर किए आधुनिक 'एयर ब्लोअर' मशीनों के साथ मौके पर पहुँचकर आग की घेराबंदी शुरू की।
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बड़ा टला हादसा: ग्रामीणों की सतर्कता और विभाग की मशीनी शक्ति के मेल ने आग को गांव की दहलीज को छूने से पहले ही शांत कर दिया।
क्यों सुलग रहे हैं चाकुलिया के जंगल?
स्थानीय लोगों का मानना है कि सड़क किनारे फेंकी गई जलती बीड़ी-सिगरेट या महुआ चुनने के लिए सूखी पत्तियों में लगाई गई आग अक्सर ऐसे हादसों का सबब बनती है। चाकुलिया वन क्षेत्र में साल (Sal) और महुआ के पेड़ों की अधिकता है, जिनकी सूखी पत्तियां इस मौसम में बारूद की तरह काम करती हैं।
चाकुलिया जंगल आग: मुख्य विवरण (Forest Fire Snapshot)
| विवरण | प्रमुख जानकारी (Key Facts) |
| स्थान | मौरबेड़ा गांव, बड़ामारा पंचायत (चाकुलिया) |
| आग का समय | सोमवार दोपहर |
| बचाव टीम | ग्रामीण और प्रभारी वनपाल कल्याण महतो की टीम |
| उपकरण | एयर ब्लोअर (Air Blower) तकनीक |
| नुकसान | वन संपदा को क्षति, जान-माल सुरक्षित |
वन विभाग की चेतावनी: लापरवाही पड़ेगी महंगी
प्रभारी वनपाल ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जंगलों में आग लगाने से बचें। वन विभाग अब पेट्रोलिंग बढ़ाने की योजना बना रहा है ताकि समय रहते ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। मौरबेड़ा की घटना ने साबित कर दिया है कि अगर ग्रामीण और प्रशासन साथ मिलकर काम करें, तो बड़ी से बड़ी आपदा को टाला जा सकता है।
समय रहते चेतने की जरूरत
चाकुलिया के जंगलों से उठती ये लपटें आने वाली भीषण गर्मी की पदचाप हैं। अगर अभी से बचाव के उपाय नहीं किए गए, तो बहुमूल्य वन संपदा और वन्यजीवों को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
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