Rims Strike: रिम्स में फैला गंदगी का अंबार, 200 सफाई कर्मियों ने बीच मझधार में छोड़ा काम, पीएफ और वेतन घोटाले के आरोपों से मचा हड़कंप
रांची रिम्स में सफाई कर्मियों की हड़ताल और पीएफ-वेतन भुगतान में हुई बड़ी हेराफेरी की पूरी रिपोर्ट यहाँ मौजूद है। नई एजेंसी के आने और 200 कर्मचारियों के भविष्य पर लटकी तलवार का पूरा विवरण विस्तार से पढ़िए वरना आप राजधानी के सबसे बड़े अस्पताल में उपजे इस स्वास्थ्य संकट की जानकारी से चूक जाएंगे।
रांची, 30 जनवरी 2026 – झारखंड के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान रिम्स (RIMS) में शुक्रवार को स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ-साथ स्वच्छता का ढांचा भी चरमरा गया है। अपनी जायज मांगों और हक की लड़ाई को लेकर संस्थान के लगभग 200 सफाई कर्मियों ने सामूहिक हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है। बकाया वेतन और पीएफ राशि में हेराफेरी के गंभीर आरोपों के बीच हुई इस हड़ताल ने रिम्स कैंपस को गंदगी के ढेर में तब्दील करना शुरू कर दिया है। यह विवाद तब और गहरा गया जब प्रबंधन ने पुरानी एजेंसी को हटाकर नई एजेंसी को काम सौंप दिया, जिससे मौजूदा कर्मियों के रोजगार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
वेतन और पीएफ का 'खेल': कर्मियों का फूटा गुस्सा
हड़ताल पर बैठे सफाई कर्मी अन्नपूर्णा यूटिलिटी सर्विस के माध्यम से वर्षों से रिम्स की सेवा कर रहे थे। उनकी नाराजगी के पीछे केवल काम का बोझ नहीं, बल्कि उनके खून-पसीने की कमाई पर हुआ प्रहार है।
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बकाया वेतन: कर्मियों का आरोप है कि पिछले 2 महीने से अधिक समय से उन्हें फूटी कौड़ी भी नहीं मिली है।
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पीएफ घोटाला: सबसे चौंकाने वाला खुलासा 8 महीने से पीएफ (PF) राशि जमा न होने का है। कर्मचारियों को डर है कि उनके भविष्य की निधि के साथ बड़ी धोखाधड़ी की जा रही है।
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एजेंसी का बदलाव: इस बीच रिम्स प्रबंधन ने गुपचुप तरीके से नई एजेंसी को टेंडर दे दिया है। कर्मियों का कहना है कि नई एजेंसी अपने पुराने स्टाफ को लाने की तैयारी में है, जो सीधे तौर पर इन 200 परिवारों की रोजी-रोटी छीनने जैसा है।
कैंपस में हालात बेकाबू: मरीजों की बढ़ी मुसीबत
एजेंसी के सुपरवाइजर ने पुष्टि की है कि फिलहाल इमरजेंसी और हॉस्पिटल एरिया में किसी तरह काम चलाया जा रहा है, लेकिन कैंपस और हॉस्टल एरिया में सफाई पूरी तरह ठप है।
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गंदगी का अंबार: वार्डों के बाहर कचरे के ढेर लगने शुरू हो गए हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है।
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कर्मियों की मांग: सफाई कर्मियों का रुख स्पष्ट है—"पहले हमारा बकाया वेतन चुकाया जाए और पीएफ का हिसाब साफ किया जाए, उसके बाद ही हम काम पर लौटेंगे।"
रिम्स सफाई संकट: मुख्य बिंदु (Strike Analysis)
| विवरण | प्रमुख जानकारी (Key Details) |
| हड़ताली कर्मी | 200 (अन्नपूर्णा यूटिलिटी सर्विस) |
| मुख्य मांग | 2 महीने का वेतन और 8 महीने का बकाया पीएफ |
| विवाद का केंद्र | नई एजेंसी को काम सौंपना और पुराने स्टाफ की छंटनी |
| प्रभावित क्षेत्र | रिम्स कैंपस, हॉस्टल और ओपीडी परिसर |
| प्रबंधन का पक्ष | नई एजेंसी के साथ काम शुरू करने की तैयारी |
नई एजेंसी और स्टाफ का पेच
सफाई कर्मियों ने साफ कर दिया है कि उन्हें प्रबंधन द्वारा नई एजेंसी को काम देने से ऐतराज नहीं है, बशर्ते उनका पिछला हिसाब पूरा किया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि प्रबंधन नई एजेंसी को ढाल बनाकर पुरानी देनदारियों से पल्ला झाड़ना चाहता है। इधर, रिम्स कैंपस में गंदगी की बदबू अब प्रशासनिक गलियारों तक पहुँचने लगी है।
समाधान या स्वास्थ्य आपातकाल?
अगर जल्द ही प्रबंधन और कर्मियों के बीच समझौता नहीं हुआ, तो रिम्स में इलाज कराने आने वाले हजारों मरीजों के लिए यह 'स्वच्छता संकट' एक बड़ी बीमारी का रूप ले सकता है। फिलहाल, 200 सफाई कर्मी अपने हक के लिए डटे हुए हैं।
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