Jharkhand Weather Alert: अगले 48 घंटे में तेज बारिश और आंधी का खतरा, जानिए किन जिलों पर गिरेगी गाज
झारखंड में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलने वाला है। अगले दो दिनों तक कई जिलों में बारिश, गर्जन और आकाशीय बिजली की चेतावनी। किन जिलों में ज्यादा असर होगा और क्यों है ये बदलाव, पढ़िए पूरी खबर।
झारखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय होने जा रहा है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि अगले दो दिनों यानी 19 और 20 सितंबर को राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। कुछ जिलों में गर्जन, आकाशीय बिजली और 30 से 40 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं भी चलने की संभावना है।
मौसम विभाग का कहना है कि यह बदलाव उत्तर प्रदेश और बिहार के ऊपर बने ऊपरी वायु चक्रवात के कारण हो रहा है, जिसका असर झारखंड पर भी दिखाई देगा।
राजधानी रांची और जमशेदपुर का तापमान
बुधवार को राजधानी रांची का अधिकतम तापमान 27.3 डिग्री और न्यूनतम 22.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, औद्योगिक नगरी जमशेदपुर में अधिकतम तापमान 31.6 डिग्री और न्यूनतम 23.2 डिग्री रहा।
यह साफ संकेत है कि राज्य का मौसम लगातार उतार-चढ़ाव भरा बना हुआ है और आने वाले दिनों में बारिश के कारण तापमान में और गिरावट देखी जा सकती है।
किन जिलों में कितना तापमान?
-
दुमका, गोड्डा और पाकुड़ : 33-34 डिग्री
-
साहिबगंज और जामताड़ा : 32-33 डिग्री
-
चतरा, गढ़वा और पलामू : 33 डिग्री
-
रांची और खूंटी : करीब 29 डिग्री
-
हजारीबाग और बोकारो : 30-32 डिग्री
-
पूर्वी-पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला और सिमडेगा : 33 डिग्री तक
मानसून 2024: अब तक की बारिश का रिकॉर्ड
1 जून से 17 सितंबर तक झारखंड में औसतन 1119.7 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य (935.3 मिमी) से करीब 20% अधिक है।
सबसे ज्यादा बारिश वाले जिले
-
पूर्वी सिंहभूम : 1581.4 मिमी (58% अधिक)
-
रांची : 1419.3 मिमी (49% अधिक)
-
सरायकेला-खरसावां : 1402.3 मिमी (51% अधिक)
-
धनबाद : 1298.6 मिमी (34% अधिक)
कम बारिश वाले जिले
-
पाकुड़ : 795.6 मिमी (24% कम)
-
गोड्डा : 734.5 मिमी (10% कम)
-
देवघर : 762.4 मिमी (13% कम)
बाकी जिलों में बारिश सामान्य या उससे थोड़ी अधिक दर्ज की गई है।
इतिहास: क्यों खास है झारखंड का मानसून?
झारखंड का भौगोलिक स्वरूप हमेशा से मानसून के उतार-चढ़ाव के लिए जाना जाता है। इतिहासकार बताते हैं कि 19वीं सदी में जब झारखंड बंगाल प्रेसीडेंसी का हिस्सा था, तब यहां अकाल और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं लगातार सामने आती थीं। मानसून की अनिश्चितता कभी फसलों को बर्बाद कर देती थी, तो कभी किसानों को भरपूर उपज देती थी।
आज भी स्थिति लगभग वैसी ही है। बारिश ज्यादा हो तो नदी-नाले उफान पर आ जाते हैं, और कम हो तो सूखे जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। यही वजह है कि झारखंड में हर मौसम अलर्ट लोगों के लिए बड़ी खबर बन जाता है।
22 सितंबर के बाद क्या होगा?
मौसम विभाग का अनुमान है कि 22 सितंबर के बाद झारखंड का मौसम शुष्क हो जाएगा। इसका मतलब यह है कि फिलहाल दो दिन की बारिश के बाद राज्य में आसमान साफ रहेगा और तापमान सामान्य हो जाएगा।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून का यह उतार-चढ़ाव किसानों के लिए चुनौती भरा है। देर से होने वाली बारिश कई बार खरीफ फसल को नुकसान पहुंचा देती है।
बदलते मौसम पर सतर्क रहें
झारखंड में मानसून का असर फिलहाल खत्म नहीं हुआ है। अगले दो दिनों तक बारिश और आंधी-तूफान से लोगों को सावधान रहना होगा। खासकर ग्रामीण इलाकों में बिजली गिरने और तेज हवाओं से खतरे की आशंका रहती है।
इसलिए सलाह यही है—मौसम विभाग की चेतावनी को हल्के में न लें, सतर्क रहें और सुरक्षित रहें।
What's Your Reaction?


