West Singhbhum: जंगलों में मिला नक्सलियों का जखीरा! पश्चिमी सिंहभूम में सुरक्षाबलों ने बरामद की इंसास राइफल, 460 जिंदा कारतूस, क्या नक्सली सुरक्षाबलों को बनाने वाले थे निशाना?
पश्चिमी सिंहभूम जिले के जेटेया थाना क्षेत्र के बुरूबोड़ता जंगल में पुलिस, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर की संयुक्त टीम ने नक्सल विरोधी अभियान के दौरान नक्सलियों के छिपाए गए हथियार और गोला-बारूद का बड़ा जखीरा बरामद किया है। बरामद सामानों में इंसास राइफल, 460 कारतूस और मैगजीन शामिल हैं।
झारखंड में नक्सलवाद की कमर तोड़ने की दिशा में सुरक्षाबलों को एक बड़ी और महत्वपूर्ण सफलता हासिल हुई है। पश्चिमी सिंहभूम जिले के जेटेया थाना क्षेत्र के बुरूबोड़ता घने जंगलों में चलाए गए एक सघन सर्च अभियान के दौरान, सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के छिपाए गए भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किए हैं। पुलिस के मुताबिक, ये हथियार किसी बड़ी हिंसा और सुरक्षाबलों को निशाना बनाने की साजिश का हिस्सा थे, जिसे वक्त रहते नाकाम कर दिया गया।
पुलिस अधीक्षक **(एसपी) अमित रेनू ने शनिवार को इस बड़ी सफलता की जानकारी दी। यह संयुक्त अभियान जिला पुलिस, सीआरपीएफ 174 बटालियन और झारखंड जगुआर की टीमों ने मिलकर चलाया। एसपी रेनू ने बताया कि उन्हें बुरूबोड़ता जंगल में नक्सलियों द्वारा हथियार छिपाए जाने की गुप्त सूचना मिली थी। 17 अक्टूबर को चलाए गए इस अभियान में बम निरोधक दस्ते **(Bomb Disposal Squad) की मदद ली गई, जिसकी वजह से इलाके से बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री और अन्य नक्सली सामान बरामद किए गए।
बरामदगी: इंसास राइफल और 460 जिंदा कारतूस
बरामद किए गए सामानों की सूची नक्सलियों के खतरनाक इरादों को साफ करती है। इनमें कई घातक हथियार शामिल हैं:
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हथियार और गोला-बारूद: एक इंसास राइफल, 460 जिंदा कारतूस, चार इंसास राइफल के मैगजीन, दो एसएलआर मैगजीन, और दो राइफल मैगजीन।
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अन्य सामग्री: नौ खाली चार्जर, दो सीलिंग सिरिंज, पिट्ठू बैग, कंबल, नक्सली पर्चे, नोटबुक और दैनिक उपयोग की वस्तुएं।
एसपी अमित रेनू ने कहा कि नक्सली इन हथियारों का इस्तेमाल निश्चित रूप से सुरक्षा बलों को निशाना बनाने और किसी बड़ी हिंसा को अंजाम देने की योजना में कर सकते थे। समय पर इस जखीरे का मिलना कई अहम जानें बचाने के बराबर है।
नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने की अपील
एसपी रेनू ने कहा कि यह सफलता नक्सल विरोधी अभियान को और तेज करने के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने दावा किया कि नक्सल विरोधी अभियान लगातार जारी है और जल्द ही और भी बड़ी सफलता मिलने की संभावना है।
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आत्मसमर्पण का संदेश: पुलिस अधीक्षक ने इस सफलता के बावजूद नक्सलियों को एक बार फिर भावनात्मक अपील की। उन्होंने नक्सलियों से आग्रह किया कि वे झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर मुख्यधारा में लौट आएं और सामान्य जीवन जिएं। यह नीति पुलिस द्वारा लगातार अपराधियों और भटके हुए युवकों को समाज में वापस लाने का प्रयास है।
बरामदगी के बाद अब सुरक्षाबल इस बात की जांच करेंगे कि ये हथियार किस नक्सली संगठन से जुड़े थे और इन्हें कहां पर इस्तेमाल किया जाना था। पश्चिमी सिंहभूम का जंगल इलाका नक्सलियों के लिए हमेशा से सुरक्षित ठिकाना रहा है, लेकिन पुलिस और सुरक्षाबलों की बढ़ती दबिश ने उनके इरादों को चुनौती देनी शुरू कर दी है।
आपकी राय में, नक्सलियों द्वारा जंगलों में हथियार और गोला-बारूद छिपाने की प्रवृत्ति को पूरी तरह से रोकने और सुरक्षाबलों के लिए खतरे को कम करने के लिए झारखंड में कौन से दो सबसे प्रभावी और अत्याधुनिक तकनीकी कदम उठाने चाहिए?
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