UGC War: यूजीसी के नए नियमों पर देश भर में महासंग्राम, सवर्ण समाज ने सांसदों को भेजीं चूड़ियाँ, सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा और कुमार विश्वास का तीखा तंज
यूजीसी के नए 'इक्विटी रेगुलेशन 2026' के खिलाफ देश भर में भड़के गुस्से और सवर्ण समाज के तीखे विरोध की पूरी इनसाइड स्टोरी यहाँ मौजूद है। सांसदों को चूड़ियाँ भेजने से लेकर मजिस्ट्रेट के इस्तीफे और नियमों में छिपे 'एकतरफा' प्रावधानों का पूरा सच विस्तार से पढ़िए वरना आप उच्च शिक्षा में आने वाले इस सबसे बड़े और विवादित बदलाव को जानने से चूक जाएंगे।
नई दिल्ली, 27 जनवरी 2026 – देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में अब 'समानता' के नाम पर एक नया रण छिड़ गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी किए गए नए नियमों— 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन 2026'—ने पूरे भारत में उबाल पैदा कर दिया है। उत्तर प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र और राजस्थान तक सवर्ण समाज के संगठन सड़कों पर उतर आए हैं। हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि दिल्ली स्थित यूजीसी मुख्यालय के बाहर भारी बैरिकेडिंग कर उसे छावनी में तब्दील कर दिया गया है। जहाँ सरकार इसे 'सामाजिक न्याय' बता रही है, वहीं प्रदर्शनकारी इसे सवर्ण छात्रों के खिलाफ 'संस्थागत भेदभाव' करार दे रहे हैं।
विरोध का अनोखा अंदाज: सांसदों को चूड़ियाँ और मजिस्ट्रेट का इस्तीफा
इस आंदोलन ने तब और जोर पकड़ लिया जब विरोध के तरीके बेहद आक्रामक हो गए।
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रायबरेली का आक्रोश: भाजपा किसान नेता रमेश बहादुर सिंह और गौरक्षा दल के अध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने सवर्ण सांसदों को चूड़ियाँ भेजकर अपना विरोध दर्ज कराया है। उनका कहना है कि संसद में उनके प्रतिनिधि चुप क्यों हैं?
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बड़ा इस्तीफा: बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इन नियमों के विरोध में अपने पद से इस्तीफा देकर प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है।
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हस्तियों का तंज: मशहूर कवि कुमार विश्वास सहित कई बड़ी हस्तियों ने सोशल मीडिया पर इन नियमों की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए तीखे कटाक्ष किए हैं।
विवाद की जड़: क्या हैं यूजीसी के नए नियम?
13 जनवरी को नोटिफाई किए गए इन नियमों का उद्देश्य कैंपस में जातीय भेदभाव रोकना है, लेकिन इसके प्रावधानों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं:
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समता समिति (Equity Committee): हर कॉलेज में एक कमेटी बनेगी, जिसमें एससी, एसटी, ओबीसी, महिला और दिव्यांग प्रतिनिधि होंगे। विवाद इस बात पर है कि इसमें जनरल कैटेगरी के लिए कोई जगह नहीं है।
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इक्विटी स्क्वाड और हेल्पलाइन: कैंपस में 24×7 हेल्पलाइन और एक विशेष दस्ता (Squad) होगा जो भेदभाव पर नजर रखेगा।
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कठोर कार्रवाई: नियम तोड़ने पर कॉलेज की ग्रांट (Fund) रुक सकती है, डिग्री पर रोक लग सकती है और मान्यता तक रद्द की जा सकती है।
यूजीसी रेगुलेशन 2026: एक्शन और विवाद (Process & Conflict Snapshot)
| मुख्य बिंदु | समय सीमा / प्रावधान | विवाद का कारण |
| शिकायत पर बैठक | 24 घंटे के भीतर अनिवार्य | जल्दबाजी में गलत फैसले का डर |
| जांच रिपोर्ट | 15 दिनों के भीतर | तथ्यों की अनदेखी की आशंका |
| सजा का प्रावधान | ग्रांट रोकना / मान्यता रद्द करना | संस्थान पर दबाव में फैसला लेने का डर |
| झूठी शिकायत | सजा का कोई स्पष्ट जिक्र नहीं | नियमों के दुरुपयोग की भारी संभावना |
| अपील | 30 दिन के भीतर लोकपाल के पास | लंबी कानूनी प्रक्रिया |
सवर्ण संगठनों के 5 बड़े सवाल?
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ये नियम 'एकतरफा' हैं:
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परिभाषा: सवर्ण छात्र को केवल आरोपी माना जा सकता है, पीड़ित नहीं? समिति में उनका प्रतिनिधित्व क्यों नहीं है?
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दुरुपयोग: अगर कोई छात्र निजी रंजिश में झूठी शिकायत करता है, तो उसके लिए सजा क्यों नहीं है?
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दबाव: मान्यता रद्द होने के डर से कॉलेज मैनेजमेंट हमेशा शिकायतकर्ता के पक्ष में ही फैसला देगा।
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अराजकता: 24 घंटे में कार्रवाई का दबाव कैंपस के माहौल को शैक्षणिक के बजाय राजनीतिक बना देगा।
समाधान या नया विवाद?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसे जवाबदेही सुनिश्चित करने वाला कदम बताया है, लेकिन जमीन पर स्थिति इसके उलट है। जब तक नियमों में 'संतुलन' और 'झूठी शिकायत पर सजा' जैसे प्रावधान नहीं जुड़ते, यह सवर्ण बनाम आरक्षित वर्गों का संघर्ष थमने वाला नहीं दिख रहा है।
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