Ranchi Crime: एचआईवी रिपोर्ट दिखाकर छात्रा से 10 लाख की ठगी, ब्लैकमेलिंग का आरोप
रांची में 12वीं की छात्रा कैसे बनी साइबर ठगी का शिकार। सामाजिक माध्यम की दोस्ती के जाल में फंसाकर युवक ने हड़पे 10 लाख के जेवरात। एचआईवी रिपोर्ट दिखाकर कैसी रची गई साजिश। आरोपी अभिमन्यु पर छेड़छाड़ और तस्वीरों की धमकी का आरोप। माता-पिता को क्या कदम उठाने चाहिए।
रांची, 8 दिसंबर 2025 – झारखंड की राजधानी रांची में 12वीं की एक छात्रा के साथ 10 लाख रुपये के जेवरात की ठगी का मामला सामने आया है। ठगी का यह तरीका अत्यंत चौंकाने वाला है। आरोपी युवक ने पहले अपनी एचआईवी जाँच रिपोर्ट दिखाकर छात्रा से भावनात्मक मदद मांगी और फिर उसे डर दिखाकर पैसे हड़पने लगा। पीड़िता छात्रा ने लालपुर थाने में मामले की प्राथमिकी दर्ज कराई है।
सामाजिक माध्यम से दोस्ती और बीमारी का दावा
पीड़ित छात्रा शहर के एक प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ाई करती है और लालपुर के पीस रोड की रहने वाली है। उसने पुलिस को बताया कि वर्ष 2023 में वह सामाजिक माध्यम के माध्यम से बरियातू के रहने वाले अभिमन्यु नामक युवक के संपर्क में आई थी। दोनों के बीच दोस्ती हो गई।
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साजिश की शुरुआत: छात्रा के अनुसार, अभिमन्यु ने पहले उससे 5 हजार रुपये उधार लिए। इसके बाद आरोपी ने उसे अपनी एचआईवी जाँच रिपोर्ट भेजी और झूठा दावा किया कि उसे एडस हो गया है। इस बीमारी का हवाला देकर अभिमन्यु ने छात्रा से तत्काल आर्थिक मदद मांगी।
जेवरात हड़पे, फिर मारपीट और धमकी
छात्रा आरोपी की बातों में आकर भावनात्मक रूप से फँस गई। उसने आरोपी को अपनी हीरे की अंगूठी, सामान्य अंगूठी, महिलाओं की अंगूठी, कान के टॉप्स और चेन सहित करीब 10 लाख रुपये के जेवरात दे दिए। जब छात्रा ने बाद में आरोपी से पैसे वापस मांगे तो उसने लौटाने से साफ इनकार कर दिया।
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छेड़छाड़ और धमकी: पीड़िता ने आरोपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि अभिमन्यु ने उसकी निजी तस्वीरें सार्वजनिक करने की धमकी दी और जेवरात वापस मांगने पर उसके साथ मारपीट भी की। छात्रा ने बताया कि 1 दिसंबर को जब वह पैसे वापस मांगने डिस्टलरी पुल के पास गई थी, तो आरोपी ने पैसे देने से मना करते हुए उसके शरीर को गलत इरादे से छूने की कोशिश की। डरकर छात्रा वहां से भागी और घर जाकर परिजनों को पूरा मामला बताया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।
माता-पिता की जिम्मेदारी और साइबर सुरक्षा
यह घटना सामाजिक माध्यम के इस्तेमाल के गंभीर दुष्परिणामों को दर्शाती है। छोटी उम्र के बच्चे अनिर्णय की स्थिति में होते हैं और साइबर ठगी के बारे में उनके पास सही जानकारी नहीं होती।
ऐसे में माता-पिता की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्हें बच्चों पर सकारात्मक निगरानी रखनी चाहिए, उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर निगाह रखनी चाहिए और कुछ भी संदिग्ध लगने पर तुरंत उनसे बातचीत करनी चाहिए। साइबर ठगी से बचने के लिए बच्चों को जागरूक करना समय की मांग है।
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