Gamharia Collapse: करोड़ों के साम्राज्य वाला शराब माफिया गिरफ्तार! बापी दास को प्रशासन की 'छतरी' से खींचकर लाई टीम, सरकारी संरक्षण पर बड़ा सवाल
सरायकेला-खरसावां के गम्हरिया बाजार में उत्पाद विभाग की टीम ने रविवार देर रात कुख्यात शराब माफिया बापी दास को अवैध महुआ शराब बेचते हुए गिरफ्तार किया। सूत्रों के मुताबिक, बापी ने अवैध कारोबार से करोड़ों की संपत्ति अर्जित की है। स्थानीय प्रशासन की 'मिलीभगत' और नगर निगम की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे।
सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया बाजार से आई यह खबर कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक ईमानदारी पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। उत्पाद विभाग की टीम ने रविवार देर रात ऐतिहासिक और साहसिक कार्रवाई करते हुए कुख्यात शराब माफिया बापी दास को अवैध महुआ शराब बेचते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी ने अवैध कारोबार के एक बड़े साम्राज्य के ढहने की शुरुआत कर दी है, लेकिन साथ ही उन स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत को भी उजागर किया है जिन्होंने इतने लंबे समय तक इस कारोबार को संरक्षण दिया।
यह गिरफ्तारी सिर्फ एक माफिया की नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और अवैध पैसे के उस गठजोड़ की है जिसने गम्हरिया बाजार जैसे व्यस्त क्षेत्र में कानून को बंधक बना रखा था। सूत्रों की मानें तो बापी दास की स्थानीय स्तर पर पकड़ इतनी मजबूत थी कि सामान्य अधिकारियों को उसके खिलाफ कार्रवाई करने से पहले कई बार सोचना पड़ता था। बाजार में इस अचानक कार्रवाई से अफरा-तफरी मच गई, जिसने अवैध कारोबारियों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
करोड़ों की अवैध संपत्ति और आलीशान फ्लैट का राज
बापी दास की गिरफ्तारी के साथ ही उसके अवैध कारोबार और संपत्ति का खुलासा हुआ है, जो स्थानीय प्रशासन की चुप्पी पर सवाल खड़े करता है।
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अवैध संपत्ति का साम्राज्य: विभागीय सूत्रों ने खुलासा किया है कि बापी दास ने अवैध शराब के कारोबार से करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित की है। यह संपत्ति कहां से आई और इसे किसके सहयोग से बनाया गया, यह अब जांच का केंद्र बन गया है।
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आलीशान फ्लैट: हैरानी की बात यह है कि उसने हाल ही में एक आलीशान फ्लैट की रजिस्ट्री भी कराई थी। इतने खुलेआम अवैध कमाई को संपत्ति में बदलना, स्थानीय अधिकारियों की आँखों पर पट्टी बंधे होने की तरफ इशारा करता है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि बापी दास को अब तक प्रशासन और पुलिस का संरक्षण प्राप्त था। यह तथ्य कि उत्पाद विभाग की टीम को उपायुक्त के सीधे निर्देश पर कार्रवाई करनी पड़ी, यह दर्शाता है कि स्थानीय प्रशासनिक तंत्र इस माफिया के सामने पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका था।
नगर निगम और मिलीभगत पर उठे सवाल
गम्हरिया बाजार नगर निगम के अधीन क्षेत्र है। इस व्यवसायिक केंद्र में खुलेआम अवैध शराब की बिक्री होना नगर निगम की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
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किसकी सांठगांठ?: यह अब साफ तौर पर जांच का विषय बन गया है कि आखिर किसकी मिलीभगत से यह काला कारोबार इतने लंबे समय से बेरोकटोक चल रहा था? क्या नगर निगम के अधिकारी, स्थानीय पुलिस या अन्य राजनैतिक तत्वों की सांठगांठ ने बापी दास को यह छतरी प्रदान की थी?
उत्पाद विभाग ने बापी दास से पूछताछ शुरू कर दी है और उम्मीद है कि यह गिरफ्तारी न केवल उसके करोड़ों के अवैध साम्राज्य को ध्वस्त करेगी, बल्कि अवैध शराब कारोबार से जुड़े अन्य प्रभावशाली नामों का भी पर्दाफाश करेगी। इस तरह की सख्त कार्रवाई ही कानून का राज स्थापित करने की एकमात्र कुंजी है।
आपकी राय में, अवैध कारोबार से अर्जित संपत्ति को जब्त करने के लिए, उत्पाद विभाग को प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी किस वित्तीय जांच एजेंसी के साथ मिलकर काम करना चाहिए, जो मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच कर सके?
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