Ranchi Fake Rape Case : संपत्ति विवाद में रिश्तों का कत्ल, झूठे रेप केस में भाई बरी, कोर्ट ने साजिश का किया पर्दाफाश
रांची में जमीन विवाद के चलते महिला ने चचेरे भाई पर POCSO एक्ट के तहत झूठा केस किया। कोर्ट ने CCTV और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को बरी कर दिया। आखिर कैसे उजागर हुआ सच?

झारखंड की राजधानी रांची में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। संपत्ति विवाद में महिला ने अपनी ही 10 साल की बेटी को मोहरा बनाकर चचेरे भाई पर दुष्कर्म के प्रयास का झूठा आरोप लगाया। लेकिन अदालत ने सबूतों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर सच सामने लाते हुए आरोपी को बरी कर दिया।
यह मामला इटकी थाना क्षेत्र का है। 10 अप्रैल 2025 को महिला ने FIR दर्ज कराई थी। उसने अपने चचेरे भाई रमेश (काल्पनिक नाम) पर आरोप लगाया कि उसने उसकी 10 वर्षीय बेटी से दुष्कर्म का प्रयास किया। आरोप लगते ही पुलिस ने कार्रवाई की और रमेश ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया था।
कोर्ट में खुलासा
बचाव पक्ष की वकील मेघा नैया ने कोर्ट में डिस्चार्ज याचिका पर सुनवाई के दौरान बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि यह पूरा मामला जमीन विवाद से जुड़ा हुआ है। महिला ने अपनी बेटी को बहलाकर झूठा बयान दिलवाया ताकि आरोपी को फंसाया जा सके।
मेडिकल और CCTV रिपोर्ट ने बचाई जान
कोर्ट ने पाया कि मेडिकल जांच में किसी तरह के यौन उत्पीड़न की पुष्टि नहीं हुई। वहीं, घटना की तारीख 9 अप्रैल 2025 की रात 8 बजे आरोपी अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के निर्माण स्थल पर ड्यूटी कर रहा था।
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सीसीटीवी फुटेज
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उपस्थिति रजिस्टर
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पर्यवेक्षक का प्रमाण पत्र
इन सभी ने यह साबित कर दिया कि आरोप पूरी तरह झूठा है।
गवाहों के बयान में विरोधाभास
जांच में यह भी सामने आया कि कई गवाहों ने घटना से साफ इनकार किया। इतना ही नहीं, शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि उसने रात 9 बजे वकील को कॉल किया, लेकिन जांच अधिकारी इस दावे की पुष्टि नहीं कर पाए।
अदालत का आदेश
विशेष न्यायाधीश बीके श्रीवास्तव ने कहा कि आरोप संदेहास्पद और मनगढ़ंत हैं। जमीन विवाद के चलते आरोपी को फंसाने की कोशिश की गई। अदालत ने रमेश को डिस्चार्ज स्तर पर ही बरी कर दिया।
जमीन विवाद की वजह
जांच में यह साफ हो गया कि दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से पैतृक जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। इसी रंजिश में महिला ने झूठा केस दर्ज कराया।
यह मामला इस बात की बड़ी मिसाल है कि किस तरह POCSO एक्ट जैसे सख्त कानून का दुरुपयोग भी किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि इस तरह के फर्जी मामलों से न केवल आरोपी का जीवन बर्बाद होता है, बल्कि असली पीड़ितों के लिए न्याय की राह भी कठिन हो जाती है।
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