Palamu Fake: नकली IAS, हुसैनाबाद में ओडिशा कैडर का फर्जी अफसर धराया, 7 साल से दे रहा था चकमा, गाड़ी पर लिखा था भारत सरकार
पलामू के हुसैनाबाद में पुलिस ने खुद को 2014 बैच का ओडिशा कैडर IAS बताने वाले शातिर जालसाज राजेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। भारत सरकार के नकली बोर्ड वाली कार और फर्जी आईडी कार्ड के जरिए अफसरों को गुमराह करने वाले इस शख्स की पूरी खौफनाक हकीकत यहाँ दी गई है वरना आप भी इस 'बहरूपिये' के अगले शिकार बन सकते थे।
मेदिनीनगर/हुसैनाबाद, 3 जनवरी 2026 – झारखंड के पलामू जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर पुलिस से लेकर प्रशासनिक अधिकारी तक सन्न हैं। हुसैनाबाद पुलिस ने एक ऐसे शख्स को दबोचा है जो पिछले 6-7 सालों से IAS अधिकारी बनकर सिस्टम की नाक के नीचे घूम रहा था। यह कोई साधारण ठग नहीं, बल्कि खुद को 2014 बैच का ओडिशा कैडर का अफसर और दूरसंचार विभाग का CAO (मुख्य लेखा अधिकारी) बताकर रौब झाड़ता था। पकड़े गए आरोपी का नाम राजेश कुमार है, जिसकी आलीशान कार और 'भारत सरकार' के नेम बोर्ड को देखकर असली अधिकारी भी उसे सैल्यूट मार देते थे। लेकिन 2 जनवरी की शाम उसकी किस्मत ने साथ छोड़ दिया और पुलिस के चंद सवालों ने इस 'नकली कलेक्टर' के साम्राज्य को ध्वस्त कर दिया।
हुसैनाबाद थाना में 'साहब' की एंट्री: जब शक बना हकीकत
राजेश कुमार अपनी कार पर 'भारत सरकार' और 'CAO दूरसंचार विभाग' का बोर्ड लगाकर शान से हुसैनाबाद थाना पहुँचा था।
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विरोधाभासी बयान: थाने में बातचीत के दौरान राजेश ने खुद को आईएएस बताया, लेकिन जब पुलिस ने सेवा से जुड़े कुछ तकनीकी सवाल पूछे, तो वह हड़बड़ाने लगा। उसके बयानों में तालमेल की कमी ने पुलिस का संदेह गहरा कर दिया।
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जांच में हुआ खुलासा: एस. मोहम्मद याकूब के निर्देशन में जब टीम ने आधिकारिक रिकॉर्ड खंगाले, तो पता चला कि 2014 बैच के ओडिशा कैडर में इस नाम का कोई अधिकारी है ही नहीं।
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बरामदगी: तलाशी के दौरान उसके पास से फर्जी IPTAFS आईडी कार्ड, मोबाइल, कोचिंग आईडी और उसकी कार पर लगा फर्जी नेम बोर्ड जब्त किया गया।
7 साल का सफर: 'IAS राजेश' की फर्जी दास्तान
पुलिस की कड़ी पूछताछ में राजेश ने जो कबूला, वह व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल है।
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बहरूपिया का सच: राजेश हैदरनगर थाना क्षेत्र के कुकही गांव का रहने वाला है। वह किसी भी सरकारी सेवा में नहीं है, लेकिन पिछले 7 वर्षों से वह अलग-अलग जिलों में फर्जी अधिकारी बनकर अफसरों और आम जनता को गुमराह कर रहा था।
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नकली रौब: उसने अपनी कार को इस तरह डिजाइन किया था कि कोई भी उसे पहली नजर में फर्जी नहीं कह सकता था। वह इसी पहचान का इस्तेमाल कर सरकारी काम रुकवाने या पैरवी करने के लिए करता था।
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कांड संख्या 01/26: हुसैनाबाद पुलिस ने साल के पहले ही कांड के रूप में राजेश के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में मामला दर्ज कर उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
पलामू फर्जी IAS केस: मुख्य विवरण (Action Snapshot)
| विवरण | जानकारी |
| आरोपी का नाम | राजेश कुमार (35 वर्ष) |
| निवासी | ग्राम कुकही, हैदरनगर (पलामू) |
| फर्जी पहचान | 2014 बैच, ओडिशा कैडर IAS / CAO |
| बरामद सामान | कार, नकली भारत सरकार बोर्ड, फर्जी ID कार्ड |
| मुख्य टीम | सोनू चौधरी, बबलू कुमार, धनंजय गोप, रमन यादव |
इतिहास और मनोविज्ञान: क्यों लोग बनते हैं 'नकली अफसर'?
पलामू और गढ़वा के इलाकों में 'लाल बत्ती' और 'भारत सरकार' के रसूख का अपना एक अलग इतिहास रहा है। ऐतिहासिक रूप से यह क्षेत्र पिछड़ा रहा है, जहाँ एक अदने से सरकारी कर्मचारी की भी बड़ी इज्जत होती है। राजेश जैसे अपराधी इसी 'सत्ता के सम्मान' का फायदा उठाते हैं। मनोविज्ञान की दृष्टि से देखें तो इसे 'इम्पोस्टर सिंड्रोम' का अपराधी रूप कहा जा सकता है, जहाँ व्यक्ति अपनी असली पहचान से नफरत करता है और समाज में इज्जत पाने के लिए एक ऐसी पहचान ओढ़ लेता है जो उसके पास है ही नहीं। राजेश ने पिछले 7 सालों में कितने लोगों को ठगा और कितने सरकारी अधिकारियों को गुमराह किया, पुलिस अब इसकी एक लंबी सूची तैयार कर रही है।
हुसैनाबाद पुलिस का अलर्ट: 'लाल बोर्ड' से न खाएं धोखा
इस कार्रवाई का नेतृत्व करने वाले अधिकारियों ने जनता और विभाग के लिए एक बड़ा सबक पेश किया है।
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सोनू कुमार चौधरी का नेतृत्व: पुलिस टीम ने जिस सूझबूझ से राजेश के झूठ को पकड़ा, उसकी हर तरफ सराहना हो रही है।
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चेकिंग अभियान: इस घटना के बाद पलामू पुलिस अब उन तमाम गाड़ियों की जांच कर रही है जो 'भारत सरकार' या 'झारखंड सरकार' लिखकर सड़कों पर दौड़ रही हैं।
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जनता से अपील: पुलिस ने अपील की है कि किसी भी व्यक्ति के पद या गाड़ी के बोर्ड को देखकर प्रभावित न हों, बल्कि संदिग्ध लगने पर तुरंत नजदीकी थाने को सूचित करें।
सलाखों के पीछे पहुँचा 'नकली साहब'
राजेश कुमार का पकड़ा जाना यह साबित करता है कि झूठ की उम्र ज्यादा लंबी नहीं होती। 7 साल तक सिस्टम की आंखों में धूल झोंकने वाला यह 'नकली आईएएस' अब जेल की रोटियां तोड़ेगा। हुसैनाबाद पुलिस की इस सफलता ने साल की शुरुआत में ही अपराधियों को कड़ा संदेश दे दिया है।
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