Saranda Elephant Death: सारंडा के सोसोपी में फिर एक हाथी की संदिग्ध मौत, क्या साजिश का शिकार हो रहे जंगल के गणेश? वन विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
पश्चिमी सिंहभूम के जगन्नाथपुर अनुमंडल के सोसोपी गांव क्षेत्र में एक और हाथी की संदिग्ध मौत से हड़कंप। सारंडा और आसपास के इलाकों में लगातार हो रही मौतों से वन विभाग की संरक्षण व्यवस्था पर सवाल। उच्च स्तरीय जांच की मांग।
पश्चिमी सिंहभूम, 25 नवंबर 2025 – झारखंड (Jharkhand) के पश्चिमी सिंहभूम (West Singhbhum) जिले में सोसोपी गांव (Sosopi Village) क्षेत्र के जगन्नाथपुर (Jagannathpur) अनुमंडल (Subdivision) में एक बार फिर एक हाथी (Elephant) की संदिग्ध (Suspicious) हालत में मौत (Death) होने से इलाके में गहरा आक्रोश (Anger) और हड़कंप (Commotion) मच गया है। यह घटना केवल एक दुर्भाग्यपूर्ण (Unfortunate) हादसा नहीं है, बल्कि इसे सारंडा (Saranda) और उसके आसपास के इलाकों में हाथियों के लगातार गायब (Disappearance) होने और मरने की श्रृंखला (Chain of Deaths) का हिस्सा माना जा रहा है। स्थानीय संगठनों (Local Organizations) ने इस मामले को गंभीर माना है और वन विभाग (Forest Department) की कार्यशैली (Functioning) पर सख्त सवाल (Strict Questions) उठाए हैं।
इस वर्ष कई हाथियों की मौत, निगरानी पर सवाल
सारंडा के जंगल (Forests) एशियाई हाथियों (Asian Elephants) के लिए एक महत्वपूर्ण (Important) आवास (Habitat) माने जाते हैं। लेकिन पिछले कुछ महीनों में इन इलाकों में हाथियों की असामान्य (Abnormal) मौतों की संख्या बढ़ी है। ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों के संरक्षण (Conservation) के नाम पर वन विभाग पर्याप्त कदम (Sufficient Steps) नहीं उठा रहा है।
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वन्यजीव संरक्षण की विफलता: यह एक चिंताजनक (Worrying) तथ्य है कि सिर्फ इसी वर्ष सारंडा और उसके आसपास के जंगलों में कई हाथियों की मौत के मामले सामने आए हैं। इस तरह की लगातार हो रही मौतें स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि वन्यजीव संरक्षण (Wildlife Conservation) व्यवस्था (System) में कहीं गंभीर खामी (Serious Flaw) है। ग्रामीणों का मानना है कि निगरानी की कमी (Lack of Vigilance) के कारण हाथी या तो शिकार (Poaching) का शिकार हो रहे हैं, या मानव-पशु संघर्ष (Man-Animal Conflict) में उनकी जान जा रही है।
ग्रामीणों में आक्रोश, उच्च स्तरीय जांच की मांग
सोसोपी गांव क्षेत्र में हुई इस ताजा (Latest) घटना ने स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों (Environmentalists) को झकझोर (Shaken) कर रख दिया है। हाथियों की मौत का मामला केवल वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इलाके के पारिस्थितिक (Ecological) संतुलन (Balance) के लिए भी एक बड़ा खतरा (Big Threat) है।
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दोषियों पर कार्रवाई की मांग: ग्रामीणों ने इस संदिग्ध मौत की उच्च स्तरीय जांच (High-Level Inquiry) की मांग की है। उनका कहना है कि अगर यह हत्या या साजिश (Conspiracy) का मामला है, तो दोषियों (Culprits) के खिलाफ सख्त कार्रवाई (Strict Action) की जाए। साथ ही, वन विभाग के उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की गई है, जिनकी लापरवाही (Negligence) के कारण वन्यजीवों की सुरक्षा को खतरा (Jeopardy) पहुंचा है।
हाथी को राष्ट्रीय विरासत पशु (National Heritage Animal) का दर्जा (Status) मिला हुआ है। ऐसे में इनकी सुरक्षा सुनिश्चित (Ensure Security) करना सिर्फ वन विभाग की ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य (State) की जिम्मेदारी (Responsibility) है।
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