कैसे जमशेदपुर में दहेज की मांग ने ली एक और जान? पढ़ें पूरी कहानी!

जमशेदपुर में दहेज की मांग के कारण हत्या !

Jun 22, 2024 - 16:08
Jun 22, 2024 - 17:52
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कैसे जमशेदपुर में दहेज की मांग ने ली एक और जान? पढ़ें पूरी कहानी!
जमशेदपुर में दहेज की मांग के कारण हत्या !

जमशेदपुर में एक और दहेज के मामले ने सबको हिला कर रख दिया है। एक महिला की हत्या उसके पति और सास-ससुर ने सिर्फ दहेज की मांग पूरी न होने पर कर दी। यह वाकया कलिकापुर इलाके का है, जो अब एक शोक और गुस्से का मामला बन गया है।

क्या हुआ?

23 वर्षीय पूजा की शादी पिछले साल ही हुई थी। उसके परिवार ने शादी में अपनी पूरी कोशिश से दहेज दिया था, लेकिन उसके पति और ससुराल वालों की भूख कभी नहीं मिट पाई। वो लोग लगातार और दहेज की मांग कर रहे थे। जब पूजा के परिवार ने और दहेज देने से मना किया, तो उसके पति और सास-ससुर ने उसकी हत्या कर दी।

पुलिस की कार्रवाई

पुलिस ने तुरंत घटना स्थल पर पहुंच कर पूजा के पति, सास और ससुर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधिकारी नीरज सिंह ने कहा, "यह एक बहुत ही दुखद और निंदनीय घटना है। हमने मामले की जांच शुरू कर दी है और न्याय दिलाने के लिए पूरी कोशिश करेंगे।"

परिवार का दर्द

पूजा के परिवार वालों का कहना है कि उन्होंने अपनी बेटी की शादी बड़े सपनों के साथ की थी। उसके भाई ने कहा, "हमारी बहन को सिर्फ दहेज के लिए मार दिया गया। हम न्याय चाहते हैं और दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।"

समाज का प्रतिबिंब

यह घटना एक बार फिर समाज के सामने दहेज प्रथा के काले चेहरे को उजागर करती है। आज भी, पढ़े लिखे लोग इस प्रथा का समर्थन करते हैं और लड़कियों की जिंदगी नरक बना देते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता मीरा शर्मा का कहना है, "यह समाज के लिए एक वेक-अप कॉल है। हमें दहेज प्रथा के खिलाफ मिल कर लड़ना होगा और इसे समाप्त करना होगा।"

नया नजरिया

मानवाधिकार वकील, अधिवक्ता राजेश कुमार का कहना है, "दहेज के मामले में सख्ती से कानून को लागू करना जरूरी है। हर ऐसे केस में सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए ताकि लोग इस प्रक्रिया से डरें और ऐसे अपराध न करें।"   इस घटना ने फिर से हमें याद दिलाया है कि दहेज प्रथा एक घिनौना अपराध है जो समाज को अंदर से खा रहा है। इसे खत्म करने के लिए हर व्यक्ति को आगे आना होगा और मिल कर लड़ना होगा। जमशेदपुर में हुई यह दुखद घटना हम सब के लिए एक चेतावनी है कि समय आ गया है कि हम दहेज प्रथा के विरुद्ध अपनी आवाज उठाएं और इसे समाप्त करें।