Supreme Court: मेटा-वॉट्सऐप को देश छोड़ने की चेतावनी, सुप्रीम कोर्ट ने डेटा शेयरिंग पर लगाई फटकार, 213 करोड़ का जुर्माना और प्राइवेसी पर ऐतिहासिक सख्त रुख

सुप्रीम कोर्ट द्वारा मेटा और वॉट्सऐप को भारत छोड़ने की चेतावनी देने और प्राइवेसी पॉलिसी पर लगाई गई कड़ी फटकार की पूरी रिपोर्ट यहाँ मौजूद है। 213 करोड़ के जुर्माने और डेटा चोरी के आरोपों का पूरा विवरण विस्तार से पढ़िए वरना आप भारतीय डिजिटल इतिहास के इस सबसे बड़े फैसले की जानकारी से चूक जाएंगे।

Feb 3, 2026 - 14:39
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Supreme Court: मेटा-वॉट्सऐप को देश छोड़ने की चेतावनी, सुप्रीम कोर्ट ने डेटा शेयरिंग पर लगाई फटकार, 213 करोड़ का जुर्माना और प्राइवेसी पर ऐतिहासिक सख्त रुख
Supreme Court: मेटा-वॉट्सऐप को देश छोड़ने की चेतावनी, सुप्रीम कोर्ट ने डेटा शेयरिंग पर लगाई फटकार, 213 करोड़ का जुर्माना और प्राइवेसी पर ऐतिहासिक सख्त रुख

नई दिल्ली, 3 फरवरी 2026 – भारतीय न्यायपालिका ने आज दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों, मेटा (Meta) और वॉट्सऐप (WhatsApp) के खिलाफ अब तक का सबसे सख्त रुख अख्तियार किया है। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने डेटा शेयरिंग और निजता के अधिकार (Right to Privacy) के उल्लंघन को लेकर इन कंपनियों को दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर विदेशी कंपनियां भारत के नियमों का सम्मान नहीं कर सकतीं, तो उन्हें देश छोड़कर चले जाना चाहिए। कोर्ट ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा लगाए गए 213.14 करोड़ रुपये के जुर्माने को चुनौती देने वाली कंपनियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह तल्ख टिप्पणी की।

"नियम नहीं मानने तो देश छोड़ दो": CJI का कड़ा संदेश

CJI सूर्यकांत, जस्टिस जयमाला बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने मेटा की 'चालाकी' भरी नीतियों पर प्रहार करते हुए कहा:

  • डेटा चोरी का आरोप: कोर्ट ने कहा कि दिग्गज कंपनियों की प्राइवेसी शर्तें इतनी जटिल होती हैं कि आम नागरिक उन्हें समझ ही नहीं पाते। यह सीधा-सीधा डेटा चोरी का तरीका है।

  • ऑप्ट आउट का सवाल: सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि यूजर्स के पास डेटा शेयरिंग से बाहर रहने (Opt-out) का विकल्प क्यों नहीं है? कोर्ट ने कहा कि हम किसी भी कंपनी को उपभोक्ताओं के डेटा के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं देंगे।

  • अंतरिम आदेश: इस हाई-प्रोफाइल मामले में कोर्ट 9 फरवरी को अपना अंतरिम आदेश सुनाएगा, जिससे वॉट्सऐप का भविष्य भारत में तय होगा।

क्या था मामला? क्यों लगा 213 करोड़ का जुर्माना?

यह विवाद नवंबर 2024 में शुरू हुआ था, जब भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने वॉट्सऐप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी को 'तानाशाही' करार दिया था। जांच में पाया गया कि वॉट्सऐप ने यूजर्स पर "मानो या तो छोड़ दो" (Take it or Leave it) वाली नीति थोप दी थी। यूजर्स को विवश किया गया कि वे अपना डेटा फेसबुक (मेटा) की अन्य कंपनियों के साथ साझा करें। CCI ने इसे प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 का उल्लंघन मानते हुए कंपनी पर भारी जुर्माना लगाया था, जिसके खिलाफ कंपनियां सुप्रीम कोर्ट पहुँची थीं।

सुप्रीम कोर्ट बनाम मेटा: प्रमुख बिंदु (Key Highlights)

विवरण कोर्ट की टिप्पणी / जानकारी
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत
प्रतिवादी कंपनियां मेटा और वॉट्सऐप
विवाद का जड़ 2021 की डेटा शेयरिंग प्राइवेसी पॉलिसी
जुर्माने की राशि 213.14 करोड़ रुपये
अगली सुनवाई 9 फरवरी (अंतरिम आदेश)

आईटी मंत्रालय को बनाया गया पक्षकार

मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी पक्षकार बनाया है। वॉट्सऐप की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अखिल सिब्बल ने दलील दी कि पॉलिसी से बाहर रहने का विकल्प है, लेकिन कोर्ट उनके तर्कों से संतुष्ट नजर नहीं आया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्राइवेसी की रक्षा के लिए वह किसी भी हद तक जा सकता है।

 9 फरवरी को होगा बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट की इस फटकार ने सिलिकॉन वैली तक हलचल मचा दी है। क्या मेटा अपनी नीतियों में बदलाव करेगा या भारत में उसे बड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा? इसका खुलासा 9 फरवरी को होने वाले आदेश से होगा।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।