Telco Chhath: सिटू तालाब में छठी मैया की भव्य प्रतिमा स्थापित – पूरे शहर को मिला सेहत और शुद्धता का बड़ा संदेश!
जमशेदपुर के टेल्को स्थित सिटू तालाब में छठी मैया की प्रतिमा स्थापना इतनी खास क्यों है? पप्पू सिंह जी और समिति के युवाओं ने तालाब को स्वच्छ बनाकर क्या बड़ा उदाहरण पेश किया? छठ पूजा में छिपा है विटामिन D और मानसिक शांति का कौन सा वैज्ञानिक राज? क्या यह पर्व सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन का गुरुमंत्र भी है, जानें पूरा विश्लेषण!
जमशेदपुर, 27 अक्टूबर 2025 – जमशेदपुर, जिसे टाटा की नगरी के नाम से जाना जाता है, वहां धार्मिक आयोजनों को भी एक सामाजिक अभियान का रूप दिया गया है। टेल्को स्थित सिटू तालाब में छठी मैया की भव्य प्रतिमा की स्थापना इस बात का प्रमाण है कि आस्था और सामुदायिक जिम्मेदारी एक साथ चल सकती हैं।
इस वर्ष यह आयोजन न केवल भक्ति का केंद्र बना, बल्कि स्थानीय समिति और समाजसेवी श्री पप्पू सिंह जी के नेतृत्व में स्वच्छता और स्वास्थ्य जागरूकता के महाअभियान का भी केंद्र बन गया, जिसने पूरे शहर के लिए एक अभूतपूर्व उदाहरण पेश किया।
युवा शक्ति ने बदल दी तालाब की तस्वीर
छठ पर्व, जो मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्राचीन संस्कृति और प्रकृति प्रेम का प्रतीक है, इस बार सिटू तालाब में एक नए रूप में सामने आया। छठ पूजा में नदी और तालाबों की सफाई पर बल दिया जाता है, लेकिन टेल्को समिति ने इसे सिर्फ नियम नहीं, बल्कि नैतिक कर्तव्य माना।
मुख्य संरक्षक समाजसेवी एवं अभिभावक श्री पप्पू सिंह जी, संरक्षक लड्डू चौधरी जी और सुमित सिंह जी, तथा समिति के युवा सदस्यों ने स्वयं आगे बढ़कर तालाब परिसर में विशाल स्वच्छता अभियान चलाया। गन्दगी और कचरे को हटाकर घाटों को पूजा के लिए निर्मल बनाया गया।
इस अनोखी पहल ने प्रशासन और अन्य समितियों को भी हैरान कर दिया कि कैसे युवा शक्ति ने अपनी संस्कृति को जीवंत रखने के लिए सामाजिक जिम्मेदारी उठाई।
छठ सिर्फ पूजा नहीं, यह विज्ञान है!
छठ पूजा का सबसे आश्चर्यजनक तथ्य इसका वैज्ञानिक आधार है। समिति ने इस बार पूजा के साथ-साथ इस पहलू पर भी जोर दिया, जो इसे महज धार्मिक अनुष्ठान से ऊपर उठाता है:
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विटामिन D का राज: अस्त और उदय होते सूर्य को जल अर्पित करने का समय (संध्या और उषा अर्घ्य) सूर्य की उन कोमल किरणों के संपर्क में आने का समय होता है, जो मानव शरीर में सबसे अधिक विटामिन D का निर्माण करती हैं। यह विटामिन हड्डियों के लिए अत्यंत आवश्यक है।
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शरीर का प्राकृतिक डिटॉक्स: चार दिनों का कठोर उपवास, जिसमें शुद्ध, तेल-नमक रहित भोजन लिया जाता है, शरीर के पाचन तंत्र को पूरी तरह से विषमुक्त (Detox) करता है।
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मानसिक शांति का मंत्र: जल में खड़े होकर ध्यान और प्रार्थना करना योग और प्राकृतिक चिकित्सा (Hydrotherapy) का हिस्सा है, जो मन को अभूतपूर्व शांति और एकाग्रता प्रदान करता है।
श्री पप्पू सिंह जी ने इस अवसर पर कहा, “छठी मैया का पर्व हमारी संस्कृति की आत्मा है। यह हमें सिखाता है कि स्वच्छता ही सबसे बड़ी आराधना है। जब हम प्रकृति और अपने शरीर के साथ संतुलन में रहते हैं, तभी सच्चे अर्थों में भक्ति का अनुभव होता है।”
टेल्को सिटू तालाब का यह भव्य आयोजन यह संदेश देता है कि समाज अब परंपरा को सिर्फ ढोना नहीं चाहता, बल्कि उसके पीछे छिपे गहन वैज्ञानिक और सामाजिक अर्थों को समझकर उसे अपने जीवन में उतारना चाहता है। छठ पूजा न केवल एक पर्व है, बल्कि सामुदायिक एकता, आत्मसंयम और पर्यावरण संरक्षण का एक जीता जागता पाठ है।
पाठकों से सवाल:
क्या आपको लगता है कि हर धार्मिक त्योहार में इस तरह के स्वच्छता अभियान और स्वास्थ्य जागरूकता को शामिल किया जाना चाहिए? टेल्को समिति की यह पहल अन्य शहरों के लिए कितनी प्रेरक है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में बताएं!
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