Chakulia Mystery : महुआ पेड़ के नीचे बेहोश मिले अज्ञात बुजुर्ग ने अस्पताल में तोड़ा दम, शिनाख्त में जुटी पुलिस!
चाकुलिया के भातकुंडा मेमक्लब के पास महुआ पेड़ के नीचे बेहोशी की हालत में मिले अज्ञात बुजुर्ग की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के दौरान हुई मौत की पूरी लाइव रिपोर्ट यहाँ देखें।
चाकुलिया/जमशेदपुर, 3 जून 2026 – पूर्वी सिंहभूम जिले के सुदूरवर्ती चाकुलिया प्रखंड (Chakulia Block) से इस वक्त एक बेहद रहस्यमय और विचलित करने वाली खबर सामने आ रही है। चाकुलिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भातकुंडा पंचायत के मेमक्लब के पास एक पुराने महुआ पेड़ के नीचे एक अज्ञात बुजुर्ग बेहोशी की हालत में जमीन पर पड़े हुए मिले। स्थानीय ग्रामीणों की सतर्कता से उन्हें तुरंत चाकुलिया पुलिस की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया, लेकिन बदकिस्मती से इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। चाकुलिया थाना प्रभारी राजेश कुमार ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज चुकी है और सबसे बड़ी चुनौती इस वक्त मृतक की पहचान (Identification) करने की है।
घटना की इनसाइड स्टोरी: महुआ पेड़ के नीचे पड़े थे वृद्ध, अस्पताल पहुंचते ही थमी सांसें
भातकुंडा पंचायत और चाकुलिया पुलिस सूत्रों से मिली ऑन-फील्ड इनपुट के मुताबिक, यह पूरी घटना इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है:
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ग्रामीणों ने सबसे पहले देखा: बुधवार की सुबह जब भातकुंडा मेमक्लब के पास से कुछ ग्रामीण गुजर रहे थे, तो उनकी नजर महुआ पेड़ के नीचे बेधड़क जमीन पर पड़े एक वृद्ध व्यक्ति पर पड़ी। पास जाकर देखने पर पता चला कि वे पूरी तरह अचेत (बेहोश) थे।
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पुलिस की त्वरित विधिक कार्रवाई: ग्रामीणों ने बिना कोई वक्त गंवाए इसकी सूचना चाकुलिया थाना प्रभारी राजेश कुमार को दी। पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और मानवीय संवेदना दिखाते हुए बुजुर्ग को गाड़ी से सीधे चाकुलिया सीएचसी अस्पताल पहुंचाया।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार: डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद इलाज के क्रम में ही बुजुर्ग की मौत हो गई। थाना प्रभारी ने बताया कि मौत भूख-प्यास, अत्यधिक गर्मी या किसी अंदरूनी बीमारी के कारण हुई है, इसका असली सच पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा।
शिनाख्त के लिए सोशल मीडिया का सहारा, थानों को भेजा गया अलर्ट
चाकुलिया थाना प्रभारी राजेश कुमार ने आस-पास के सभी गांवों के मुखिया और पंचायत प्रतिनिधियों से संपर्क साधा है ताकि मृतक की पहचान जल्द से जल्द की जा सके। इसके साथ ही ओड़िशा और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती थानों को भी हुलिया और तस्वीरें भेजकर गुमशुदगी के मामलों से मिलान करने को कहा गया है।
2026 के इस आधुनिक और डिजिटल युग में, जहाँ हर नागरिक की पहचान को ऑनलाइन रिकॉर्ड से जोड़ा जा रहा है, वहाँ एक बुजुर्ग का इस तरह लावारिस और अज्ञात अवस्था में दम तोड़ देना बेहद दर्दनाक है। इस तरह के मामलों में त्वरित पहचान के लिए पुलिस को स्थानीय स्तर पर 'डिजिटल मिसिंग पर्सन डेटाबेस' का इस्तेमाल तेज करना होगा। फिलहाल, पुलिस ने शव को 72 घंटों के लिए शीतगृह (मर्च्युरी) में सुरक्षित रखवा दिया है, ताकि अगर कोई परिजन उनके बारे में जानकारी ढूंढते हुए आए, तो उन्हें सौंपा जा सके और उनका विधिक रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार हो सके।
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