Baharagora College: टूटा ताला, बहरागोड़ा कॉलेज के रिकॉर्ड रूम में घुसे अज्ञात तत्व, दस्तावेजों को नष्ट करने की बड़ी साजिश नाकाम
बहरागोड़ा महाविद्यालय के बीएड कैंपस में आधी रात अज्ञात शरारती तत्वों ने रिकॉर्ड रूम का ताला तोड़कर फाइलों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है। बिना गार्ड के चल रहे इस कॉलेज की सुरक्षा में लगी बड़ी सेंध और पुलिसिया जांच की पूरी रोंगटे खड़े कर देने वाली रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी शिक्षा के मंदिर में हुई इस साजिश को नहीं जान पाएंगे।
बहरागोड़ा, 2 जनवरी 2026 – पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने शिक्षा जगत और स्थानीय प्रशासन की नींद उड़ा दी है। मटिहाना स्थित बहरागोड़ा महाविद्यालय के बीएड कैंपस में बीती रात अज्ञात शरारती तत्वों ने कॉलेज के सबसे संवेदनशील हिस्से, यानी रिकॉर्ड रूम को निशाना बनाया। अपराधियों ने रिकॉर्ड रूम का ताला तोड़कर अंदर घुसने और महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों को नुकसान पहुँचाने का प्रयास किया। हालांकि, किस्मत अच्छी रही कि कोई भी दस्तावेज गायब या नष्ट नहीं हुआ, लेकिन इस घटना ने कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था की उन कमियों को उजागर कर दिया है जो भविष्य में किसी बड़ी आपदा का कारण बन सकती हैं।
सुबह 10 बजे का खुलासा: जब व्याख्याता के उड़े होश
शुक्रवार की सुबह जब कॉलेज कैंपस हमेशा की तरह शांत था, तभी इस बड़ी सेंधमारी का पता चला।
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ताला टूटा मिला: सुबह करीब 10 बजे जब कॉलेज के व्याख्याता डॉ. नायक मुख्य द्वार खोलने पहुँचे, तो उन्हें रिकॉर्ड रूम के दरवाजे के पास संदिग्ध हलचल और क्षतिग्रस्त ताला दिखाई दिया।
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प्राचार्य को सूचना: डॉ. नायक ने तुरंत इसकी जानकारी प्राचार्य डॉ. बीके बेहरा को दी। मौके पर पहुँचते ही प्राचार्य ने भांप लिया कि यह कोई साधारण तोड़फोड़ नहीं, बल्कि कॉलेज के डेटा और रिकॉर्ड्स को निशाना बनाने की कोशिश थी।
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पुलिस की दस्तक: सूचना मिलते ही बहरागोड़ा थाना के अधिकारी शंकर प्रसाद कुशवाहा दलबल के साथ मौके पर पहुँचे और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया।
सुरक्षा पर सवाल: बिना गार्ड के चल रहा है 'शिक्षा का केंद्र'
इस घटना ने महाविद्यालय प्रशासन और विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
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भगवान भरोसे कैंपस: चौंकाने वाली बात यह है कि मटिहाना स्थित इस महत्वपूर्ण कैंपस में वर्तमान में एक भी सुरक्षा प्रहरी (गार्ड) तैनात नहीं है। 2. विश्वविद्यालय की अनदेखी: प्राचार्य डॉ. बेहरा ने बताया कि उन्होंने सुरक्षा गार्ड की नियुक्ति के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को लिखित आग्रह किया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
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अंधेरे का फायदा: कैंपस की चारदीवारी और रात के सन्नाटे का फायदा उठाकर शरारती तत्व आसानी से अंदर दाखिल हुए। अगर पुलिस समय पर नहीं पहुँचती या चोर सफल हो जाते, तो हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर लग सकता था।
बहरागोड़ा कॉलेज कांड: मुख्य विवरण (Action Snapshot)
| विवरण | जानकारी |
| स्थान | मटिहाना स्थित बीएड कैंपस, बहरागोड़ा कॉलेज |
| लक्षित स्थान | रिकॉर्ड रूम (दस्तावेज कक्ष) |
| घटना का समय | गुरुवार और शुक्रवार की मध्य रात्रि |
| सुरक्षा स्थिति | शून्य (कोई गार्ड तैनात नहीं) |
| जांच अधिकारी | शंकर प्रसाद कुशवाहा (बहरागोड़ा थाना) |
इतिहास और डर: क्या किसी पुराने विवाद से जुड़े हैं तार?
बहरागोड़ा महाविद्यालय क्षेत्र का एक प्रतिष्ठित संस्थान रहा है, लेकिन इसका मटिहाना कैंपस हमेशा से अपनी एकांत लोकेशन के कारण असामाजिक तत्वों के रडार पर रहा है। ऐतिहासिक रूप से देखें तो कोल्हान विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले कई कॉलेजों में रिकॉर्ड रूम को जलाना या फाइलों को गायब करना अक्सर भ्रष्टाचार या परीक्षाओं से जुड़े घपलों को छिपाने के लिए किया जाता रहा है। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या कोई ऐसा रिकॉर्ड था जिसे नष्ट करना किसी के फायदे में हो सकता था? फिलहाल पुलिस फाइलों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है, लेकिन बिना सीसीटीवी और बिना गार्ड के इस बड़े कैंपस की सुरक्षा करना नामुमकिन जैसा है।
पुलिसिया जांच: फिंगरप्रिंट्स और संदिग्धों की तलाश
थाना अधिकारी शंकर प्रसाद कुशवाहा ने बताया कि पुलिस ने कॉलेज के आसपास रहने वाले कुछ संदिग्धों की लिस्ट तैयार की है।
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तोड़फोड़ की कोशिश: जांच में यह पुष्टि हुई है कि रिकॉर्ड रूम के अंदर जाने की पूरी कोशिश की गई थी, लेकिन ताला पूरी तरह न खुलने या किसी की आहट मिलने के कारण अपराधी भाग निकले।
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फाइलें सुरक्षित: राहत की खबर यह है कि कॉलेज की सभी संपत्तियां और छात्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलें सुरक्षित पाई गई हैं।
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अल्टीमेटम: स्थानीय लोगों और छात्र संघों ने चेतावनी दी है कि अगर 48 घंटे के भीतर कैंपस में गार्ड की तैनाती नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।
कागजों में सुरक्षित, हकीकत में असुरक्षित
बहरागोड़ा कॉलेज के रिकॉर्ड रूम पर हुआ यह हमला एक अलार्म है। अगर अब भी विश्वविद्यालय प्रशासन नहीं जागा, तो अगली बार शरारती तत्व सफल हो सकते हैं। शिक्षा के मंदिर की सुरक्षा केवल कागजों तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
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