Elephant Terror: खूनी हाथी, चाईबासा में 16 की मौत, नरभक्षी गजराज का कहर, मझगांव-कुमारडुंगी पर मंडराया काल
पश्चिमी सिंहभूम में एक आदमखोर नर हाथी ने अब तक 16 मासूमों को कुचलकर मौत के घाट उतार दिया है। चाईबासा से लेकर कुमारडुंगी तक मचे इस कोहराम और सरकार की बेबसी की पूरी रोंगटे खड़े कर देने वाली रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी इस 'साइलेंट किलर' के अगले हमले का शिकार हो सकते हैं।
चाईबासा, 8 जनवरी 2026 – पश्चिमी सिंहभूम जिले में प्रकृति का एक ऐसा भयावह रूप सामने आया है जिसने समूचे कोल्हान प्रमंडल को हिला कर रख दिया है। एक विशालकाय नर हाथी बीते एक हफ्ते से चाईबासा के सात प्रखंडों में 'मौत का तांडव' मचा रहा है। आधिकारिक और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस खूनी हाथी ने अब तक 16 लोगों को बेरहमी से कुचलकर मार डाला है। चाईबासा, टोंटो, गोइलकेरा और नोवामुंडी के बाद अब यह गजराज हाटगम्हरिया में डेरा डाले हुए है। वन विभाग की तमाम कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं और ग्रामीण अपनी जान बचाने के लिए रतजगा करने को मजबूर हैं।
16 मौतें और दहशत का साया: कहाँ है 'किलर' हाथी?
पश्चिमी सिंहभूम के जंगलों से निकलकर यह हाथी अब रिहायशी इलाकों का यमराज बन गया है।
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ताजा लोकेशन: वर्तमान में हाथी की मौजूदगी हाटगम्हरिया क्षेत्र में देखी गई है।
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अगला टारगेट: वन विभाग की ट्रैकिंग टीम के अनुसार, हाथी तेजी से मझगांव और कुमारडुंगी प्रखंडों की ओर बढ़ रहा है। इन क्षेत्रों में प्रशासन ने 'रेड अलर्ट' जारी कर दिया है।
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आधी रात का खौफ: हाथी बस्तियों में घुसकर घरों को ध्वस्त कर रहा है और जो भी सामने आ रहा है उसे कुचल रहा है। 16 मौतों के आंकड़े ने वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दुवारिका शर्मा की दहाड़: "कागजी कार्रवाई छोड़ मैदान में उतरे सरकार"
इस भीषण मानवीय त्रासदी पर भाजपा नेता और चाईबासा नगर आईटी सेल संयोजक दुवारिका शर्मा ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने इसे सामान्य घटना मानने के बजाय 'आपात स्थिति' (Emergency) घोषित करने की मांग की है।
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हाई-टेक निगरानी: शर्मा ने मांग की है कि केवल टॉर्च और डंडों के भरोसे न रहकर, ड्रोन कैमरों और 24×7 सैटेलाइट ट्रैकिंग सिस्टम का उपयोग किया जाए।
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ट्रेंक्विलाइजेशन टीम: उन्होंने तत्काल प्रशिक्षित टीम बुलाकर हाथी को बेहोश करने या उसे सुरक्षित घने जंगलों में खदेड़ने की मांग की है।
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मुआवजे पर तंज: "16 परिवारों ने अपने सदस्यों को खो दिया है। सरकार को तत्काल सम्मानजनक मुआवजा और घायलों को एयरलिफ्ट कर इलाज की सुविधा देनी चाहिए," शर्मा ने कहा।
हाथी आतंक: प्रभावित क्षेत्रों की सूची (Impact Zone)
| प्रखंड (Block) | स्थिति (Status) | खतरा स्तर (Risk Level) |
| चाईबासा/टोंटो | हमला हो चुका है | हाई |
| नोवामुंडी/गोइलकेरा | तबाही जारी है | क्रिटिकल |
| हाटगम्हरिया | वर्तमान लोकेशन | सुपर क्रिटिकल |
| मझगांव/कुमारडुंगी | संभावित हमला क्षेत्र | अलर्ट पर |
इतिहास और भूगोल: क्यों बढ़ा चाईबासा में हाथियों का गुस्सा?
पश्चिमी सिंहभूम का सारंडा वन क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से हाथियों का घर रहा है। लेकिन पिछले एक दशक में खनन गतिविधियों (Mining) और जंगलों के कटान के कारण हाथियों के प्राकृतिक 'कॉरिडोर' टूट गए हैं। इतिहास गवाह है कि जब हाथियों का झुंड अपने पारंपरिक रास्ते भटक जाता है या कोई नर हाथी (Tusker) अकेला पड़ जाता है, तो वह हिंसक हो जाता है। 2015-16 के दौरान भी इसी क्षेत्र में हाथियों ने भारी तबाही मचाई थी, लेकिन 16 मौतों का यह नया आंकड़ा पिछले 10 सालों में सबसे बड़ा और भयावह है। विशेषज्ञों का मानना है कि 'एलीफेंट कॉरिडोर' में बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप ही इन मौतों की असली वजह है।
ग्रामीणों के लिए 'करो या मरो' की स्थिति: बचाव के उपाय
प्रशासन और स्थानीय नेताओं ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अपनी सुरक्षा खुद भी सुनिश्चित करें:
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शौच के लिए बाहर न जाएँ: सुबह के अंधेरे में बाहर निकलना सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है।
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रात का कर्फ्यू: रात के समय घरों से बाहर न निकलें और टॉर्च का उपयोग न करें, क्योंकि रोशनी हाथी को अपनी ओर आकर्षित कर सकती है।
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अर्ली वार्निंग सिस्टम: दुवारिका शर्मा ने मांग की है कि हर गांव में सायरन या लाउडस्पीकर सिस्टम लगाया जाए जो हाथी के आने की खबर 2 किमी पहले दे सके।
प्रशासन के लिए अग्निपरीक्षा
पश्चिमी सिंहभूम की धरती इस वक्त डर के साये में है। 16 मौतों के बाद अब सरकार और वन विभाग के पास गलती की कोई गुंजाइश नहीं बची है। अगर अगले 24 घंटों में इस हाथी को काबू नहीं किया गया, तो मझगांव और कुमारडुंगी में लाशों का ढेर लग सकता है।
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