Sahibganj Alert : साहिबगंज सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की ईमेल पर धमकी, खाली कराया गया परिसर, एसपी की अगुवाई में छावनी बना कोर्ट
साहिबगंज सिविल कोर्ट को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। भारी पुलिस बल, डॉग स्क्वायड और बम निरोधक दस्ते द्वारा चलाए गए सर्च ऑपरेशन और कोर्ट परिसर को खाली कराए जाने की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ देखें।
साहिबगंज, 26 मार्च 2026 – झारखंड के साहिबगंज जिले में गुरुवार की सुबह उस वक्त दहशत और अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब जिला सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की एक सनसनीखेज धमकी मिली। यह धमकी एक अज्ञात ईमेल के जरिए भेजी गई थी, जिसने प्रशासनिक महकमे की नींद उड़ा दी। जैसे ही सूचना सार्वजनिक हुई, कोर्ट परिसर में मौजूद वकीलों, कर्मचारियों और मुवक्किलों के बीच भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने तुरंत पूरे कोर्ट परिसर को खाली करा लिया। मौके पर एसपी अमित कुमार सिंह भारी पुलिस बल के साथ पहुँचे और देखते ही देखते पूरा इलाका एक अभेद्य किले और पुलिस छावनी में तब्दील हो गया।
ईमेल से 'खौफ' का संदेश: मिनटों में खाली हुआ परिसर
गुरुवार का दिन कोर्ट की कार्यवाही के लिए काफी व्यस्त माना जाता है, लेकिन एक ईमेल ने सब कुछ रोक दिया।
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अचानक आई सूचना: कोर्ट प्रशासन को मिले ईमेल में दावा किया गया था कि परिसर के भीतर विस्फोटक रखे गए हैं। सूचना मिलते ही सुरक्षा अलार्म बज उठा।
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सुरक्षित निकासी: पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला और लाउडस्पीकर के जरिए घोषणा कर सभी को सुरक्षित बाहर निकाला। वकीलों ने अपने चैंबर बंद किए और आम जनता को मुख्य गेट से दूर भेज दिया गया।
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सघन घेराबंदी: एसपी के निर्देश पर कोर्ट के अंदर और बाहर हर 10 मीटर पर सशस्त्र जवानों की तैनाती कर दी गई, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
डॉग स्क्वायड और बम निरोधक दस्ता: हर कोने की सघन तलाशी
धमकी की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी विशेषज्ञों और खोजी कुत्तों की मदद ली गई।
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चप्पे-चप्पे की जांच: बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad) और डॉग स्क्वायड ने आधुनिक मेटल डिटेक्टरों की मदद से कोर्ट की झाड़ियों, छतों, पार्किंग और रिकॉर्ड रूम की बारीकी से जांच की।
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राहत की खबर: घंटों चली सघन तलाशी के बाद फिलहाल कोई भी संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक बरामद नहीं हुआ है। प्रशासन ने इसे एक बड़ी राहत माना है, लेकिन सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है।
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साइबर सेल एक्टिव: जिस ईमेल आईडी से यह धमकी भेजी गई है, उसकी जांच के लिए रांची से साइबर एक्सपर्ट्स की मदद ली जा रही है। आईपी एड्रेस (IP Address) को ट्रैक करने की कोशिश की जा रही है।
साहिबगंज कोर्ट और सुरक्षा का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
साहिबगंज जिला अपनी भौगोलिक स्थिति और गंगा किनारे स्थित होने के कारण हमेशा से सामरिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है।
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न्यायिक सुरक्षा की चुनौती: साहिबगंज कोर्ट में कई हाई-प्रोफाइल मामलों की सुनवाई चलती है। ऐसे में कोर्ट को निशाना बनाना केवल दहशत फैलाना नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने की भी एक कोशिश हो सकती है।
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पहले भी रहे हैं अलर्ट: झारखंड के विभिन्न अदालतों में पहले भी सुरक्षा को लेकर अलर्ट जारी होते रहे हैं, लेकिन ईमेल के जरिए 'मास पैनिक' (Mass Panic) फैलाने का यह तरीका जांच एजेंसियों के लिए एक नई चुनौती है।
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अदालतों की सुरक्षा का अपग्रेड: हाल के वर्षों में झारखंड की निचली अदालतों में सीसीटीवी कैमरे और मेटल डिटेक्टर गेट लगाए गए हैं, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जरूरत फिर से महसूस करा दी है।
अगला कदम: आरोपी की पहचान और कानूनी कार्रवाई
एसपी अमित कुमार सिंह ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक 'हॉक्स कॉल' (Hoax Call) हो सकती है, लेकिन इसे हल्के में नहीं लिया जाएगा।
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एफआईआर दर्ज: साहिबगंज पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ आईटी एक्ट और दहशत फैलाने की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
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संदिग्धों की निगरानी: पुलिस उन लोगों की सूची बना रही है जिनकी हाल ही में कोर्ट से जुड़ी किसी मामले में नाराजगी रही हो या जो न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करना चाहते हों।
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सुरक्षा ऑडिट: कोर्ट परिसर में अब प्रवेश के लिए और भी कड़े नियम लागू किए जा सकते हैं। केवल अधिकृत पहचान पत्र दिखाने वाले वकीलों और मुवक्किलों को ही अंदर जाने की अनुमति मिलेगी।
साहिबगंज सिविल कोर्ट में बम की धमकी ने भले ही घंटों काम रोक दिया हो, लेकिन प्रशासन की मुस्तैदी ने किसी बड़ी अनहोनी को टाल दिया। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और कोर्ट परिसर के आसपास पुलिस का पहरा सख्त है। साइबर टीम उस 'डिजिटल फुटप्रिंट' का पीछा कर रही है जहाँ से यह नफरत भरा ईमेल भेजा गया था। क्या यह केवल किसी की शरारत थी या कोई गहरी साजिश? फिलहाल, साहिबगंज की जनता और वकील समुदाय राहत की सांस ले रहा है, लेकिन सबकी नजरें अब उस आरोपी की गिरफ्तारी पर टिकी हैं।
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