Chaibasa Tragedy: खूनी तांडव, चाईबासा में हाथी ने एक ही परिवार के 3 लोगों को कुचला, 6 दिनों में 9 मौतें

चाईबासा के गोईलकेरा में पागल हाथी ने झोपड़ी में सो रहे एक ही परिवार के तीन सदस्यों को बेरहमी से कुचलकर मार डाला है। अब तक 9 जिंदगियां लील चुके इस दंतैल के खौफ और वन विभाग की बेबस तैयारियों की पूरी रोंगटे खड़े कर देने वाली रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी कोल्हान के जंगलों में छिपे इस 'यमराज' के अगले हमले से बेखबर रह जाएंगे।

Jan 6, 2026 - 17:33
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Chaibasa Tragedy: खूनी तांडव, चाईबासा में हाथी ने एक ही परिवार के 3 लोगों को कुचला, 6 दिनों में 9 मौतें
Chaibasa Tragedy: खूनी तांडव, चाईबासा में हाथी ने एक ही परिवार के 3 लोगों को कुचला, 6 दिनों में 9 मौतें

चाईबासा, 6 जनवरी 2026 – पश्चिमी सिंहभूम जिले के जंगलों में इन दिनों 'यमराज' का वास है। एक पागल दंतैल हाथी ने पूरे जिले को श्मशान में तब्दील करने की कसम खा ली है। सोमवार की देर रात गोईलकेरा थाना क्षेत्र के सोवा गांव में जो हुआ, उसने इंसानियत की रूह कंपा दी। एक गरीब परिवार अपनी झोपड़ी में चैन की नींद सो रहा था, तभी मौत बनकर आए हाथी ने झोपड़ी को तहस-नहस कर दिया और एक ही परिवार के तीन सदस्यों को मौके पर ही कुचलकर मार डाला। जिले में पिछले 6 दिनों के भीतर मौत का यह आंकड़ा 9 तक पहुँच चुका है, जो वन विभाग के दावों और सुरक्षा इंतजामों के मुंह पर एक करारा तमाचा है।

सोवा गांव का खूनी मंजर: मासूमों पर भी नहीं आई दया

हाथी का हमला इतना अचानक और भीषण था कि परिवार को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

  • उजड़ गया आशियाना: हाथी ने कुंदरा बहदा की कच्ची झोपड़ी को खंडहर बना दिया। भीतर सो रहे कुंदरा बहदा, उनकी मासूम बेटी कोदमा बहदा और नन्हे बेटे सामु बहदा को हाथी ने अपने पैरों तले बेरहमी से रौंद दिया।

  • बाल-बाल बची मां: कुंदरा की पत्नी ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई, लेकिन उसकी आंखों के सामने उसका पूरा संसार उजड़ गया।

  • जिंदगी और मौत के बीच जंग: कुंदरा की दूसरी बेटी जिंगी इस हमले में गंभीर रूप से घायल हुई है। उसके सिर पर गहरी चोटें आई हैं। स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद उसकी नाजुक हालत को देखते हुए उसे राउरकेला रेफर कर दिया गया है।

6 दिन, 9 लाशें: कोल्हान का 'किलर' हाथी

पश्चिमी सिंहभूम में हाथी का आतंक अब एक सांख्यिकी (Statistics) बनता जा रहा है, जो बेहद डरावना है।

  1. लगातार हमले: पिछले 6 दिनों में हाथी ने अलग-अलग गांवों में 9 लोगों की जान ले ली है।

  2. घायलों की कतार: अब तक 6 लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिनमें से कइयों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

  3. प्रशासनिक लाचारी: वन विभाग की टीमें केवल 'मशाल जलाने' और 'पटाखे फोड़ने' की अपील कर रही हैं, जबकि हाथी सरेआम बस्तियों में घुसकर कत्लेआम मचा रहा है।

हाथी का तांडव: अब तक का नुकसान (Death & Injury Toll)

विवरण संख्या (Numbers) स्थिति (Status)
कुल मौतें 09 पिछले 144 घंटों के भीतर
गंभीर घायल 06 विभिन्न अस्पतालों में भर्ती
प्रभावित क्षेत्र गोईलकेरा, सोवा गांव वर्तमान में सबसे संवेदनशील
विभाग की तैयारी मशाल और पटाखे जमीनी स्तर पर नाकाम

इतिहास और रंजिश: क्यों आदमखोर बन रहे हैं चाईबासा के हाथी?

पश्चिमी सिंहभूम और सारंडा का जंगल सदियों से हाथियों का घर रहा है। लेकिन इतिहास गवाह है कि जब-जब हाथियों के गलियारे (Corridors) में इंसानी दखल बढ़ा है, तब-तब प्रकृति ने भयानक बदला लिया है। जानकार बताते हैं कि 1990 के दशक में भी कोल्हान रेंज में एक हाथी ने इसी तरह का 'खूनी सफर' शुरू किया था। आज का दंतैल हाथी शायद उसी पुराने संघर्ष की नई कड़ी है। जंगलों की कटाई और हाथियों के भोजन की कमी ने उन्हें गांवों की ओर धकेल दिया है। वन विभाग के पास हाथियों को 'ट्रैक' करने के लिए आधुनिक तकनीक (जैसे ड्रोन या जीपीएस कॉलर) की भारी कमी है, जिसके कारण वे केवल तब पहुँचते हैं जब लाशें गिर चुकी होती हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट: दहशत में डूबे गांव, जागकर काट रहे रातें

सोवा गांव की घटना के बाद आसपास के दर्जनों गांवों में लोग अपनी जान बचाने के लिए खुद पहरा दे रहे हैं।

  • रेंज टीमों की तैनाती: कोल्हान, संतरा और सैतबा रेंज की टीमें जंगलों में तैनात तो हैं, लेकिन घने कोहरे और दंतैल के आक्रामक व्यवहार के आगे वे बेबस नजर आ रही हैं।

  • ग्रामीणों का गुस्सा: स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग केवल दिन में माइक से अनाउंसमेंट करता है, लेकिन रात में जब हाथी झोपड़ियों को निशाना बनाता है, तो मदद के लिए कोई नहीं होता।

  • खतरे का अलर्ट: वन विभाग ने चेतावनी दी है कि ग्रामीण रात के समय अकेले घर से बाहर न निकलें और सामूहिक रूप से मशालें जलाकर रखें।

सिस्टम की सुस्ती और मासूमों की बलि

चाईबासा में जो हो रहा है, उसे केवल 'प्राकृतिक दुर्घटना' नहीं कहा जा सकता। यह वन विभाग की उस रणनीति की विफलता है जो इंसानों और हाथियों के बीच बढ़ते संघर्ष को रोकने में नाकाम रही है। 6 दिनों में 9 मौतों के बाद भी अगर प्रशासन किसी बड़ी टीम या विशेषज्ञों को नहीं बुलाता, तो यह मौत का सिलसिला रुकने वाला नहीं है।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।