Railway Bank Scam: रेलवे अर्बन बैंक में 7 दशकों से चल रहे घोटाले का पर्दाफाश!
रेलवे अर्बन बैंक में वर्षों से चल रहे फर्जीवाड़े का खुलासा, दो कर्मचारियों की बर्खास्तगी और कई खातों से अवैध निकासी का मामला सामने आया। जानिए कैसे अब कंप्यूटरीकरण से पारदर्शिता बढ़ रही है।
रेलवे अर्बन बैंक में पिछले 7-8 दशकों से चल रहे घोटाले का खुलासा अब धीरे-धीरे सामने आ रहा है। मेंस कांग्रेस द्वारा बैंक का हैंडओवर लेने के बाद कई अनियमितताओं की परतें खुल रही हैं। पहले जहां बैंक में पारदर्शिता नहीं थी, वहीं अब जांच तेज होने से कई गंभीर आरोप सामने आए हैं।
दो महीने पहले 27 रेल कर्मचारियों को बिना नोटिफिकेशन के फर्जी तरीके से बहाली कराने के आरोप में बर्खास्त किया गया था। अब फिर दो रेल कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। रेलवे की जांच रिपोर्ट के आधार पर चक्रधरपुर रेल मंडल के वरिष्ठ लिपिक समनेंदु जेना और खड़गपुर रेल मंडल के कैशियर विवेकानंद बख्शी को बर्खास्त कर दिया गया है। दोनों पर धोखाधड़ी और वित्तीय गड़बड़ी के गंभीर आरोप साबित हुए।
जांच में यह भी सामने आया है कि मृतक कर्मचारी खादु मुर्मू, जिनका निधन 2010 में हो चुका था, को जीवित दिखाकर उनके खाते से अवैध निकासी की गई। फर्जी हस्ताक्षर करके यह निकासी की गई थी। दूसरा मामला खड़गपुर वर्कशॉप में कार्यरत तकनीशियन भरत से जुड़ा है। उनके खाते में लोन की राशि अधिक दिखाकर फर्जी निकासी की गई थी।
इन मामलों के खुलासे से पूरे दक्षिण पूर्व रेलवे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। बैंक के एजीएम (फाइनेंस) चंदन ठाकुर ने बर्खास्तगी का आदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि बैंक में पारदर्शिता और जिम्मेदारी लाने के लिए कठोर कदम उठाए जा रहे हैं।
एनएफआईआर के जोनल सेक्रेटरी शशी मिश्रा ने बताया कि बैंक का हैंडओवर लेने के बाद इसे कंप्यूटरीकृत और ऑनलाइन किया गया। पहले बैंक में कई कर्मचारी खाते तक नहीं जानते थे। अब ऑनलाइन प्रक्रिया से किसी भी तरह के घोटाले की संभावना लगभग समाप्त हो गई है। उन्होंने कहा कि शेयर होल्डर्स को इसका फायदा मिल रहा है और कर्मचारी भी भरोसे के साथ बैंक से जुड़ रहे हैं।
इस घोटाले ने यह साफ कर दिया है कि वर्षों तक बैंक में निगरानी नहीं थी। फर्जी निकासी, फर्जी बहाली जैसे मामले लंबे समय तक चल रहे थे। अब जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई हो रही है।
बैंक में कंप्यूटरीकरण से पारदर्शिता बढ़ी है। आम कर्मचारियों को इसका लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही यह उदाहरण भी बना कि अगर सिस्टम में निगरानी बढ़े तो भ्रष्टाचार पर काबू पाया जा सकता है।
यह घटना पूरे रेलवे समुदाय के लिए चेतावनी है। साथ ही यह संदेश भी देती है कि सुधार संभव है, बशर्ते नेतृत्व ईमानदार हो और पारदर्शिता के साथ काम किया जाए।
What's Your Reaction?


